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Banda News: विशाखा कमेटी का अध्यक्ष कौन ... नहीं जानतीं महिला कर्मचारी
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बांदा। सरकारी विभागों में विशाखा कमेटी तो बनी हैं, लेकिन इसकी कभी बैठक नहीं हुई। इस कमेटी में शामिल कई अफसर और कर्मचारी रिटायर्ड हो चुके हैं। दफ्तरों में काम करने वाली महिलाओं को तो यह भी नहीं पता कि विशाखा कमेटी का पदाधिकारी कौन है।
कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2013 को विशाखा गाइडलाइंस जारी की थी।
इसके तहत सरकारी विभागों में जहां 10 से अधिक महिलाएं काम कर रही हैं, वहां पर आंतरिक परिवाद कमेटी गठित करने का निर्देश दिया था। सुप्रीमकोर्ट आदेश के बाद सरकारी विभागों में आंतरिक परिवाद कमेटी तो गठित कर दी गईं, लेकिन गठन के बाद न तो कोई बैठक हुई और न ही पदाधिकाारियों में कोई रद्दोबदल किया गया।
एक दशक पूर्व जो कर्मचारी कमेटी में रखे गए थे, वही आज भी हैं। इनमें कई स्थानांतरित हो गए और कई रिटायर्ड। यहां तक कि कई अधिकारियों और कर्मचारियों को कमेटी के बारे में जानकारी ही नहीं है। महिला कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें कभी भी कमेटी के बारे में नहीं बताया गया। प्राइवेट कार्यस्थलों पर कोई कमेटी नहीं बनी है।
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कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2013 को विशाखा गाइडलाइंस जारी की थी।
इसके तहत सरकारी विभागों में जहां 10 से अधिक महिलाएं काम कर रही हैं, वहां पर आंतरिक परिवाद कमेटी गठित करने का निर्देश दिया था। सुप्रीमकोर्ट आदेश के बाद सरकारी विभागों में आंतरिक परिवाद कमेटी तो गठित कर दी गईं, लेकिन गठन के बाद न तो कोई बैठक हुई और न ही पदाधिकाारियों में कोई रद्दोबदल किया गया।
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एक दशक पूर्व जो कर्मचारी कमेटी में रखे गए थे, वही आज भी हैं। इनमें कई स्थानांतरित हो गए और कई रिटायर्ड। यहां तक कि कई अधिकारियों और कर्मचारियों को कमेटी के बारे में जानकारी ही नहीं है। महिला कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें कभी भी कमेटी के बारे में नहीं बताया गया। प्राइवेट कार्यस्थलों पर कोई कमेटी नहीं बनी है।
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