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कान्वेंट स्कूलों में 131 बच्चों को मिलेगा प्रवेश
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बांदा। कान्वेंट स्कूलों में प्रवेश के लिए 131 अलाभित समूह और दुर्बल वर्ग के बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा। लाटरी पद्धति से इनका चयन किया गया है। कुल 149 बच्चों ने ऑनलाइन आवेदन किए थे। इनमें 18 निरस्त कर दिए गए।
नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) में दी गई व्यवस्था के तहत पहले चरण में इन गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से मांगे गए थे। जिले के सभी निजी स्कूलों को पहली कक्षा की 25 प्रतिशत सीटों पर दुर्लभ व अलाभित समूहों के बच्चों को प्रवेश देना होगा। इसके लिए निजी स्कूलों को सरकार शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए प्रति बच्चा 450 रुपये प्रतिमाह की दर से अनुदान देती है। यदि बच्चे की पढ़ाई पर आने वाला खर्च 450 रुपये से कम होगा तो स्कूल को वास्तविक खर्च के भुगतान की व्यवस्था है।
प्रत्येक छात्र के हिसाब से 5400 रुपये की धनराशि विद्यालय के खाते में भेजी जाती है। अभिभावकों को निजी स्कूल के हिसाब से किताब और कॉपियों, यूनिफार्म की व्यवस्था करने के लिए सरकार अलग से इंतजाम करती है। अभिभावकों के खाते में इस मद से 5000 रुपये प्रतिवर्ष भेजे जाते हैं। जिला समन्वयक सूर्य प्रकाश ने बताया कि दूसरे चरण में 23 अप्रैल तक व तीसरे चरण में 29 अप्रैल से 10 जून तक ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। इसके अलावा ऑफलाइन आवेदन भी खंड शिक्षा अधिकारी से संस्तुति कराकर बेसिक शिक्षा कार्यालय में दो सेट में जमा किया जा सकता है। प्रवेश लाटरी पद्धति से किया जाएगा।
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कंट्रोल रूम के नोडल अधिकारी नामित
बांदा। पेयजल समस्या के समाधान को विकास खंड स्तर पर कंट्रोल रूम खोले गए हैं। इनकी निगरानी के लिए डीएम आनंद कुमार सिंह ने नोडल अधिकारी नामित किए हैं। एडीओ पंचायत नरैनी रमेशचंद्र कुशवाहा, ग्राम विकास अधिकारी तिंदवारी अजीत कुमार, एडीओ पंचायत महुआ निरंजन शुक्ला, ग्राम पंचायत अधिकारी कमासिन संजय द्विवेदी, एडीओ पंचायत जसुपरा कमलाशंकर, एडीओ पंचायत बिसंडा अरुण कुमार, एडीओ पंचायत बड़ोखर खुर्द लक्ष्मी यादव, एडीओ अनिल श्रीवास्तव को बबेरू का नोडल अधिकारी बनाया है, जिन्हें कंट्रोल रूम में आने वाली समस्याओं का निस्तारण कराने का दायित्व दिया गया है। (संवाद)
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नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) में दी गई व्यवस्था के तहत पहले चरण में इन गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से मांगे गए थे। जिले के सभी निजी स्कूलों को पहली कक्षा की 25 प्रतिशत सीटों पर दुर्लभ व अलाभित समूहों के बच्चों को प्रवेश देना होगा। इसके लिए निजी स्कूलों को सरकार शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए प्रति बच्चा 450 रुपये प्रतिमाह की दर से अनुदान देती है। यदि बच्चे की पढ़ाई पर आने वाला खर्च 450 रुपये से कम होगा तो स्कूल को वास्तविक खर्च के भुगतान की व्यवस्था है।
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प्रत्येक छात्र के हिसाब से 5400 रुपये की धनराशि विद्यालय के खाते में भेजी जाती है। अभिभावकों को निजी स्कूल के हिसाब से किताब और कॉपियों, यूनिफार्म की व्यवस्था करने के लिए सरकार अलग से इंतजाम करती है। अभिभावकों के खाते में इस मद से 5000 रुपये प्रतिवर्ष भेजे जाते हैं। जिला समन्वयक सूर्य प्रकाश ने बताया कि दूसरे चरण में 23 अप्रैल तक व तीसरे चरण में 29 अप्रैल से 10 जून तक ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। इसके अलावा ऑफलाइन आवेदन भी खंड शिक्षा अधिकारी से संस्तुति कराकर बेसिक शिक्षा कार्यालय में दो सेट में जमा किया जा सकता है। प्रवेश लाटरी पद्धति से किया जाएगा।
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कंट्रोल रूम के नोडल अधिकारी नामित
बांदा। पेयजल समस्या के समाधान को विकास खंड स्तर पर कंट्रोल रूम खोले गए हैं। इनकी निगरानी के लिए डीएम आनंद कुमार सिंह ने नोडल अधिकारी नामित किए हैं। एडीओ पंचायत नरैनी रमेशचंद्र कुशवाहा, ग्राम विकास अधिकारी तिंदवारी अजीत कुमार, एडीओ पंचायत महुआ निरंजन शुक्ला, ग्राम पंचायत अधिकारी कमासिन संजय द्विवेदी, एडीओ पंचायत जसुपरा कमलाशंकर, एडीओ पंचायत बिसंडा अरुण कुमार, एडीओ पंचायत बड़ोखर खुर्द लक्ष्मी यादव, एडीओ अनिल श्रीवास्तव को बबेरू का नोडल अधिकारी बनाया है, जिन्हें कंट्रोल रूम में आने वाली समस्याओं का निस्तारण कराने का दायित्व दिया गया है। (संवाद)