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बुंदेलखंड का शजर नीदरलैंड में चमका
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नीदरलैंड के एम्सटर्डन में शजर स्टाल लगाए बांदा के द्वारिका प्रसाद सोनी।
- फोटो : BANDA
बांदा। बुंदेलखंड की धरती पर पाया जाने वाला मशहूर शजर पत्थर अबकी नीदरलैंड में चमका। यहां आयोजित इंडियन हैंडीक्राफ्ट मेले में इसकी धूम रही। पत्थर को विभिन्न आकर्षक स्वरूपों में सजाकर मेले में स्टॉल सजाने का यह सुनहरा मौका बांदा के शजर हस्तशिल्पी द्वारिका प्रसाद सोनी को हासिल हुआ।
भारत सरकार के वस्त्रत्त् मंत्रालय ने 15 से 18 जून तक नीदरलैंड की राजधानी एम्सटर्डम में चार दिवसीय वार्षिक मेले का आयोजन किया था। इसमें शजर पत्थर से तैयार की गईं विभिन्न हस्तनिर्मित वस्तुओं के प्रदर्शन और स्टॉल के लिए द्वारिका सोनी को बुलाया गया था। इस मेले में भागीदारी के लिए बांदा के डीएम हीरालाल ने संस्तुति भेजी थी।
हस्तशिल्पी द्वारिका ने अपने स्टॉल में शजर पत्थर से निर्मित पैंडलिस्ट, शोपीस, हार, अंगूठी, ज्वैलरी, पेपरवेट और ताजमहल को सजाया। यूं तो मेले में दुनिया भर की वस्तुओं के स्टाल लगे थे, लेकिन विदेशियों को शजर पत्थर के स्टॉल ने खास आकर्षित किया। नीदरलैंड में भारत के राजदूत रेणूराज मोनी और भारत की सेहर कंपनी (नई दिल्ली) के डायरेक्टर संजीव भार्गव ने भी पूरी दिलचस्पी के साथ शजर निर्मित वस्तुओं का अवलोकन किया और सराहा। मेले के समापन पर राजदूत और कंपनी डायरेक्टर ने द्वारिका सोनी को सम्मानित भी किया।
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लगभग 52 वर्षीय द्वारिका सोनी करीब 32 साल से शजर हस्तशिल्प से जुड़े हैं। वे कई बार सम्मानित हुए हैं। अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय अवार्ड पाए हैं। शजर पत्थर उद्योग को यूपी सरकार ने एक जिला, एक उत्पाद योजना में चयनित किया है। डीएम हीरालाल भी शजर उद्योग के प्रति उत्सुक और गंभीर हैं। उन्होंने उद्योग विभाग के उपायुक्त को शजर उद्यमियों को हर संभव सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
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भारत सरकार के वस्त्रत्त् मंत्रालय ने 15 से 18 जून तक नीदरलैंड की राजधानी एम्सटर्डम में चार दिवसीय वार्षिक मेले का आयोजन किया था। इसमें शजर पत्थर से तैयार की गईं विभिन्न हस्तनिर्मित वस्तुओं के प्रदर्शन और स्टॉल के लिए द्वारिका सोनी को बुलाया गया था। इस मेले में भागीदारी के लिए बांदा के डीएम हीरालाल ने संस्तुति भेजी थी।
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हस्तशिल्पी द्वारिका ने अपने स्टॉल में शजर पत्थर से निर्मित पैंडलिस्ट, शोपीस, हार, अंगूठी, ज्वैलरी, पेपरवेट और ताजमहल को सजाया। यूं तो मेले में दुनिया भर की वस्तुओं के स्टाल लगे थे, लेकिन विदेशियों को शजर पत्थर के स्टॉल ने खास आकर्षित किया। नीदरलैंड में भारत के राजदूत रेणूराज मोनी और भारत की सेहर कंपनी (नई दिल्ली) के डायरेक्टर संजीव भार्गव ने भी पूरी दिलचस्पी के साथ शजर निर्मित वस्तुओं का अवलोकन किया और सराहा। मेले के समापन पर राजदूत और कंपनी डायरेक्टर ने द्वारिका सोनी को सम्मानित भी किया।
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लगभग 52 वर्षीय द्वारिका सोनी करीब 32 साल से शजर हस्तशिल्प से जुड़े हैं। वे कई बार सम्मानित हुए हैं। अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय अवार्ड पाए हैं। शजर पत्थर उद्योग को यूपी सरकार ने एक जिला, एक उत्पाद योजना में चयनित किया है। डीएम हीरालाल भी शजर उद्योग के प्रति उत्सुक और गंभीर हैं। उन्होंने उद्योग विभाग के उपायुक्त को शजर उद्यमियों को हर संभव सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।