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Banda News: कोर्ट में खुली विभाग की पोल, बिजली चोरी में आरोपी बरी
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चित्रकूट। बिजली चोरी के 15 साल पुराने मामले में विभाग को लापरवाही करना भारी पड़ गया। अपर सत्र न्यायाधीश (ईसी एक्ट) राम मणि पाठक की अदालत ने सबूत के अभाव में आरोपी रमन चंद्र को बरी कर दिया।
कोतवाली कर्वी के गांव बघौड़ा निवासी रमन चंद्र पर आरोप था कि 3.26 लाख रुपये बकाया होने पर 16 फरवरी 2011 को उसका कनेक्शन काट दिया गया था, लेकिन 3 अप्रैल 2011 को चेकिंग के दौरान वह कटिया डालकर आटा चक्की चलाते हुए पकड़ा गया। इस मामले में टीम ने पुलिस में प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच कर पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किया।
सुनवाई के दौरान विभाग के तीन गवाह जेई राजेश कुमार, प्रवर्तन दल प्रभारी बलवान सिंह और विवेचक राजेश्वर सिंह यादव पेश हुए, लेकिन तीनों जिरह में टिक नहीं सके। जेई ने माना कि कनेक्शन काटने का कोई रिकॉर्ड और बकाया का कोई बिल कोर्ट में नहीं लगाया। न तो आटा चक्की सील की, न केबल कोर्ट में पेश की। दूसरे गवाह बलवान सिंह ने कहा कि उसने कटिया डालते हुए नहीं देखा और बकाया की जानकारी भी नहीं है। विवेचक ने माना कि एफआईआर के अलावा कोई दस्तावेजी सबूत नहीं जुटाया। कोर्ट ने कहा कि बिना दस्तावेज, बिना बरामदगी के सिर्फ मौखिक बयान पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। यह विद्युत अधिनियम की धारा 135(3) का खुला उल्लंघन है। संदेह का लाभ देते हुए आरोपी रमन चंद्र को दोषमुक्त किया जाता है।
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कोतवाली कर्वी के गांव बघौड़ा निवासी रमन चंद्र पर आरोप था कि 3.26 लाख रुपये बकाया होने पर 16 फरवरी 2011 को उसका कनेक्शन काट दिया गया था, लेकिन 3 अप्रैल 2011 को चेकिंग के दौरान वह कटिया डालकर आटा चक्की चलाते हुए पकड़ा गया। इस मामले में टीम ने पुलिस में प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच कर पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किया।
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सुनवाई के दौरान विभाग के तीन गवाह जेई राजेश कुमार, प्रवर्तन दल प्रभारी बलवान सिंह और विवेचक राजेश्वर सिंह यादव पेश हुए, लेकिन तीनों जिरह में टिक नहीं सके। जेई ने माना कि कनेक्शन काटने का कोई रिकॉर्ड और बकाया का कोई बिल कोर्ट में नहीं लगाया। न तो आटा चक्की सील की, न केबल कोर्ट में पेश की। दूसरे गवाह बलवान सिंह ने कहा कि उसने कटिया डालते हुए नहीं देखा और बकाया की जानकारी भी नहीं है। विवेचक ने माना कि एफआईआर के अलावा कोई दस्तावेजी सबूत नहीं जुटाया। कोर्ट ने कहा कि बिना दस्तावेज, बिना बरामदगी के सिर्फ मौखिक बयान पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। यह विद्युत अधिनियम की धारा 135(3) का खुला उल्लंघन है। संदेह का लाभ देते हुए आरोपी रमन चंद्र को दोषमुक्त किया जाता है।
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