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Banda News: 30 हजार का धान, बिक्री के इंतजार में 10 हजार खर्च किए
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फोटो- 12 मंडी समिति में स्थित यूपीएसएसए का क्रय केंद।
फोटो- 13 मंडी में विपणन के क्रय केंद्र का भरा गोदाम।
फोटो- 14 मंडी में धान बेचने के इंतजार में खडे ट्रैक्टर।
फोटो- 15 संतोष
फोटो- 16 प्रताप यादव
फोटो- 17 अरविंद
फोटो- 18 सिराज
- क्रय केंद्रों में धान बेचने के लिए सर्दी में ठहरे हैं किसान
- एफआरके न मिलने से खरीद व उठान प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (धान में मिलाया जाना वाला पोषक चावल) उपलब्ध न होने से क्रय केंद्रों में धान की उठान व खरीद दोनों प्रभावित हैं। कई क्रय केंद्र तो पूर्ण रूप से भर चुके हैं। धान खरीद का काम बंद है। कुछ में सिर्फ धान खरीदने की महज खानापूर्ति हो रही है। शुक्रवार को तिंदवारी रोड मंडी समिति के क्रय केंद्रों की पड़ताल की गई तो व्यवस्थाएं बदतर नजर आईं। कड़ाके की ठंड में किसान चार-चार दिन से मंडी में पड़ा हुआ है। इनके लिए न तो रैन बसेरा की व्यवस्था है न ही अलाव जल रहे हैं। बेसहारा मवेशियों का आलम यह है कि किसानों को रात-रातभर धान की रखवाली करनी पड़ रही है।
केस-1
ठंड में वह चार दिनों से पड़े
बिलगांव के किसान संतोष कुमार का कहना है कि धान बेचने के लिए 22 दिसंबर को मंडी समिति के विपणन क्रय केंद्र में आए थे। ठंड में वह चार दिनों से पड़े हैं। प्रतिदिन दो हजार ट्रैक्टर का भाड़ा और खाने पीने में 500 रुपये खर्च हो रहे हैं। ट्रैक्टर में 25 से 30 हजार का धान होगा। 10 हजार रुपये खर्च कर चुके हैं। दो चार दिन और रहना पड़ा तो जितने का धान नहीं है उतना खर्च हो जाएगा।
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केस-2
केंद्र में धान रखने की जगह न होने से
जौरही के किसान प्रताप यादव का कहना है कि 21 दिसंबर को धान बेचने के लिए मंडी आए थे। केंद्र प्रभारी क्रय केंद्र में धान रखने की जगह न होने से मजबूरी बता रहे हैं। पिता ठंड में बीमार हो गए तो उन्हें घर भेज दिया। यहां पर न रहने के लिए रैन बसेरा है और न ही छाया अथवा अलाव की व्यवस्था है। यहीं पर खाना बनाते हैं, रात में ट्रैक्टर ट्राली के नीचे लेट कर रात गुजारते हैं।
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केस-3
हजार रुपये खाने पीने में खर्च हो रहा
पचनेही के अरविंद का कहना है कि 23 दिसंबर को आए थे। यहां 15 ट्रैक्टर पहले से खड़े हैं। केंद्र में धान रखने की जगह न होने धान खरीदने की महज खानापूर्ति हो रही है। ऐसे में नंबर आने में अभी 10 दिन लग जाएंगे। 1500 रुपये रोज में ट्रैक्टर लेकर आए हैं। दो लोग यहां बने हैं। हजार रुपये खाने पीने में खर्च हो रहा है। दस दिन रुकने से अच्छा है कि धान यहीं उतारकर घर चले जाए।
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केस-4
किराये का ई-रिक्शा करके 20 क्विंटल धान लाए थे
महोखर के किसान सिराज का कहना है कि भइया तीन दिन पहले आए थे। पांच बीघा के कास्तकार हैं। किराये का ई-रिक्शा करके 20 क्विंटल धान लाए थे। ई-रिक्शा जमीन में धान उड़ेल कर चला गया है। रात में पशु बोरी फाड़-फाड़कर धान बर्बाद कर रहे हैं। मंडी में बेसहारा गोवंशियों का कब्जा है। रात के समय पशु सक्रिय हो जाते हैं। पांच से छह के झुंड में आते हैं। पशुओं के लिए जागना पड़ रहा है।
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क्रय केंद्रों में 600 एमटी धान डंप
जिले में अब तक 9508 धान खरीद गया है। विपणन विभाग की माने तो 28 क्रय केंद्रों में करीब छह हजार मीट्रिक टन से अधिक धान डंप है। धान मिलर्स ने अभी तक कुल तीन हजार मीट्रिक टन धान की ही उठान की है।
चार्ट-
जिले में धान खरीद का लक्ष्य व खरीद(एमटी में)
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एजेंसी क्रय केंद्र लक्ष्य खरीद
खाद्य विभाग 17 25000 6691
पीसीएफ 05 6000 1222
यूपीएसए 06 6000 1595
