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Banda News: यमुना नदी पुल से भारी वाहनों के गुजरने पर रोक

Sat, 25 Feb 2023 11:41 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 25 Feb 2023 11:41 PM IST
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Ban on passing of heavy vehicles from Yamuna river bridge
तिंदवारी। बांदा-टांडा राष्ट्रीय राजमार्ग पर यमुना नदी पर बना पुल धंसने से भारी वाहनों का आवागमन रोक दिया गया है। इन्हें लगभग 8-10 किलोमीटर अतिरिक्त चक्कर लगाकर फतेहपुर की ओर जाना पड़ रहा है। हालांकि रोडवेज बसें और छोटे वाहन पुल से गुजर रहे हैं। खास बात यह है कि 24 घंटे से ज्यादा समय गुजर गया, लेकिन अभी तक जिम्मेदार अफसर पुल का निरीक्षण करने नहीं पहुंचे।
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बेंदाघाट स्थित यमुना नदी में बने पुल के छठे पिलर के पास पुल का बड़ा हिस्सा धंस गया। इसके बावजूद दिन-रात ओवरलोड ट्रकों समेत वाहन बेधड़क गुजरते रहे। शुक्रवार को पुल और धंस गया, नतीजतन तत्काल प्रभाव से पुल से भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी गई। पुल के धंसने वाले स्थान के आसपास ड्रम रखवा दिए गए। हालांकि रोडवेज बस और छोटे वाहनों की आवाजाही रही।
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उधर, भारी वाहनों को बांदा से फतेहपुर, रायबरेली, प्रयागराज जाने के लिए तिंदवारी से पपरेंदा व बंदवा गांव होकर गुजारा गया। इस रूट डायवर्जन से करीब 10 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। 24 घंटे से ज्यादा समय बीत गया, लेकिन नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया शाखा व बांदा सेतु निर्माण की टीम यहां नहीं पहुंची।
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हालांकि मरम्मत कार्य शुरू होने का दावा किया जा रहा है। इंस्पेक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि पुल की मरम्मत होने तक भारी वाहनों का आवागमन रोका गया है। जरूरत पड़ने पर छोटे वाहनों का आवागमन भी रोका जा सकता है।

कई बार पुल हो चुका क्षतिग्रस्त
बेंदाघाट पर यमुना नदी पर लगभग 43 वर्ष पूर्व पुल बना था। 1980 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा इसका लोकार्पण किया गया था। 24 पिलरों पर टिका पुल कई बार क्षतिग्रस्त हो चुका है। वर्ष 2018 में इसका बुश खिसक गया था। करीब दो दिन यातायात बाधित रहा। सितंबर 2021 में पुल का एक हिस्सा धंसने से तीन तक आवागमन ठप रहा। सेतु निगम द्वारा मरम्मत के बाद आवागमन बहाल हो सका। इसी तरह अक्तूबर 2022 में भी पुल में दो स्थानों पर बड़े गड्ढे हो गए थे। स्लैब का निचला हिस्सा ढह गया था। बाद में मरम्मत के बाद आवागमन शुरू हो गया था।


डेढ़ हजार से ज्यादा गुजरते हैं वाहन
बेंदा गांव के बुजुर्ग शिवभूषण सिंह, अयोध्या सिंह, जयकरन निषाद आदि ने बताया कि जिस समय पुल बना था, उस समय दिनभर में 20-30 ट्रक ही निकलते थे। 24 घंटे में मुश्किल से 100 छोटे-बड़े वाहन गुजरते थे। उस वक्त के हिसाब से बने इस पुल की क्षमता अधिक नहीं थी। अब 24 घंटे में डेढ़ हजार से ज्यादा छोटे-बड़े वाहन निकलते हैं। इनमें ज्यादातर बालू और गिट्टी व डस्ट भरे ट्रक होते हैं। इनकी वजह से पुल की हालत जर्जर हो गई।
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