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ताजिया जुलूसों में उमड़ा हुजूम
Banda
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
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बांदा। मोहर्रम की आठवीं पर शहीदे कर्बला हजरत अब्बास शिद्दत से याद किए गए। मजलिसों में उनकी बहादुरी का बयान हुआ। बच्चों के लिए फुरात नहर में पानी लेने गए अब्बास पर यजीदी फौज ने हमला कर उनके हाथ काट दिए। फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और मश्क को दांत से पकड़ लिया। दुश्मनों ने मश्क में तीर मारकर पानी बहा दिया। हजरते अब्बास यहीं शहीद हो गए। उधर, आधा दर्जन मेंहदी ताजिए निकाले गए। इनमें भारी हुजूम उमड़ा। अकीदतमंदों ने जगह-जगह लंगर लुटाए।
शुक्रवार को सुबह मर्दननाका, गूलरनाका, अलीगंज, खुटला इत्यादि मोहल्लों से आधा दर्जन से ज्यादा मेंहदी ताजिया जुलूस इमामबाड़ों से कोतवाली के लिए कूच किए। हरेक ताजिया में हुजूम शामिल था। दोपहर को सभी मेंहदी ताजिया कोतवाली के सामने आए। यहां देर तक ढोल-ताशों की धुनें गूंजती रहीं। मेला का नजारा रहा। दोपहर बाद मिलाप की रस्म अदा की गई। तीन मेंहदी ताजिए छिपटहरी होते हुए मर्दननाका की ओर रवाना हुए। इनमें सब्जी फरोश और कोदउवा जनाना व दरी वालों के ताजिए शामिल थे। दूसरी तरफ अलीगंज के पीरा व टिर्री के ताजिया जुलूस गूलरनाका अलीगंज की ओर रवाना हुए। मनिहारों का मेंहदी ताजिया खुटला के लिए रवाना हुआ। तीनों ताजिया जुलूसों में भारी भीड़ रही। जगह-जगह लंगर लुटाए गए। निर्धारित रास्तों से गुजरने के बाद तीसरे पहर यह ताजिए अपने-अपने इमामबाड़ों को पहुंच गए। जुलूस का समापन हो गया। उधर, गूलरनाका स्थित बस्सन के इमामबाड़े में आयोजित मजलिस में मुुनव्वर रजा रिजवी (लखनऊ) ने कहा कि इमाम हुसैन की फौज ने हजरत अब्बास सबसे बहादुर थे। यजीदी फौज के सिपाही उन्हें देखकर भागते थे। उनकी शहादत का बयान करते हुए मौलाना ने कहा कि वह बच्चों के लिए पानी लेने फुरात नहर जा रहे थे। उनके साथ में चमड़े का मश्क था। हजारों की संख्या में यजीदी फौज ने उन पर हमला कर दिया। उनके दोनों हाथ काट दिए। आंखों में तीर मार दिए। सर पर भी वार किया। फिर भी अब्बास ने हिम्मत नहीं हारी और मश्क को दांतों से पकड़कर आगे बढ़ते रहे। इस पर यजीदी फौज ने मश्क पर तीर मारकर सारा पानी बहा दिया। हजरत अब्बास शहीद हो गए। मजलिस के बाद नौहा ख्वानी और मातम हुआ। अंजुमने अब्बासिया प्रवक्ता शोएब रिजवी ने बताया कि 10 मोहर्रम को अलीगंज स्थित इमामबाड़े से जुलूस व ताजिया निकलेगा। यह कर्बला जाएगा। उन्होंने प्रशासन से सफाई इत्यादि व्यवस्थाओं की मांग की है।
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शुक्रवार को सुबह मर्दननाका, गूलरनाका, अलीगंज, खुटला इत्यादि मोहल्लों से आधा दर्जन से ज्यादा मेंहदी ताजिया जुलूस इमामबाड़ों से कोतवाली के लिए कूच किए। हरेक ताजिया में हुजूम शामिल था। दोपहर को सभी मेंहदी ताजिया कोतवाली के सामने आए। यहां देर तक ढोल-ताशों की धुनें गूंजती रहीं। मेला का नजारा रहा। दोपहर बाद मिलाप की रस्म अदा की गई। तीन मेंहदी ताजिए छिपटहरी होते हुए मर्दननाका की ओर रवाना हुए। इनमें सब्जी फरोश और कोदउवा जनाना व दरी वालों के ताजिए शामिल थे। दूसरी तरफ अलीगंज के पीरा व टिर्री के ताजिया जुलूस गूलरनाका अलीगंज की ओर रवाना हुए। मनिहारों का मेंहदी ताजिया खुटला के लिए रवाना हुआ। तीनों ताजिया जुलूसों में भारी भीड़ रही। जगह-जगह लंगर लुटाए गए। निर्धारित रास्तों से गुजरने के बाद तीसरे पहर यह ताजिए अपने-अपने इमामबाड़ों को पहुंच गए। जुलूस का समापन हो गया। उधर, गूलरनाका स्थित बस्सन के इमामबाड़े में आयोजित मजलिस में मुुनव्वर रजा रिजवी (लखनऊ) ने कहा कि इमाम हुसैन की फौज ने हजरत अब्बास सबसे बहादुर थे। यजीदी फौज के सिपाही उन्हें देखकर भागते थे। उनकी शहादत का बयान करते हुए मौलाना ने कहा कि वह बच्चों के लिए पानी लेने फुरात नहर जा रहे थे। उनके साथ में चमड़े का मश्क था। हजारों की संख्या में यजीदी फौज ने उन पर हमला कर दिया। उनके दोनों हाथ काट दिए। आंखों में तीर मार दिए। सर पर भी वार किया। फिर भी अब्बास ने हिम्मत नहीं हारी और मश्क को दांतों से पकड़कर आगे बढ़ते रहे। इस पर यजीदी फौज ने मश्क पर तीर मारकर सारा पानी बहा दिया। हजरत अब्बास शहीद हो गए। मजलिस के बाद नौहा ख्वानी और मातम हुआ। अंजुमने अब्बासिया प्रवक्ता शोएब रिजवी ने बताया कि 10 मोहर्रम को अलीगंज स्थित इमामबाड़े से जुलूस व ताजिया निकलेगा। यह कर्बला जाएगा। उन्होंने प्रशासन से सफाई इत्यादि व्यवस्थाओं की मांग की है।
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