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योग- 28 37000 9508
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वर्जन-
एफआरके की परीक्षण में देरी की वजह से फर्म यहां एफआरके नहीं उपलब्ध करा पा रहा है। जिससे क्रय केंद्र फुल हो रहे हैं। यह समस्या लगभग पूरे प्रदेश में है। स्थानीय स्तर की समस्या होती तो निपटा लेते। - रामानंद, जिला विपणन अधिकारी
मिलर्स ने वाराणसी में डाला डेरा
मिलर्स का कहना है कि एफसीआई बिना एफआर के चावल नहीं लेता है। संभागीय विपणन अधिकारी ने एफआरके का टेंडर वाराणसी के व्यापारी को दे रखा है। जो मंडल के मिलर्स को एफआर नहीं उपलब्ध करा पा रहा है। वहीं मिलर्स का कहना है कि यदि सरकार धान उठाने के बाद 25 दिन के अंदर चावल उपलब्ध कराने का अनुबंध किए है। अन्यथा की स्थिति में 100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से जुर्माना लिया जाता है। इस कारण धान की उठान बंद है। वहीं मिलर्स का कहना है कि यदि सरकार धान उठाने के बाद 25 दिन के अंदर चावल उपलब्ध कराने का अनुबंध किए है। अन्यथा की स्थिति में 100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से जुर्माना लिया जाता है। इस कारण धान की उठान बंद है।
क्या है फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके)
फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) ऐसे छोटे दाने होते हैं जो चावल के आटे और सूक्ष्म पोषक तत्वों (जैसे आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन B12) को मिलाकर बनाए जाते हैं और फिर इन्हें चावल के दाने का आकार दिया जाता है, ताकि इन्हें सामान्य चावल में मिलाकर कुपोषण और खून की कमी (एनीमिया) जैसी समस्याओं से लड़ने में मदद मिल सके। ये दिखने और पकने में सामान्य चावल जैसे ही लगते हैं, पर इनसे शरीर को अतिरिक्त पोषण मिलता है।
उपयोग:
इन कर्नेल को सामान्य चावल के साथ मिलाया जाता है। देश में आमतौर पर 10 ग्राम एफआरके को 1 किलोग्राम सामान्य चावल में मिलाया जाता है। ये पकने के बाद सामान्य चावल से अलग नहीं दिखते और स्वाद में भी कोई अंतर नहीं आता। संक्षेप में, फोर्टिफाइड राइस कर्नेल पोषण से भरपूर चावल के छोटे दाने हैं जो सामान्य चावल में मिलाकर उसे अधिक पौष्टिक बनाते हैं और कुपोषण के खिलाफ एक प्रभावी तरीका हैं।
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फोटो- 13 मंडी में विपणन के क्रय केंद्र का भरा गोदाम।
फोटो- 14 मंडी में धान बेचने के इंतजार में खडे ट्रैक्टर।
फोटो- 15 संतोष
फोटो- 16 प्रताप यादव
फोटो- 17 अरविंद
फोटो- 18 सिराज
- क्रय केंद्रों में धान बेचने के लिए सर्दी में ठहरे हैं किसान
- एफआरके न मिलने से खरीद व उठान प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (धान में मिलाया जाना वाला पोषक चावल) उपलब्ध न होने से क्रय केंद्रों में धान की उठान व खरीद दोनों प्रभावित हैं। कई क्रय केंद्र तो पूर्ण रूप से भर चुके हैं। धान खरीद का काम बंद है। कुछ में सिर्फ धान खरीदने की महज खानापूर्ति हो रही है। शुक्रवार को तिंदवारी रोड मंडी समिति के क्रय केंद्रों की पड़ताल की गई तो व्यवस्थाएं बदतर नजर आईं। कड़ाके की ठंड में किसान चार-चार दिन से मंडी में पड़ा हुआ है। इनके लिए न तो रैन बसेरा की व्यवस्था है न ही अलाव जल रहे हैं। बेसहारा मवेशियों का आलम यह है कि किसानों को रात-रातभर धान की रखवाली करनी पड़ रही है।
केस-1
ठंड में वह चार दिनों से पड़े
बिलगांव के किसान संतोष कुमार का कहना है कि धान बेचने के लिए 22 दिसंबर को मंडी समिति के विपणन क्रय केंद्र में आए थे। ठंड में वह चार दिनों से पड़े हैं। प्रतिदिन दो हजार ट्रैक्टर का भाड़ा और खाने पीने में 500 रुपये खर्च हो रहे हैं। ट्रैक्टर में 25 से 30 हजार का धान होगा। 10 हजार रुपये खर्च कर चुके हैं। दो चार दिन और रहना पड़ा तो जितने का धान नहीं है उतना खर्च हो जाएगा।
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केस-2
केंद्र में धान रखने की जगह न होने से
