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किसानों की खुदकुशी और अन्ना पशुओं के उत्पात पर खामोशी अखरी

Thu, 25 Apr 2019 11:36 PM IST
banda Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 25 Apr 2019 11:36 PM IST
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Khamoshi Akhari on farmers' suicide and vandalism
वाराणसी में जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी - फोटो : ANI
बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बांदा की सरजमीं पर पहली बार आने से उनकी जनसभा चुनावी रंग में रंगी रहने की उम्मीद थी। कांग्रेस समेत गैर भाजपाई दलों को निशाने पर रखकर भाजपा सरकार की उपलब्धियां गिनाया जाना भी अपेक्षित था। इसके बीच बुंदेलियों को उम्मीद थी कि बांदा के चुनावी मैदान मैदान में प्रधानमंत्री के स्तर से उन समस्याओं के हल की उम्मीद भी बंधेगी, जिनसे सिर्फ बांदा ही नहीं बुंदेलखंड के लोग आए दिन दो-चार होते हैं।
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फसलों की बर्बादी से किसानों की खुदकुशी, अन्ना जानवरों का उत्पात, खनन में चंद लोगों की मनमानी, लघु, सीमांत किसानों की जोत में वृद्धि जैसे कई मुद्दे रहे, जो पीएम की 35 मिनट की तकरीर का हिस्सा नहीं बन सके। हां पीएम ने फिर सरकार बनने पर बुंदेलखंड में जलधार बहाने का भरोसा देते हुए किसान और सामान्य वर्ग को कुछ राहत की उम्मीद जगाई है।
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बांदा के भूरागढ़ निवासी केशव प्रसाद गौतम ने बुंदेलखंड की सबसे बड़ी समस्या अन्ना पशुओं का उत्पात बताया। उन्होंने बताया कि जनसभा में पीएम से इस समस्या से राहत भरा संदेश मिलने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। महोबा के चरखारी निवासी प्रवेश कुमार शर्मा ने बताया कि बुंदेलखंड प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर होने के बाद भी बदहाल है।
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इसका प्रमुख कारण यहां के संसाधनों पर दूसरे जिले या प्रदेश के लोगों का कब्जा होना है। इस कारण यहां के लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है, जिससे लोग पलायन कर रहे हैं, लेकिन पीएम ने इस मुद्दे पर भी कुछ नहीं कहा। इसी तरह चित्रकूट के छपरा मनहाई गांव निवासी रामप्रसाद ने बताया कि दैवी आपदाओं के चलते यहां का किसान कर्जदार है। फसलें बर्बाद होने से हर साल बड़ी संख्या में किसान आत्महत्या कर रहे हैं।



कर्जमाफी का फायदा यहां के ज्यादातर किसानों को नहीं मिला। आशा थी प्रधानमंत्री लघु सानों की जोत सीमा बढ़ाने की घोषणा करेंगे, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। हमीरपुर के सुशील प्रसाद का कहना है कि बुंदेलखंड में उद्योग न के बराबर हैं, लेकिन प्रधानमंत्री ने उद्योगों को लेकर कोई बात नहीं की, जिससे निराशा ही हाथ लगी है।
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