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रायल्टी घटा दी, उगाही और बालू की दरें नहीं
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Royalty reduced, no collection and sand rates
- फोटो : BANDA
बांदा। खदानों के नए ठेके में रायल्टी घटाकर सरकारी आमदनी में कमी कर दी गई, लेकिन बालू कारोबारियों और सिंडीकेट उगाही करने वालों ने अपनी दरें नहीं घटाई। नतीजतन आम लोगों को अभी भी महंगी बालू खरीदनी पड़ रही है। खनिज अधिकारी के मुताबिक जिले में सात बालू खदानों में खनन चल रहा है।
अक्टूबर से खदानों में नए सिरे से खनन शुरू हुआ है। ज्यादातर पुराने पट्टा धारकों ने ही दोबारा भी खदानें ली हैं। इक्का-दुक्का नए ठेकेदार हैं। इस बार डीलिंग कुछ ऐसी है कि पट्टाधारकों की जेबें और ज्यादा भरेंगी। दूसरी तरफ सरकारी खजाना घटेगा।
खनिज विभाग ने इस बार ज्यादातर खदानें 250 से 350 रुपये घनमीटर रायल्टी पर दीं हैं। पट्टाधारकों ने टेंडर में यही रेट दिए थे, जबकि पिछले वर्षों में हुए पट्टों में इससे तीन गुना ज्यादा रायल्टी पर खदानें आवंटित की गई थीं। खदानों में 300 से 500 रुपये प्रति घन मीटर रायल्टी घटने के बाद भी सिंडीकेट, पुलिस और खनिज विभागों की वसूली दरों में कोई कमी नहीं आई है। नतीजतन आम आदमी को बालू उतनी ही महंगी खरीदनी पड़ रही है।
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खप्टिहा में केन नदी की खदान में 16 एकड़ का पट्टा इस वर्ष 252 रुपये प्रति घन मीटर रायल्टी की दर से इटावा की फर्म को मिला है, जबकि वर्ष 2017 में खप्टिहा खदान 760 रुपये प्रति घन मीटर में उठी थी। 500 रुपये से ज्यादा रायल्टी में कमी आने के बावजूद भी बालू की कीमतों में कमी नहीं आई है। चंदौर (बागै नदी) खदान भी वर्ष 2017 में गोरखरपुर की कंपनी को 818 रुपये प्रति घन मीटर में दी गई थी। इस बार यह 301 रुपये की दर पर दी गई है।
इस वर्ष पट्टे पर दी गई बालू खदानों की दरें
खदान क्षेत्रफल रायल्टी
लहुरेटा 33 हेक्टेयर 316 रुपये
चंदौर 7.80 हेक्टेयर 301 रुपये
दुरेड़ी 27 हेक्टेयर 318 रुपये
खप्टिहा कलां 20 हेक्टेयर 330 रुपये
कनवारा 24 हेक्टेयर 355 रुपये
भुरेड़ी 37 हेक्टेयर 800 रुपये
खप्टिहा 16 हेक्टेयर 252 रुपये
पांच साल के लिए फिर लीं खदानें
बांदा। जिले क ी कई खदानें देश और प्रदेश के विभिन्न स्थानों की बड़ी कंपनियों द्वारा दोबारा लेे ली गई हैं। अगले पांच साल तक ये कंपनियां खदानों में खनन कराएंगी। इन्हें वर्ष 2023 तक का पट्टा मिला है। नरैनी तहसील की लहुरेटा खदान भोपाल (एमपी) की कंपनी ने दोबारा ले ली है। पिछले बार 24 नवंबर 18 तक पट्टा 35 एकड़ क ा था।
अब इस कंपनी को दोबारा 27 नवंबर 2023 तक का पट्टा मिल गया है। इसी तरह बागै नदी की चंदौर खदान फतेहपुर की कंपनी ने दोबारा ली है। इसे 7.80 एकड़ का पट्टा 30 नवंबर 2023 तक दिया गया है। पिछली बार इस खदान को स्टांप न जमा करने पर खनिज विभाग ने नोटिस जारी किया था। सदर तहलील की दुरेड़ी खदान भी उसी ठेकेदार को इस बार भी 5 दिसंबर 2023 तक के लिए दी गई हैं। पिछले वर्ष खदान का सीमांकन कराने और स्टांप जमा करने को इसी फर्म को नोटिस जारी हुई थी।
5 हजार की ट्राली, 40 हजार में ट्रक
बांदा। आम आदमी को अभी भी 100 घन फीट बालू खरीदने के लिए 4000 से 5000 रुपये खर्च करने पड़ रहे है। ट्रैक्टर ट्राली बालू इतने में ही मिल रही है। ट्रकों की क्षमता के मुताबिक अलग-अलग दरे हैं। 10 टायर वाले ट्रक की बालू 40 से 42 हजार रुपये में बिक रही है। इसी तरह 12 चक्का, 14 चक्का, 18 चक्का और 22 चक्का ट्रकों की दरें और ज्यादा हैं। ये दरें बांदा के लिए हैं। बाहर जाने पर जितनी दूरी होगी, उतनी दर बढे़गी। पिछले साल भी बालू के रेट यही थे, जबकि इस बार रायल्टी घटने से बालू की कीमतें घटनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।