जौरही के किसान प्रताप यादव का कहना है कि 21 दिसंबर को धान बेचने के लिए मंडी आए थे। केंद्र प्रभारी क्रय केंद्र में धान रखने की जगह न होने से मजबूरी बता रहे हैं। पिता ठंड में बीमार हो गए तो उन्हें घर भेज दिया। यहां पर न रहने के लिए रैन बसेरा है और न ही छाया अथवा अलाव की व्यवस्था है। यहीं पर खाना बनाते हैं, रात में ट्रैक्टर ट्राली के नीचे लेट कर रात गुजारते हैं।
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हजार रुपये खाने पीने में खर्च हो रहा
पचनेही के अरविंद का कहना है कि 23 दिसंबर को आए थे। यहां 15 ट्रैक्टर पहले से खड़े हैं। केंद्र में धान रखने की जगह न होने धान खरीदने की महज खानापूर्ति हो रही है। ऐसे में नंबर आने में अभी 10 दिन लग जाएंगे। 1500 रुपये रोज में ट्रैक्टर लेकर आए हैं। दो लोग यहां बने हैं। हजार रुपये खाने पीने में खर्च हो रहा है। दस दिन रुकने से अच्छा है कि धान यहीं उतारकर घर चले जाए।
केस-4
किराये का ई-रिक्शा करके 20 क्विंटल धान लाए थे
महोखर के किसान सिराज का कहना है कि भइया तीन दिन पहले आए थे। पांच बीघा के कास्तकार हैं। किराये का ई-रिक्शा करके 20 क्विंटल धान लाए थे। ई-रिक्शा जमीन में धान उड़ेल कर चला गया है। रात में पशु बोरी फाड़-फाड़कर धान बर्बाद कर रहे हैं। मंडी में बेसहारा गोवंशियों का कब्जा है। रात के समय पशु सक्रिय हो जाते हैं। पांच से छह के झुंड में आते हैं। पशुओं के लिए जागना पड़ रहा है।
क्रय केंद्रों में 600 एमटी धान डंप
जिले में अब तक 9508 धान खरीद गया है। विपणन विभाग की माने तो 28 क्रय केंद्रों में करीब छह हजार मीट्रिक टन से अधिक धान डंप है। धान मिलर्स ने अभी तक कुल तीन हजार मीट्रिक टन धान की ही उठान की है।
चार्ट-
जिले में धान खरीद का लक्ष्य व खरीद(एमटी में)
एजेंसी क्रय केंद्र लक्ष्य खरीद
खाद्य विभाग 17 25000 6691
पीसीएफ 05 6000 1222
यूपीएसए 06 6000 1595
योग- 28 37000 9508
वर्जन-
एफआरके की परीक्षण में देरी की वजह से फर्म यहां एफआरके नहीं उपलब्ध करा पा रहा है। जिससे क्रय केंद्र फुल हो रहे हैं। यह समस्या लगभग पूरे प्रदेश में है। स्थानीय स्तर की समस्या होती तो निपटा लेते। - रामानंद, जिला विपणन अधिकारी
मिलर्स ने वाराणसी में डाला डेरा
मिलर्स का कहना है कि एफसीआई बिना एफआर के चावल नहीं लेता है। संभागीय विपणन अधिकारी ने एफआरके का टेंडर वाराणसी के व्यापारी को दे रखा है। जो मंडल के मिलर्स को एफआर नहीं उपलब्ध करा पा रहा है। वहीं मिलर्स का कहना है कि यदि सरकार धान उठाने के बाद 25 दिन के अंदर चावल उपलब्ध कराने का अनुबंध किए है। अन्यथा की स्थिति में 100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से जुर्माना लिया जाता है। इस कारण धान की उठान बंद है। वहीं मिलर्स का कहना है कि यदि सरकार धान उठाने के बाद 25 दिन के अंदर चावल उपलब्ध कराने का अनुबंध किए है। अन्यथा की स्थिति में 100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से जुर्माना लिया जाता है। इस कारण धान की उठान बंद है।
क्या है फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके)
फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) ऐसे छोटे दाने होते हैं जो चावल के आटे और सूक्ष्म पोषक तत्वों (जैसे आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन B12) को मिलाकर बनाए जाते हैं और फिर इन्हें चावल के दाने का आकार दिया जाता है, ताकि इन्हें सामान्य चावल में मिलाकर कुपोषण और खून की कमी (एनीमिया) जैसी समस्याओं से लड़ने में मदद मिल सके। ये दिखने और पकने में सामान्य चावल जैसे ही लगते हैं, पर इनसे शरीर को अतिरिक्त पोषण मिलता है।
उपयोग:
इन कर्नेल को सामान्य चावल के साथ मिलाया जाता है। देश में आमतौर पर 10 ग्राम एफआरके को 1 किलोग्राम सामान्य चावल में मिलाया जाता है। ये पकने के बाद सामान्य चावल से अलग नहीं दिखते और स्वाद में भी कोई अंतर नहीं आता। संक्षेप में, फोर्टिफाइड राइस कर्नेल पोषण से भरपूर चावल के छोटे दाने हैं जो सामान्य चावल में मिलाकर उसे अधिक पौष्टिक बनाते हैं और कुपोषण के खिलाफ एक प्रभावी तरीका हैं।