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‘एक्सचेंज’ पर बैंकों ने बदला रुख
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 24 Nov 2016 11:21 PM IST
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इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक में किसानों की भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
बांदा। ‘एक्सचेंज’ पर बैंकों का रुख बदल गया। ज्यादातर बैंकों में सिर्फ खाताधारकों के ही पुराने 500 व 1000 के नोट बदले गए। रिजर्व बैंक के नियमों को दरकिनार कर बैंकों के अपना नियम थोपने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जरूरतमंद नोट बदलने के लिए एक बैंक से दूसरे बैंक भटकते रहे।
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नोटबंदी के 16वें दिन भी बैंकों में अफरा-तफरी रही। नोट बदलने की अंतिम तिथि 24 नवंबर होने पर बैंक खुलने से पहले ही लंबी लाइनें लग गईं। लोग घंटों धूप में खड़े होकर बारी का इंतजार करते रहे, लेकिन बैंकों ने नोट बदलने आने वालों को तगड़ा झटका दे दिया। पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक, एचडीएफसी, बैंक आफ इंडिया, इलाहाबाद, बैंक आफ बड़ौदा आदि बैंकों में खाताधारकों के ही नोट बदले और जमा किए गए।
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दूरदराज या दूसरे बैंकों के खाताधारकों को दोटूक इनकार कर हटा दिया गया। अचानक बने इस नियम पर लोगों में रोष पनप उठा। बैंक कर्मियों को खूब खरी-खोटी सुनाई गई। मायूसी हाथ आने पर भड़के उपभोक्ताओं को पुलिस कर्मियों ने समझा-बुझाकर काबू किया। इस पर शाखा प्रबंधकों का कहना है कि कैश का संकट है। मांग के मुताबिक करेंसी नहीं मिल रही। ज्यादातर रुपया एक्सचेंज में खत्म हो रहा था। खाताधारकों की जरूरत पूरी करना मुश्किल था। मजबूरी में यह निर्णय लेना पड़ा।
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