{"_id":"5d0fc0428ebc3e79f315d1df","slug":"bundelkhand-issues-in-the-first-session-of-the-new-lok-sabha-banda-news-knp497579811","type":"story","status":"publish","title_hn":"नई लोकसभा के पहले सत्र में गूंजे बुंदेलखंड के मुद्दे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नई लोकसभा के पहले सत्र में गूंजे बुंदेलखंड के मुद्दे
विज्ञापन
बांदा। 17वीं लोकसभा के पहले संयुक्त अधिवेशन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित किए जाने के बीच राज्यसभा में बुंदेलखंड के कई मुद्दे गूंजे। सपा सदस्यों (राज्यसभा) ने प्रस्ताव पेश करते हुए इस पर खेद जताया कि अभिभाषण में ये मुद्दे शामिल नहीं किए गए।
हाल ही में हुए आम चुनाव के बाद नई लोकसभा का यह पहला सत्र है। परंपरा के मुताबिक राष्ट्रपति ने इसकी शुरुआत में दोनों सदनों (लोकसभा व राज्यसभा) के संयुक्त अधिवेशन में अपना अभिभाषण पढ़ा। अब इस पर सदस्यों द्वारा संशोधन प्रस्ताव लाए जा रहे हैं।
इसी श्रृंखला में शनिवार को बुंदेलखंड के राज्यसभा सदस्य विशंभर प्रसाद निषाद और सपा के ही सुखराम सिंह यादव ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपने संशोधन प्रस्ताव पेश किए। इनमें लगभग डेढ़ दर्जन प्रस्ताव बुंदेलखंड से संबंधित हैं। अभिभाषण में इन मुद्दों को शामिल न किए जाने पर खेद जताते हुए इन्हें प्रस्ताव में जोड़ने की मांग की।
विज्ञापन
सपा सांसदों ने खेद जताया कि अभिभाषण में बुंदेलखंड में अन्ना प्रथा समाप्त करने के लिए कोई कार्य योजना शामिल नहीं है। यहां के गरीबों और मजदूरों का सर्वे कराकर नि:शुल्क आवास मुहैया कराने का भी उल्लेख नहीं है। बुंदेलखंड से पलायन रोकने के लिए लघु और कुटीर उद्योगों की स्थापना, कई साल से पड़ रहे सूखे से इस क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित कर किसानों की आर्थिक मदद और सूखे से होने वाली समस्याओं के समाधान तथा राशन, आवास, पेयजल, खेती कार्य के मुद्दे शामिल न करने पर खेद जताया।
राज्यसभा में की गईं बुंदेलखंड की प्रमुख मांगें
हमीरपुर में यमुना नदी पुल के पास और रागौल में बड़ौली नाला में तटबंध, बांदा में कनवारा, छावनी डेरा, चटगन, पथरी, छेहरांव, मरौली, केवटरा, अछरौड़, खप्टिहा कलां, पैलानी, सिंधन कलां, सांड़ी, खैरेई आदि बाढ़ प्रभावित बस्तियों को ऊंचाई पर बसाने। कालिंजर, महोबा और चरखारी को अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक मानचित्र में जोड़ने, चित्रकूटधाम के हवाई अड्डे से उड़ानें शुरू करने, बांदा, चित्रकूट और सतना में केंद्रीय पुलिस बल ट्रेनिंग सेंटर खोलने, बेतवा एक्सप्रेस, गरीब रथ एक्सप्रेस को प्रतिदिन चलाने और इसका ठहराव रागौल में किए जाने, रीवांचल एक्सप्रेस को दिल्ली, कानपुर से बांदा होते हुए रीवां तक चलाने, चित्रकूट इंटरसिटी को लखनऊ तक बढ़ाने, तुलसी एक्सप्रेस को प्रतिदिन करने, बांदा में औगासी में यमुना नदी पर तटबंध निर्माण, नेशनल हाईवे (कबरई से बांदा) के बीच मानक के अनुरूप निर्माण न होने की जांच कराने, बुंदेलखंड के सूखा पीड़ित किसानों की कर्जमाफी और खाद, बीज व बिजली मुफ्त दिए जाने, बुंदेलखंड विकास के लिए एक लाख करोड़ की अतिरिक्त सहायता आदि राष्ट्रपति के अभिभाषण में जोड़े जाने की मांग शामिल है।
पहले भी भी संसद में गूंजा है बुंदेलखंड
बांदा। बुंदेलखंड से संबंधित मुद्दे पूर्व में भी संसद के दोनों सदनों में गूंजते रहे हैं। भाजपा के पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्र ने पिछले साल दिसंबर में लोकसभा में प्रस्ताव पेश कर बुंदेलखंड में लघु सीमांत किसानों की जोत सीमा बढ़ाने की मांग की थी। हालांकि यह अभी तक पूरी नहीं हुई। इसके पूर्व उन्होंने पिछले वर्ष बांदा के जिला अस्पताल में सीटी स्कैन और डायलिसिस सुविधा का मुद्दा उठाया था।