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अक्टूबर से खदानों में नए सिरे से खनन शुरू हुआ है। ज्यादातर पुराने पट्टा धारकों ने ही दोबारा भी खदानें ली हैं। इक्का-दुक्का नए ठेकेदार हैं। इस बार डीलिंग कुछ ऐसी है कि पट्टाधारकों की जेबें और ज्यादा भरेंगी। दूसरी तरफ सरकारी खजाना घटेगा।
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खनिज विभाग ने इस बार ज्यादातर खदानें 250 से 350 रुपये घनमीटर रायल्टी पर दीं हैं। पट्टाधारकों ने टेंडर में यही रेट दिए थे, जबकि पिछले वर्षों में हुए पट्टों में इससे तीन गुना ज्यादा रायल्टी पर खदानें आवंटित की गई थीं। खदानों में 300 से 500 रुपये प्रति घन मीटर रायल्टी घटने के बाद भी सिंडीकेट, पुलिस और खनिज विभागों की वसूली दरों में कोई कमी नहीं आई है। नतीजतन आम आदमी को बालू उतनी ही महंगी खरीदनी पड़ रही है।
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खप्टिहा में केन नदी की खदान में 16 एकड़ का पट्टा इस वर्ष 252 रुपये प्रति घन मीटर रायल्टी की दर से इटावा की फर्म को मिला है, जबकि वर्ष 2017 में खप्टिहा खदान 760 रुपये प्रति घन मीटर में उठी थी। 500 रुपये से ज्यादा रायल्टी में कमी आने के बावजूद भी बालू की कीमतों में कमी नहीं आई है। चंदौर (बागै नदी) खदान भी वर्ष 2017 में गोरखरपुर की कंपनी को 818 रुपये प्रति घन मीटर में दी गई थी। इस बार यह 301 रुपये की दर पर दी गई है।
इस वर्ष पट्टे पर दी गई बालू खदानों की दरें
खदान क्षेत्रफल रायल्टी
लहुरेटा 33 हेक्टेयर 316 रुपये
चंदौर 7.80 हेक्टेयर 301 रुपये
दुरेड़ी 27 हेक्टेयर 318 रुपये
खप्टिहा कलां 20 हेक्टेयर 330 रुपये
कनवारा 24 हेक्टेयर 355 रुपये
भुरेड़ी 37 हेक्टेयर 800 रुपये
खप्टिहा 16 हेक्टेयर 252 रुपये
पांच साल के लिए फिर लीं खदानें
बांदा। जिले क ी कई खदानें देश और प्रदेश के विभिन्न स्थानों की बड़ी कंपनियों द्वारा दोबारा लेे ली गई हैं। अगले पांच साल तक ये कंपनियां खदानों में खनन कराएंगी। इन्हें वर्ष 2023 तक का पट्टा मिला है। नरैनी तहसील की लहुरेटा खदान भोपाल (एमपी) की कंपनी ने दोबारा ले ली है। पिछले बार 24 नवंबर 18 तक पट्टा 35 एकड़ क ा था।
अब इस कंपनी को दोबारा 27 नवंबर 2023 तक का पट्टा मिल गया है। इसी तरह बागै नदी की चंदौर खदान फतेहपुर की कंपनी ने दोबारा ली है। इसे 7.80 एकड़ का पट्टा 30 नवंबर 2023 तक दिया गया है। पिछली बार इस खदान को स्टांप न जमा करने पर खनिज विभाग ने नोटिस जारी किया था। सदर तहलील की दुरेड़ी खदान भी उसी ठेकेदार को इस बार भी 5 दिसंबर 2023 तक के लिए दी गई हैं। पिछले वर्ष खदान का सीमांकन कराने और स्टांप जमा करने को इसी फर्म को नोटिस जारी हुई थी।
5 हजार की ट्राली, 40 हजार में ट्रक
बांदा। आम आदमी को अभी भी 100 घन फीट बालू खरीदने के लिए 4000 से 5000 रुपये खर्च करने पड़ रहे है। ट्रैक्टर ट्राली बालू इतने में ही मिल रही है। ट्रकों की क्षमता के मुताबिक अलग-अलग दरे हैं। 10 टायर वाले ट्रक की बालू 40 से 42 हजार रुपये में बिक रही है। इसी तरह 12 चक्का, 14 चक्का, 18 चक्का और 22 चक्का ट्रकों की दरें और ज्यादा हैं। ये दरें बांदा के लिए हैं। बाहर जाने पर जितनी दूरी होगी, उतनी दर बढे़गी। पिछले साल भी बालू के रेट यही थे, जबकि इस बार रायल्टी घटने से बालू की कीमतें घटनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।