बुंदेलखंड की पहली शरई पंचायत बांदा में
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हथौरा (बांदा)।ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की शरई पंचायत (दारुल कजा) अब बांदा में भी होगी। इसका एलान यहां बोर्ड संयोजक ने किया। बुंदेलखंड में यह बोर्ड की पहली शरई पंचायत होगी। बोर्ड सदस्यों का इस संबंध में कहना है कि इस व्यवस्था से देश की विभिन्न अदालतों में चल रहे मुकदमों में कमी आएगी। बुधवार को यहां विश्व विख्यात मदरसा जामिया अरबिया, हथौरा में बोर्ड के दारुल कजा (शरई पंचायत) संयोजक मौलाना अतीक अहमद कासमी ने उत्तर प्रदेश की 15वीं शरई पंचायत शुरू करने की घोषणा की। उन्हाेंने शरई पंचायतों की अहमियत बताई।
कहा कि इन पंचायतों को अन्यथा नहीं लिया जाना चाहिए। मुस्लिम या किसी अन्य संप्रदाय के लोग अपने विवाद या मामले अपने धर्म के मुताबिक निपटाना चाहते हैं तो इसमें आखिर हर्ज क्या है? इससे अदालतों का बोझ कम होगा और लोगों का पैसा व समय बचेगा। शरई पंचायतों में मुस्लिमों के सभी मसलक (वर्ग) के लोग शामिल हैं। पंचायत शरीयत के मुताबिक फैसले करेगी। इसमें देश की किसी भी अदालत को कोई आपत्ति नहीं है। न ही यह अदालतों के समकक्ष है।
शरई कानून पर चलने वालों पर किसी को एतराज नहीं होना चाहिए। न ही इसमें कोई फिरकापरस्ती जैसी बात है। नफरत से तो मुल्क पीछे जाएगा। तरक्की रुक जाएगी। मौलाना ने मीडिया को सलाह दी कि सही सूरत पेश करें। बैठक का संचालन मौलाना मसर्रत (हथौरा) ने किया। बैठक को मौलाना मुफ्ती उबैदुल्ला (सचिव इस्लामिक फिकह एकेडमी), काजी तबरेज आलम (दारुल कजा), काजी अंजार आलम, नायब काजी (अमारत शरई, पटना, बिहार) आदि ने भी संबोधित किया। मदरसा संचालक मौलाना मुफ्ती कारी हबीब अहमद सहित मुफ्ती नजीब अहमद आदि ने सभी की अगुवानी की। बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों समेत विभिन्न जनपदों और राज्यों के नुमाइंदे शामिल रहे। मौलाना कासमी ने लोगों के सवालों के जवाब भी दिए।
कैसे चलेगी शरई पंचायत
हथौरा। पीड़ित पक्ष को अपना मामला लिखित रूप से शरई पंचायत में पेश करना होगा। इसमें 500 रुपये फीस भी जमा होगी। जो गरीब यह फीस देने में असमर्थ होंगे उनका पैसा पंचायत के जिम्मेदार जमा करेंगे। अर्जी आने के बाद नोटिस जारी होगा। दोनों पक्षों की बात सुनी जाएगी। उन्हें अपने गवाह और सुबूत पेश करने का मौका मिलेगा। पूरी कोशिश आपसी बातचीत के जरिए मामला तय कराने की होगी। शरई पंचायत के फैसले से कोई पक्ष संतुष्ट नहीं है तो वह पुनर्विचार के लिए दोबारा अर्जी दे सकता है। पंचायत की पूरी कार्रवाई और फैसले की लिखित प्रति दोनों पक्षों को दी जाएगी। बांदा की शरई पंचायत में उन पड़ोसी जनपदों के मामले भी सुने जाएंगे जहां शरई पंचायत स्थापित नहीं है।