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धान की रोपाई में जुटे किसान
Banda
Updated Fri, 27 Jul 2012 12:00 PM IST
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बांदा। दो दिन लगातार हुई झमाझम बरसात के बाद बृहस्पतिवार को विराम लग गया। सुबह से धूप व बीच-बीच होने वाली बदली से उमस में फिर इजाफा हो गया। बारिश से खेतों में पानी नजर आने लगा है। किसान धान की रोपाई में जुट गए हैं। हालांकि किसानों का कहना है कि मौसम ऐसा ही फिर रूखा हो गया तो खेती पर संकट फिर पैदा हो सकता है।
सूखे की आशंका से चिंतित किसानों को मंगलवार व ब बुधवार दो दिन हुई झमाझम बारिश ने काफी राहत दी। दो दिनों तक रुक-रुक कर हुई बरसात से किसानों के खेत लबालब हो गए। करीब 20 दिन पूर्व धान की नर्सरी डाल चुके किसानों को इंद्रदेव ने खासी राहत दी है। अब वे खेतों में पानी टिकने से धान की रोपाई करने की तैयारी में जुट गए हैं। पीली पड़ रही बेहन में हरियाली दिखने लगी। पानी के अभाव में जो किसान नर्सरी नहीं डाल सके थे, वे नर्सरी डालने की तैयारियां कर रहे हैं।धान की नर्सरी के अलावा दलहनी व तिलहनी फसलों की खेती करने वाले किसान भी बारिश के बाद सक्रिय हो गए हैं। कई किसानों की पहले से बोई गई फसल में पानी के अभाव में अंकुर तक नहीं फूटे थे। अब बारिश ने देर से ही सही ऐसे किसानों को राहत दी है। हालांकि बृहस्पतिवार को मौसम ने फिर से करवट बदल लिया। दिन में चटख धूप व बीच-बीच होने वाली बदली से उमस में इजाफा हो गया। किसानों की मानें तो यह धूप यदि ऐसे ही एक-दो दिन और रही तो धन व दलहनी फसल पर संकट आ सकता है। दलहनी व तिलहनी फसलों को बोने के लिए तैयारी की जा रही है। नेवादा के किसान भरत बाबू द्विवेदी कहते हैं कि उन खेतों में फिर से दलहनी व तिलहनी फसलें बोनी पड़ेंगी जिनमें बीजों में अंकुर नहीं फूटे।
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सूखे की आशंका से चिंतित किसानों को मंगलवार व ब बुधवार दो दिन हुई झमाझम बारिश ने काफी राहत दी। दो दिनों तक रुक-रुक कर हुई बरसात से किसानों के खेत लबालब हो गए। करीब 20 दिन पूर्व धान की नर्सरी डाल चुके किसानों को इंद्रदेव ने खासी राहत दी है। अब वे खेतों में पानी टिकने से धान की रोपाई करने की तैयारी में जुट गए हैं। पीली पड़ रही बेहन में हरियाली दिखने लगी। पानी के अभाव में जो किसान नर्सरी नहीं डाल सके थे, वे नर्सरी डालने की तैयारियां कर रहे हैं।धान की नर्सरी के अलावा दलहनी व तिलहनी फसलों की खेती करने वाले किसान भी बारिश के बाद सक्रिय हो गए हैं। कई किसानों की पहले से बोई गई फसल में पानी के अभाव में अंकुर तक नहीं फूटे थे। अब बारिश ने देर से ही सही ऐसे किसानों को राहत दी है। हालांकि बृहस्पतिवार को मौसम ने फिर से करवट बदल लिया। दिन में चटख धूप व बीच-बीच होने वाली बदली से उमस में इजाफा हो गया। किसानों की मानें तो यह धूप यदि ऐसे ही एक-दो दिन और रही तो धन व दलहनी फसल पर संकट आ सकता है। दलहनी व तिलहनी फसलों को बोने के लिए तैयारी की जा रही है। नेवादा के किसान भरत बाबू द्विवेदी कहते हैं कि उन खेतों में फिर से दलहनी व तिलहनी फसलें बोनी पड़ेंगी जिनमें बीजों में अंकुर नहीं फूटे।
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