बेटी का रिश्ता तय करने जाना था, बैंक से सूखा राहत की रकम निकालने गया, मरा लौटा
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नोटबंदी के बैंकों की लंबी लाइनों में धक्के सहने के बाद भी तमाम किसान अपना ही पैसा पाने से दरकिनार किए जा रहे हैं। लाइनों में लगने के बाद भी पैसा मिलने से मायूस या तनाव में आने के बाद हार्टअटैक या सुसाइड से मौत की अब तक चार घटनाएं हो चुकी हैं। ताजी घटना बबेरू कोतवाली क्षेत्र के मुरवल गांव की है। शिवबरन साहू (45) पुत्र बाबूलाल का खाता गांव में स्थित इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक में था। सूखा राहत अनुदान के लगभग 10 हजार रुपये उसके खाते में जमा थे।
इससे चार हजार रुपये निकालने के लिए वह दो दिनों से बैंक आकर लाइन में धक्के खा रहा था लेकिन दोनों दिन उसे पैसा नहीं मिला और वह मायूस तथा तनावग्रस्त हालत में लौट गया। उसे बेटी के लिए लड़का ढूंढने की चिंता थी। इसी काम के लिए वह जसपुरा जाना चाहता था। उसकी मंशा थी कि लड़का पसंद आने पर वहीं कुछ रस्म अदा कर देंगे।
इसके लिए वह बैंक से पैसा निकालना चाहता था लेकिन दो दिनों से पैसा न मिलने पर शनिवार को शाम उसे दिल का दौरा पड़ा और कुछ ही देर में घर पर ही उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम हाउस में पिता ने बताया कि शिवबरन के नाम छह बीघे खेती है। केसीसी का 25 हजार और गांव वालों का 20 हजार रुपये कर्ज था लेकिन बैंक से रुपये न मिलने पर वह तनाव में आ गया।