दो वर्ष पूर्व लोकसभा में मांग की थी कि चित्रकूट में 200 बेड क्षमता वाला बच्चों का अस्पताल बनाया जाए। यह अस्पताल बनकर लगभग तैयार हो गया है। चित्रकूटधाम मंडल में रेलवे के उच्चीकरण, दोहरीकरण और विद्युतीकरण आदि मुद्दे भी उठाए थे। इसके अलावा राज्यसभा सांसद विशंभर प्रसाद निषाद भी कई बार बुंदेलखंड से जुड़े मुद्दे राज्यसभा में पेश कर चुके हैं। दोनों सदनों में उठाए गए बुंदेलखंड के मुद्दों में कुछ स्वीकृत और सफल भी हुए हैं।
विज्ञापन
हाल ही में हुए आम चुनाव के बाद नई लोकसभा का यह पहला सत्र है। परंपरा के मुताबिक राष्ट्रपति ने इसकी शुरुआत में दोनों सदनों (लोकसभा व राज्यसभा) के संयुक्त अधिवेशन में अपना अभिभाषण पढ़ा। अब इस पर सदस्यों द्वारा संशोधन प्रस्ताव लाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
इसी श्रृंखला में शनिवार को बुंदेलखंड के राज्यसभा सदस्य विशंभर प्रसाद निषाद और सपा के ही सुखराम सिंह यादव ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपने संशोधन प्रस्ताव पेश किए। इनमें लगभग डेढ़ दर्जन प्रस्ताव बुंदेलखंड से संबंधित हैं। अभिभाषण में इन मुद्दों को शामिल न किए जाने पर खेद जताते हुए इन्हें प्रस्ताव में जोड़ने की मांग की।
विज्ञापन
सपा सांसदों ने खेद जताया कि अभिभाषण में बुंदेलखंड में अन्ना प्रथा समाप्त करने के लिए कोई कार्य योजना शामिल नहीं है। यहां के गरीबों और मजदूरों का सर्वे कराकर नि:शुल्क आवास मुहैया कराने का भी उल्लेख नहीं है। बुंदेलखंड से पलायन रोकने के लिए लघु और कुटीर उद्योगों की स्थापना, कई साल से पड़ रहे सूखे से इस क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित कर किसानों की आर्थिक मदद और सूखे से होने वाली समस्याओं के समाधान तथा राशन, आवास, पेयजल, खेती कार्य के मुद्दे शामिल न करने पर खेद जताया।
राज्यसभा में की गईं बुंदेलखंड की प्रमुख मांगें
हमीरपुर में यमुना नदी पुल के पास और रागौल में बड़ौली नाला में तटबंध, बांदा में कनवारा, छावनी डेरा, चटगन, पथरी, छेहरांव, मरौली, केवटरा, अछरौड़, खप्टिहा कलां, पैलानी, सिंधन कलां, सांड़ी, खैरेई आदि बाढ़ प्रभावित बस्तियों को ऊंचाई पर बसाने। कालिंजर, महोबा और चरखारी को अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक मानचित्र में जोड़ने, चित्रकूटधाम के हवाई अड्डे से उड़ानें शुरू करने, बांदा, चित्रकूट और सतना में केंद्रीय पुलिस बल ट्रेनिंग सेंटर खोलने, बेतवा एक्सप्रेस, गरीब रथ एक्सप्रेस को प्रतिदिन चलाने और इसका ठहराव रागौल में किए जाने, रीवांचल एक्सप्रेस को दिल्ली, कानपुर से बांदा होते हुए रीवां तक चलाने, चित्रकूट इंटरसिटी को लखनऊ तक बढ़ाने, तुलसी एक्सप्रेस को प्रतिदिन करने, बांदा में औगासी में यमुना नदी पर तटबंध निर्माण, नेशनल हाईवे (कबरई से बांदा) के बीच मानक के अनुरूप निर्माण न होने की जांच कराने, बुंदेलखंड के सूखा पीड़ित किसानों की कर्जमाफी और खाद, बीज व बिजली मुफ्त दिए जाने, बुंदेलखंड विकास के लिए एक लाख करोड़ की अतिरिक्त सहायता आदि राष्ट्रपति के अभिभाषण में जोड़े जाने की मांग शामिल है।
पहले भी भी संसद में गूंजा है बुंदेलखंड
बांदा। बुंदेलखंड से संबंधित मुद्दे पूर्व में भी संसद के दोनों सदनों में गूंजते रहे हैं। भाजपा के पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्र ने पिछले साल दिसंबर में लोकसभा में प्रस्ताव पेश कर बुंदेलखंड में लघु सीमांत किसानों की जोत सीमा बढ़ाने की मांग की थी। हालांकि यह अभी तक पूरी नहीं हुई। इसके पूर्व उन्होंने पिछले वर्ष बांदा के जिला अस्पताल में सीटी स्कैन और डायलिसिस सुविधा का मुद्दा उठाया था।
दो वर्ष पूर्व लोकसभा में मांग की थी कि चित्रकूट में 200 बेड क्षमता वाला बच्चों का अस्पताल बनाया जाए। यह अस्पताल बनकर लगभग तैयार हो गया है। चित्रकूटधाम मंडल में रेलवे के उच्चीकरण, दोहरीकरण और विद्युतीकरण आदि मुद्दे भी उठाए थे। इसके अलावा राज्यसभा सांसद विशंभर प्रसाद निषाद भी कई बार बुंदेलखंड से जुड़े मुद्दे राज्यसभा में पेश कर चुके हैं। दोनों सदनों में उठाए गए बुंदेलखंड के मुद्दों में कुछ स्वीकृत और सफल भी हुए हैं।