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मंडल में परवान नहीं चढ़ी मुर्गी पालन योजना

Wed, 16 Dec 2015 11:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Wed, 16 Dec 2015 11:32 PM IST
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Planning Board not materialize climbed poultry

बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में बड़े मुर्गी फार्म लगाने

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की योजना तीन साल में भी परवान नहीं चढ़ सकी। दैवी आपदा से जूझ रहे मंडल में 50 से 60 लाख रुपये मार्जिन मनी (अंशदान) जमा कर पाना किसानों के बूते की बात नहीं है।

कुछ लोगों ने हिम्मत जुटाकर मुर्गी फार्म के लिए आवेदन किए, पर बैंकों के रवैये से परेशान होकर फाइलें किनारे रख दीं। इस वर्ष भी पशुपालन विभाग ने फिर चारों जनपदों में मुर्गी फार्म हाउस के लिए आवेदन मांगे हैं।

राष्ट्रीय कुक्कट विकास नीति-2013 के तहत चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों में एक-एक लेयर्स फार्म और पैरेंट ब्वायलर फार्म लगाने का लक्ष्य रखा गया था।

लेयर्स फार्म की एक यूनिट की लागत 1.80 करोड़ रुपये है। इसमें से 30 फीसदी मार्जिन मनी जमा की जानी है, यानी आवेदक को लाभार्थी अंशदान के रूप में 54 लाख रुपये बैंक खाते में जमा करना होगा। शेष धनराशि पशुपालन विभाग को ब्याज मुक्त बैंकों से ऋण उपलब्ध कराना है।

इस धनराशि को आवेदकों को पांच सालों में जमा करना है। इस अवधि की ब्याज करीब 58 लाख रुपये विभाग वहन करेगा। लेयर्स फार्म में 30 हजार लेयर (चूजे) रखने की योजना है।

ऐसे ही ब्वायलर पैरेंट फार्म की प्रति यूनिट दो करोड़ 6 लाख रुपये है। इसमें भी 30 फीसदी यानी 61.50 लाख रुपये अंशदान जमा करने का प्रावधान है।

लाभार्थी के बैंक ऋण की करीब 68 लाख रुपये ब्याज पशुपालन विभाग को जमा करना है। इसमें 10 हजार लेयर की व्यवस्था है। पिछले तीन सालों से यह योजना ज्यों का त्यों पड़ी है।

शुरू में करीब आठ लोगों ने मुर्गी फार्म के लिए पशुपालन विभाग में हिम्मत जुटाकर आवेदन जमा किया। विभाग से फाइल तैयार कर बैंक भेजी गई, लेकिन बैंक अधिकारियों ने ऋण देने में आनाकानी की।

अंतत: आवेदकों को आवेदन की फाइल घर में किनारे रखनी पड़ी। मंडल में पिछले तीन साल से कभी सूखा तो ओलावृष्टि और अतिवृष्टि का सामना कर रहे किसानों के पास 50-60 लाख रुपये मार्जन मनी जमा करने की कूबत नहीं है।

इस कारण शासन की दोनों योजनाएं मंडल में परवान नहीं चढ़ सकीं। कामधेनु और माइक्रो कामधेनु योजनाओं की तरह ये भी सिर्फ कागजों में ही चल रही हैं।

चित्रकूटधाम मंडल में मुर्गी व ब्यावलर फार्म के लिए मौसम अनुकूल नहीं है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो चूजे और मुर्गियां 38 डिग्री सेल्सियस तापमान तक में सही-सलामत रहते हैं।

इसके ऊपर पारा चले जाने पर इनकी मौत होने लगती है, जबकि मंडल में गर्मी के सीजन में तापमान 48 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। ऐसे में 30000 लेयर (पक्षी) रखने के लिए एसी या फिर ठंडा वातावरण बनाने के लिए बड़ी धनराशि खर्च करनी पड़ेगी। मुर्गी पालन योजना में आ रही बाधा के लिए यह भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है।

विभाग की मुर्गी व कुक्कट पालन से संबंधित इन दोनों योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया है, लेकिन मार्जिन मनी अधिक होने और वातावरण अनुकूल न होने की वजह से लोग कतरा रहे हैं।

कुछ आवेदन आए, पर बैंकों के असहयोग की वजह से उनका लोन नहीं पास हो सका। इस कारण तीन साल में अभी तक एक भी फार्म नहीं शुरू हो सके। इस साल फिर से चारों जिलों में आवेदन मांगे जा रहे हैं।
-डा. सुशील कुमार, उप निदेशक पशुपालन, चित्रकूटधाम मंडल, बांदा।


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