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अवैध पुल बनाने वालों के खिलाफ नहीं की जा रही है कार्रवाई
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 11 Jun 2015 10:54 PM IST
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राष्ट्रीय नदी केन की जल धाराएं जगह-जगह बंधी हुई हैं। बालू कारोबारियों ने पूरी नदी में कई स्थानों पर जल धारा को बांध कर अवैध पुल बना लिए हैं। इनसे रात दिन बालू के वाहन निकाले जा रहे हैं। प्रशासन अवैध पुलों को तोड़ने की अक्सर रस्म अदायगी करता है, पर कुछ पुलों की तरफ प्रशासन कभी निगाह नहीं डालता।
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मध्य प्रदेश की सीमा से लगे नरैनी क्षेत्र में अक्सर खदानों और नदी पर बने पुलोें पर छापे पड़ते हैं लेकिन सदर तहसील में चल रहे पुलोें और खदानों की तरफ से प्रशासन आंख मूंदे हुए है। राष्ट्रीय नदी की जल धारा को बांधना जुर्म है। पर यह अपराध केन नदी में खुलेआम हो रहा है।
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मध्य प्रदेश की सरहद में कोलावल रायपुर से लेकर करतल, लहूरेहटा, नसैनी और बांदा सदर के नजदीक अछरौड़ और कनवारा घाटों में बालू कारोबारियों ने नदी पर पुल बना रखा है। हाल ही में मीडिया में सुर्खियां बनने के बाद लहूरेहटा, नसैनी घाट और बाईपास के नजदीक केन नदी पर बनाए गए पुल प्रशासन ने आंशिक रूप से तुड़वाकर क्षतिग्रस्त कर दिए।
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हालांकि इसके पहले भी प्रशासन कई पुलों को तोड़ने की रस्म अदायगी कर चुका है। ये पुल बाद में फिर चालू हो गए लेकिन अछरौड़ और कनवारा घाट में नदियों पर बने पुल कभी नहीं तोड़े गए। बताते हैं कि इन पुलों से सत्तारूढ़ दल के लोगों के तार जुड़े हैं।
दो दिन पहले भी डीएम और एसपी नरैनी क्षेत्र के लहूरेहटा और नसैनी घाटों का निरीक्षण करने गए थे। जबकि कई दिन पहले दोनों घाटों पर बने अवैध पुल क्षतिग्रस्त करा दिए गए थे। बांदा में अवैध खनन और अवैध पुलों के मामले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और हाईकोर्ट में भी चल रहे हैं।