{"_id":"699ded2f7a0de414b70d8fae","slug":"couple-convicted-of-exploitation-cleaning-the-barracks-banda-news-c-212-1-sknp1006-141784-2026-02-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Banda News: शोषण के दोषी दंपती कर रहे बैरक की सफाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Banda News: शोषण के दोषी दंपती कर रहे बैरक की सफाई
Tue, 24 Feb 2026 11:55 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 24 Feb 2026 11:55 PM IST
विज्ञापन
फोटो - 18 मंडल कारागार। संवाद
बांदा। नाबालिग बच्चों के साथ यौन शोषण के दोषी निलंबित जेई रामभवन व उसकी पत्नी दुर्गावती जेल के अंदर निर्धारित वर्दी में रहेंगे। दोनों को बैरक की सफाई में लगाया गया है। रामभवन सफेद रंग का कुर्ता - पायजामा पहनेगा उसकी पत्नी हल्की नीली साड़ी में नजर आएगी। इसके अलावा रामभवन को कैदी नंबर 40 और दुर्गावती कैदी नंबर 41 से पहचानी जाएगी। रामभवन को बैरक नंबर तीन बी में रखा गया है, जबकि उसकी पत्नी दुर्गावती महिला बैरक नंबर 13 पर रखा गया है। दोनों पर निगरानी भी लगाई गई है।
जेल सूत्रों के मुताबिक यौन शोषण के दोषी जेई रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती बैरक सफाई का काम कर रहीं हैं। हालांकि बताया जा रहा है कि यह काम उन्होंने अपनी स्वेच्छा से लिया हुआ है। बताते हैं कि सजा सुनाए जाने से पहले जेई जेल में वाल पेंटिंग भी किया करता था लेकिन उसने कुछ दिनों से यह काम छोड़ रखा है। वहीं, अभी जेई की ओर से पढ़ने के लिए अखबार नहीं मांगा गया है।
जेलर आलोक कुमार ने बताया कि जेल नियमावली के मुताबिक अभी जेई पर छह और मामले विचाराधीन हैं। इसलिए उसे सेंट्रल जेल नैनी में शिफ्ट नहीं किया गया है। इसी तरह से उसकी पत्नी दुर्गावती को लखनऊ नारी निकेतन नहीं भेजा गया है। दोनों को निर्धारित वर्दी दी गई है। चूंकि मृत्युदंड की सजा दी गई है इसलिए उन्होंने अपनी स्वेच्छा से बैरक सफाई का काम लिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जेल सूत्रों के मुताबिक यौन शोषण के दोषी जेई रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती बैरक सफाई का काम कर रहीं हैं। हालांकि बताया जा रहा है कि यह काम उन्होंने अपनी स्वेच्छा से लिया हुआ है। बताते हैं कि सजा सुनाए जाने से पहले जेई जेल में वाल पेंटिंग भी किया करता था लेकिन उसने कुछ दिनों से यह काम छोड़ रखा है। वहीं, अभी जेई की ओर से पढ़ने के लिए अखबार नहीं मांगा गया है।
विज्ञापन
जेलर आलोक कुमार ने बताया कि जेल नियमावली के मुताबिक अभी जेई पर छह और मामले विचाराधीन हैं। इसलिए उसे सेंट्रल जेल नैनी में शिफ्ट नहीं किया गया है। इसी तरह से उसकी पत्नी दुर्गावती को लखनऊ नारी निकेतन नहीं भेजा गया है। दोनों को निर्धारित वर्दी दी गई है। चूंकि मृत्युदंड की सजा दी गई है इसलिए उन्होंने अपनी स्वेच्छा से बैरक सफाई का काम लिया है।
विज्ञापन