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जन प्रतिनिधियों और मेडिकल कॉलेज ने भेजा था नामकरण प्रस्ताव

Sun, 14 Nov 2021 11:27 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 14 Nov 2021 11:27 PM IST
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Nomenclature proposal was sent by public representatives and medical college
Nomenclature proposal was sent by public representatives and medical college - फोटो : BANDA
बांदा। राजकीय मेडिकल कॉलेज का नामकरण वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम किए जाने की मांग और कोशिशें कई साल से चल रहीं थीं। जनप्रतिनिधियों से लेकर मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य तक ने इसकी वकालत की। जनसुनवाई में की गई मांग पर मुख्यमंत्री ने महानिदेशक से आख्या मांगी थी। मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य ने जन प्रतिनिधियों की संस्तुति का हवाला देकर नामकरण के लिए प्रस्ताव 4 मई 2018 को भेज दिया था।
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रानी दुर्गावती का संबंध बांदा जिले की धरती से रहा है। उनका जन्म ऐतिहासिक कालिंजर दुर्ग में हुआ। वह चंदेल राजा कीर्ति सिंह की पुत्री थीं। उनके नाम पर देश में और भी कई स्मारक हैं। तत्कालीन सांसद भैरो प्रसाद मिश्रा ने 17 दिसंबर 2016 को, विधायक प्रकाश द्विवेदी ने 19 दिसंबर 2016 को, विधायक राजकरन कबीर ने 17 दिसंबर 2016 को मुख्यमंत्री को अपने पत्रों में इसकी संस्तुति की थी।
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सांसद ने रानी दुर्गावती राष्ट्रीय स्मारक समिति के अध्यक्ष बीडी गुप्ता की मांग का हवाला भी दिया था। उधर, एसीडी स्टूडियो निर्देशक निशा गुप्ता रश्मि ने कहा कि रानी दुर्गावती स्मारक समिति मेडिकल कॉलेज में और सुविधाएं बढ़ाने का प्रयास करेगी।
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रानी दुर्गावती राष्ट्रीय स्मारक समिति, बांदा की रविवार को हुई बैठक में बांदा मेडिकल कॉलेज का नाम रानी दुर्गावती के नाम पर किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए खुशी जताई। साथ ही समिति के संस्थापक अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार, समाजसेवी बीडी गुप्ता की इच्छा और उनके प्रयासों को भी याद किया।
कोषाध्यक्ष सत्येंद्र गुप्ता, महामंत्री डॉ. हरिओम तत्सत ब्रह्मशुक्ल ने कहा कि अपनी मृत्यु के एक माह पूर्व श्री गुप्त लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले थे। उन्हें रानी दुर्गावती की पूरी जानकारी देकर यही मांग की थी।
उनके साथ साहित्यकार केशव सिंह दीखित भी थे। मुख्यमंत्री को रानी दुर्गावती महाकाव्य की प्रति भेंट की थी। बैठक में राजकुमार राज, अतुल गुप्ता, विवेक गुप्ता, कौशल किशोर गुप्ता, निशा गुप्ता, मुकुल गुप्ता इत्यादि भी शामिल रहे। सभी ने मेडिकल कॉलेज नामकरण का स्वागत किया।
पूर्व कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने मेडिकल कॉलेज का नाम बदलने पर कहा है कि प्रदेश सरकार को पहले मेडिकल कॉलेज की हालत बदलनी चाहिए थी। इसे मेगा मेडिकल कॉलेज बनाना था। मेडिकल कॉलेज शुरू होने के पांच वर्षों बाद भी यहां कई विभाग चालू नहीं हुए। तमाम कीमती मशीनें धूल खा रहीं हैं। उनके संचालन की व्यवस्था नहीं है। कई उपकरण और सुविधाएं शुरू होना बाकी है। पर्याप्त स्टाफ और बजट नहीं मिल रहा है।
कहा कि उन्होंने अपने मंत्रित्व काल में यह मेडिकल कॉलेज न सिर्फ स्वीकृत कराया बल्कि भरपूर बजट देकर भव्य इमारत तैयार कराई। वह इसको मेगा मेडिकल कॉलेज बनाना चाहते थे, लेकिन सत्ता परिवर्तन से उनकी मंशा अधूरी रह गई।

अब मौजूदा सरकार को नाम बदलने का श्रेय लेने के बजाय सुविधाएं दुरुस्त कराने में तवज्जो देनी चाहिए। उन्होंने बांदा का नाम ऋषि बामदेव से जुड़ा है। उन्हीं के नाम से यह बांदा नाम पड़ा। इसीलिए बांदा मेडिकल कॉलेज नाम रहा। कहा कि रानी दुर्गावती हमारे बुंदेलखंड की शान हैं। उनकी शान के मुताबिक अब मौजूदा सरकार मेडिकल कॉलेज को और शानदार बनाएं।
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