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बेटों की वापसी के साथ मिलेगा घरवालों को सुकून

Fri, 28 Jan 2022 11:12 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 28 Jan 2022 11:12 PM IST
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With the return of sons, the family will get relief
बेटे विवेक के आने की राह ताकते मां चंद्रकली और पिता रामविशाल कुशवाहा। - फोटो : BANDA
तिंदवारी (बांदा)। सिर्फ घर की आमदनी ही नहीं गई थी बल्कि सुकून भी छिन गया था। पाकिस्तानी फौज द्वारा करीब साढ़े चार वर्ष पूर्व समुद्र में शिकार के दौरान पकड़े गए चार युवा मछुआरों के घरों की यही कहानी है। दो दिन पूर्व इन मछुआरों की पाकिस्तान के करांची की लांडी जेल से रिहाई के बाद अब बूढ़े मां-बाप और परिजन बेसब्री से उनके घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं। सोमवार तक इन मछुआरों के गांव आने की उम्मीद है।
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जसईपुर गांव निवासी राजमिस्त्री रामविशाल कुशवाहा का बेटा विवेक कुशवाहा 12 जुलाई 2017 को महेदू गांव के बाबू कुशवाहा, उसके भाई चुनकू कुशवाहा, सिंघौली गांव के राजू कुशवाहा तथा बिलगांव के बच्चीलाल के साथ गुजरात के ओखा में मछली शिकार कंपनी में नौकरी करने गए थे।
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चुनकू का परिवार महोबा जनपद में रहता है। 17 सितंबर 2017 को इनके घरों में खबर आई कि समुद्र में शिकार करते समय सीमा उल्लंघन के आरोप में पाक फौज ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। बस इसी खबर के साथ इन परिवारों के घर मातम जैसा माहौल हो गया। विवेक के पिता रामविशाल ने बताया कि बेटा विवेक 10 हजार रुपये हर महीने भेजता था। उसी से घर का खर्च चलता था।
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उसकी शादी के लिए पड़ोसी गांव सैमरी में बात भी चल रही थी। गिरफ्तारी ने सब कुछ रोक दिया। कई साल से पाक जेल से कोई खैर खबर भी नहीं आई थी। मां चंद्रकली नम आंखों से बोली- आपन लाल की चिट्ठी के बारै मा डाकिया से पूछत रहौं। अब मोर लाल सोमवार तक घरे आ जई।
गुजरात सरकार देती है 9000 मासिक, पर यूपी सरकार नहीं
तिंदवारी। विवेक के पिता रामविशाल ने बताया कि मछली शिकार के दौरान समुद्र में पकड़े जाने पर गुजरात सरकार पकड़े गए मछुआरों के परिवारों को 9000 रुपये प्रतिमाह देती है। जबकि यूपी का बाशिंदा होने के बाद भी यहां की सरकार धेला नहीं देती।

एक ही परिवार से तीन कमाऊ चले गए थे जेल
तिंदवारी। महेदू गांव के बाबू कुशवाहा व चुनकू कुशवाहा तथा इसी घराने के राजू भी वर्ष 2017 में गुजरात में मछली का शिकार करते समय पाकिस्तानी फौज द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेज दिए गए थे। बाबू कुशवाहा बोट का ड्राइवर था। पिता प्यारेलाल ने बताया कि दो बेटे और एक नाती के पाक जेल में जाने के बाद घर में सब कुछ उजड़ गया। वह राजमिस्त्री (मजदूर) है। किसी तरह से गुजर बसर कर रहा है। चुनकू अपनी ससुराल लिलवाही (महोबा) में रहता है। जबकि राजू सिंघौली गांव का रहने वाला है।
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