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बांदा पालिकाध्यक्ष के अधिकार सीज
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बांदा। साढ़े 38 माह पूर्व (12 दिसंबर 2017) को मंडल मुख्यालय बांदा नगर पालिकाध्यक्ष पद पर आसीन हुए सपा नेता मोहन साहू के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार प्रदेश सरकार ने सीज कर दिए हैं। राज्यपाल के हवाले से जारी 27 पृष्ठीय शासनादेश में अध्यक्ष पर 11 आरोप दर्ज किए गए हैं।
प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (नगर विकास) डॉ. रजनीश दुबे द्वारा बुधवार (25 अगस्त) को अध्यक्ष साहू को जारी आदेश में उन पर लगाए गए तमाम आरोपों और साहू द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण तथा जांच निष्कर्ष आदि का विस्तृत ब्योरा दिया गया है।
कहा गया कि विधायक प्रकाश द्विवेदी और सभासदों द्वारा अक्तूूबर 2019 में की गई शिकायतों पर डीएम ने जांच समिति (एडीएम, उप मुख्य कोषाधिकारी व एक्सईएन पीडब्ल्यूडी) से जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर अध्यक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी हुई। अध्यक्ष ने अपना स्पष्टीकरण पेश किए।
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सभी आरोपों/बिंदुओं का विस्तृत हवाला देते हुए शासनादेश के अंत में कहा गया कि सिद्ध पाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।
राज्यपाल के आदेशों का हवाला देकर अपर मुख्य सचिव ने उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 की विभिन्न धाराओं के तहत कहा कि जब तक कारण बताओ नोटिस के आरोपों से विमुक्त न कर दिया जाए तब तक अध्यक्ष के वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों, कार्यों और कर्त्तव्यों के निर्वहन पर रोक लगाई जाती है।
इस दौरान जिला मजिस्ट्रेट द्वारा नामित कोई अधिकारी जो डिप्टी कलक्टर से कम न हो वह अध्यक्ष के कार्यों और शक्तियों का निर्वहन करेगा।
अध्यक्ष पर लगे ये प्रमुख आरोप---
बिंदु-1 : आउट सोर्सिंग के टेंडर में गलत अपलोडिंग और निविदा निरस्तीकरण आदि का प्रकरण। बिंदु-2 : एलईडी लाइट के टेंडरों को 8 बार मनमाने तरीके से निरस्त करना। बिंदु-3 : अध्यक्ष द्वारा अपने रिश्तेदारों के नाम पर निर्माण, कुटेशन से लगभग 20 लाख का भुगतान अपने सगे संबंधियों की नियुक्ति।
बिंदु-4 : बिना नोटिस पैसा लेकर मकानों और दुकानों का नामांतरण। बिंदू-5 : नाला सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये का गबन। बिंदु-6 : आउट सोर्सिंग कर्मियों की मनमाफिक ड्यूटी। बिंदु-7 : सभासद अनवर अली को एक दिन के लिए परिषद का अध्यक्ष मनोनीत किया जाना।
बिंदु-8 : डीएम कालोनी मुख्य मार्ग में निकाय/राज्य वित्त आयोग के पैसे से निजी भूमि में इंटरलॉकिंग। बिंदु-9 : काली सूची में शामिल फंड को कार्य/ठेके देना। बिंदु-10 : आउट सोर्सिंग कर्मियों को निर्धारित 295 रुपये के स्थान पर 250 रुपये मानदेय देना। बिंदु-11 : अधिकार न होते हुए सफाई निरीक्षकों का एक दिन का वेतन काटना, निलंबन, पदोन्नति, जांच आदेश आदि देना।
सत्ता पक्ष के दबाव में अनुचित कदम
