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मछली पालकों को बताए प्रबंधन तकनीक के गुर
Banda
Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
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बांदा। कृषक गोष्ठी में प्रगतिशील मत्स्य पालकों को उत्पादन बढ़ाने और विपणन के उत्कृष्ट अवसरों की जानकारी दी गई। आर्थिक उन्नयन और प्रबंधन तकनीक के गुर बताए। आत्मा योजना के तहत नरैनी के 20 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया।
विश्व मत्सकीय दिवस पर आरसेटी सभागार में बुधवार को मत्स्य कृषक गोष्ठी हुई। जिला ग्राम्य विकास अभिकरण परियोजना निदेशक अजितेंद्र नारायण ने मत्स्य पालकों को आर्थिक और सामाजिक उन्नयन के तौर-तरीके बताए। डीडीएम (नाबार्ड) अमलेश कुमार ने कहा कि उन्नति के लिए मत्स्य उत्पादन बढ़ाना होगा। नाबार्ड की संचालित योजनाएं गिनाईं। सहायक निदेशक (मत्स्य) ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि मत्स्य बीज उत्पादन संवर्धन के साथ ही इंटीग्रेटेड मत्स्य पालक जलाशयों, नदियों व ग्राम समाज के तालाबों में 20 से 30 कुंतल प्रति हेक्टेयर मत्स्य उत्पादन कर आर्थिक तौर पर मजबूत हो सकते हैं। वरिष्ठ निरीक्षक एनके अग्रवाल ने मत्स्य सहकारिता, बीमा, दुर्घटना योजना, स्वयं सहायता समूह गठन व बैंक ऋण आदि की जानकारी दी।
अवर अभियंता बीके चौबे ने प्रबंधन तकनीक और मछली पालन के लिए आदर्श तालाब निर्माण के बारे में समझाया। पशु चिकित्सक सुरेश कनौजिया ने पशुओं में होने वाली बीमारियां और उपाय बताए। वित्तीय साक्षरता अग्रणी बैंक प्रकोष्ठ परामर्शदाता मुमताज खां, मानवोदय संस्थान सचिव वीके त्रिपाठी, मत्स्य पालक रामप्रताप वर्मा, सुविधादाता सीमा खान ने भी गोष्ठी को संबोधित किया। संस्थान निदेशक केपी दिनकर ने बताया कि इसी सभाकक्ष में 3 दिसंबर को उद्योग गोष्ठी होगी। इसमें मत्स्य कृषकों को नई जानकारियां दी जाएंगी। इस अवसर पर मत्स्य विकास अधिकारी/प्रशिक्षक (नरैनी व अतर्रा) वीपी सिंह, एफडीओ सचिन श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।
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विश्व मत्सकीय दिवस पर आरसेटी सभागार में बुधवार को मत्स्य कृषक गोष्ठी हुई। जिला ग्राम्य विकास अभिकरण परियोजना निदेशक अजितेंद्र नारायण ने मत्स्य पालकों को आर्थिक और सामाजिक उन्नयन के तौर-तरीके बताए। डीडीएम (नाबार्ड) अमलेश कुमार ने कहा कि उन्नति के लिए मत्स्य उत्पादन बढ़ाना होगा। नाबार्ड की संचालित योजनाएं गिनाईं। सहायक निदेशक (मत्स्य) ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि मत्स्य बीज उत्पादन संवर्धन के साथ ही इंटीग्रेटेड मत्स्य पालक जलाशयों, नदियों व ग्राम समाज के तालाबों में 20 से 30 कुंतल प्रति हेक्टेयर मत्स्य उत्पादन कर आर्थिक तौर पर मजबूत हो सकते हैं। वरिष्ठ निरीक्षक एनके अग्रवाल ने मत्स्य सहकारिता, बीमा, दुर्घटना योजना, स्वयं सहायता समूह गठन व बैंक ऋण आदि की जानकारी दी।
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अवर अभियंता बीके चौबे ने प्रबंधन तकनीक और मछली पालन के लिए आदर्श तालाब निर्माण के बारे में समझाया। पशु चिकित्सक सुरेश कनौजिया ने पशुओं में होने वाली बीमारियां और उपाय बताए। वित्तीय साक्षरता अग्रणी बैंक प्रकोष्ठ परामर्शदाता मुमताज खां, मानवोदय संस्थान सचिव वीके त्रिपाठी, मत्स्य पालक रामप्रताप वर्मा, सुविधादाता सीमा खान ने भी गोष्ठी को संबोधित किया। संस्थान निदेशक केपी दिनकर ने बताया कि इसी सभाकक्ष में 3 दिसंबर को उद्योग गोष्ठी होगी। इसमें मत्स्य कृषकों को नई जानकारियां दी जाएंगी। इस अवसर पर मत्स्य विकास अधिकारी/प्रशिक्षक (नरैनी व अतर्रा) वीपी सिंह, एफडीओ सचिन श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।
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