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आंगनबाड़ी केंद्रों में ठंडे पड़े हैं हाट कुक्ड के चूल्हे
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Fri, 02 Jan 2015 12:28 AM IST
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बाल विकास परियोजना के तहत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में हाट कुक्ड के चूल्हे ठंडे पडे़ हैं। धन के अभाव में बच्चों को सिर्फ पंजीरी (पुष्टाहार) देकर काम चलाया जा रहा है।
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बच्चों और धात्री महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए पुष्टाहार उपलब्ध कराया जाता है। इसमें 0 से 6 माह और 3 से 6 वर्ष और गर्भवती व धात्री महिलाओं के लिए अलग-अलग मानक निर्धारित है।
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नगरीय क्षेत्रों में 1705 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें सिर्फ आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के मानदेय पर हर माह लगभग 76 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। इनके साथ विभागीय अधिकारियों, मुख्य सेविकाओं व अन्य कर्मियों को मिलाकर लगभग एक करोड़ रुपये मासिक खर्च आता है। इसके बावजूद बजट के अभाव में हाट कुक्ड योजना दम तोड़ रही है।
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वित्तीय वर्ष के नौ माह बीतने के बाद शासन ने सिर्फ जुलाई, अगस्त और नवंबर माह में हाट कुक्ड के लिए बजट उपलब्ध कराया। बाकी छह माह चूल्हे नहीं जले। भोजन पकाने की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी सहायिकाओं की है।
इस श्रेणी में लाभान्वित बच्चों की संख्या 76,234 है। इसमें तिंदवारी ब्लाक में 7026, कमासिन में 8596, नरैनी में 10,835, बिसंडा में 7811, बड़ोखर खुर्द में 8337, बबेरू में 9485, महुआ में 11,332, जसपुरा ब्लाक में 4295 और शहरी क्षेत्र में 8527 बच्चे शामिल हैं। इन पर हर माह 75.87 लाख रुपये खर्च आता है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी का कहना है कि बजट मिलने पर ही ताजा भोजन परोसा जाता है।