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बांदा: पन्ना टाइगर रिजर्व में ड्रोन से की जा रही बाघों की निगरानी, बारिश में सुरक्षित जोन की तलाश में बाघ
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बांदा। पन्ना टाइगर रिजर्व में बारिश के दौरान बाघ अपने लिए सुरक्षित क्षेत्र की तलाश में रहते हैं। आधा दर्जन से भी अधिक युवा बाघ अपना एरिया छोड़नेे की फिराक में हैं। ऐसे में इन बाघों और उनके नए आवासों की ड्रोन व अन्य सुरक्षा माध्यमों से निगरानी की जा रही है।
पार्क प्रबंधन की मानें तो पलायन करने वाले बाघ कोर और बफर जोन के क्षेत्रों में जा सकते हैं। इन क्षेत्रों में केन नदी से पश्चिम विशेषकर किशनगढ़ रेंज का हो सकता है। इसके करीब 90 से 100 वर्ग किमी क्षेत्र में बाघों की अच्छी संख्या है, जबकि शेष 160 वर्ग किमी में बाघों की मौजूदगी कम होने से पलायन कर यहां पहुंच सकते हैं। वहीं, एनएच 39 के उत्तर का करीब 200 वर्ग किमी का इलाका है। यह गंगऊ अभयारण्य के साथ पन्ना बफर का क्षेत्र है, जो पन्ना टाइगर रिजर्व की बाघिनों का ब्रीडिंग सेंटर भी बन सकता है।
60 से अधिक बाघ मौजूद
पन्ना टाइगर रिजर्व में करीब 60 वयस्क बाघ और 20 से अधिक एक साल से कम उम्र के शावक होने का अनुमान है। यहां 550 वर्ग किमी कोर सहित करीब 800 वर्ग मीटर क्षेत्र में बाघों का कब्जा है। यहां बाघों का औसत घनत्व प्रति 100 वर्ग किमी में सात बाघ है।
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पी-142 बाघिन ने दो शावकों को दिया जन्म
पन्ना टाइगर रिजर्व से एक बार फिर खुशखबरी है। यहां की युवा बाघिन पी-142 ने दो शावकों को जन्म दिया है। बाघिन को पन्ना कोर के बीबीसी बीट में दो शावकों के साथ कैमरा ट्रैप में देखा गया है। बीते दिनों जब बाघिन को कैमरा ट्रैप में देखा गया तो उसके शावक काफी बड़े हो गए थे। दोनों काफी स्वस्थ हैं। फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने बताया, बाघिन पी-142 को बीबीसी बीते दिनों कैमरा ट्रैप में दो शावकों के साथ देखा गया है। उम्र करीब चार माह है।
शिकार की उपलब्धता के आधार बनाते घर
वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट एसके सूरी बताते हैं कि हर साल मानसून सीजन में युवा बाघ अपने लिए सुरक्षित एरिया की खोज में निकलते हैं। वे चारों ओर पानी और शिकार की उपलब्धता के आधार पर अपना घर बनाते हैं।
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पार्क प्रबंधन की मानें तो पलायन करने वाले बाघ कोर और बफर जोन के क्षेत्रों में जा सकते हैं। इन क्षेत्रों में केन नदी से पश्चिम विशेषकर किशनगढ़ रेंज का हो सकता है। इसके करीब 90 से 100 वर्ग किमी क्षेत्र में बाघों की अच्छी संख्या है, जबकि शेष 160 वर्ग किमी में बाघों की मौजूदगी कम होने से पलायन कर यहां पहुंच सकते हैं। वहीं, एनएच 39 के उत्तर का करीब 200 वर्ग किमी का इलाका है। यह गंगऊ अभयारण्य के साथ पन्ना बफर का क्षेत्र है, जो पन्ना टाइगर रिजर्व की बाघिनों का ब्रीडिंग सेंटर भी बन सकता है।
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60 से अधिक बाघ मौजूद
पन्ना टाइगर रिजर्व में करीब 60 वयस्क बाघ और 20 से अधिक एक साल से कम उम्र के शावक होने का अनुमान है। यहां 550 वर्ग किमी कोर सहित करीब 800 वर्ग मीटर क्षेत्र में बाघों का कब्जा है। यहां बाघों का औसत घनत्व प्रति 100 वर्ग किमी में सात बाघ है।
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पी-142 बाघिन ने दो शावकों को दिया जन्म
पन्ना टाइगर रिजर्व से एक बार फिर खुशखबरी है। यहां की युवा बाघिन पी-142 ने दो शावकों को जन्म दिया है। बाघिन को पन्ना कोर के बीबीसी बीट में दो शावकों के साथ कैमरा ट्रैप में देखा गया है। बीते दिनों जब बाघिन को कैमरा ट्रैप में देखा गया तो उसके शावक काफी बड़े हो गए थे। दोनों काफी स्वस्थ हैं। फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने बताया, बाघिन पी-142 को बीबीसी बीते दिनों कैमरा ट्रैप में दो शावकों के साथ देखा गया है। उम्र करीब चार माह है।
शिकार की उपलब्धता के आधार बनाते घर
वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट एसके सूरी बताते हैं कि हर साल मानसून सीजन में युवा बाघ अपने लिए सुरक्षित एरिया की खोज में निकलते हैं। वे चारों ओर पानी और शिकार की उपलब्धता के आधार पर अपना घर बनाते हैं।