उन पर लगाए गए आरोप गलत हैं। सत्ता पक्ष के दबाव में गलत ढंग से उनके अधिकार सीज किए गए हैं। वह हर आरोप का स्पष्टीकरण दे चुकें हैं। नया टेंडर न होेने से आउट सोर्सिंग कर्मियों को पूर्व निर्धारित पैसा दिया जाता रहा। यह भ्रष्टाचार की श्रेणी में नहीं आता।
- मोहन साहू, नगर पालिकाध्यक्ष
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प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (नगर विकास) डॉ. रजनीश दुबे द्वारा बुधवार (25 अगस्त) को अध्यक्ष साहू को जारी आदेश में उन पर लगाए गए तमाम आरोपों और साहू द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण तथा जांच निष्कर्ष आदि का विस्तृत ब्योरा दिया गया है।
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कहा गया कि विधायक प्रकाश द्विवेदी और सभासदों द्वारा अक्तूूबर 2019 में की गई शिकायतों पर डीएम ने जांच समिति (एडीएम, उप मुख्य कोषाधिकारी व एक्सईएन पीडब्ल्यूडी) से जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर अध्यक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी हुई। अध्यक्ष ने अपना स्पष्टीकरण पेश किए।
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सभी आरोपों/बिंदुओं का विस्तृत हवाला देते हुए शासनादेश के अंत में कहा गया कि सिद्ध पाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।
राज्यपाल के आदेशों का हवाला देकर अपर मुख्य सचिव ने उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 की विभिन्न धाराओं के तहत कहा कि जब तक कारण बताओ नोटिस के आरोपों से विमुक्त न कर दिया जाए तब तक अध्यक्ष के वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों, कार्यों और कर्त्तव्यों के निर्वहन पर रोक लगाई जाती है।
इस दौरान जिला मजिस्ट्रेट द्वारा नामित कोई अधिकारी जो डिप्टी कलक्टर से कम न हो वह अध्यक्ष के कार्यों और शक्तियों का निर्वहन करेगा।
अध्यक्ष पर लगे ये प्रमुख आरोप---
बिंदु-1 : आउट सोर्सिंग के टेंडर में गलत अपलोडिंग और निविदा निरस्तीकरण आदि का प्रकरण। बिंदु-2 : एलईडी लाइट के टेंडरों को 8 बार मनमाने तरीके से निरस्त करना। बिंदु-3 : अध्यक्ष द्वारा अपने रिश्तेदारों के नाम पर निर्माण, कुटेशन से लगभग 20 लाख का भुगतान अपने सगे संबंधियों की नियुक्ति।
बिंदु-4 : बिना नोटिस पैसा लेकर मकानों और दुकानों का नामांतरण। बिंदू-5 : नाला सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये का गबन। बिंदु-6 : आउट सोर्सिंग कर्मियों की मनमाफिक ड्यूटी। बिंदु-7 : सभासद अनवर अली को एक दिन के लिए परिषद का अध्यक्ष मनोनीत किया जाना।
बिंदु-8 : डीएम कालोनी मुख्य मार्ग में निकाय/राज्य वित्त आयोग के पैसे से निजी भूमि में इंटरलॉकिंग। बिंदु-9 : काली सूची में शामिल फंड को कार्य/ठेके देना। बिंदु-10 : आउट सोर्सिंग कर्मियों को निर्धारित 295 रुपये के स्थान पर 250 रुपये मानदेय देना। बिंदु-11 : अधिकार न होते हुए सफाई निरीक्षकों का एक दिन का वेतन काटना, निलंबन, पदोन्नति, जांच आदेश आदि देना।
सत्ता पक्ष के दबाव में अनुचित कदम
उन पर लगाए गए आरोप गलत हैं। सत्ता पक्ष के दबाव में गलत ढंग से उनके अधिकार सीज किए गए हैं। वह हर आरोप का स्पष्टीकरण दे चुकें हैं। नया टेंडर न होेने से आउट सोर्सिंग कर्मियों को पूर्व निर्धारित पैसा दिया जाता रहा। यह भ्रष्टाचार की श्रेणी में नहीं आता।
- मोहन साहू, नगर पालिकाध्यक्ष