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Banda News: 5000 नए बने, 2575 तालाबों का वजूद खत्म

Thu, 24 Oct 2024 12:03 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 24 Oct 2024 12:03 AM IST
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5000 new ponds were built, 2575 ponds ceased to exist
बांदा। पांच हजार नए तालाब बनवाने पर बांदा को मिले राष्ट्रीय जल संरक्षण पुरस्कार के बाद जिले के उन 2575 तालाबों का मुद्दा भी गरमा रहा है, जिनका वजूद ही खत्म हो गया। सैकड़ों तालाब राजस्व अभिलेखों से गायब हो गए। अमर उजाला ने पिछले साल ये खबरें प्रमुखता से प्रकाशित की थीं। गांवों की तो छोड़िये, मंडल मुख्यालय बांदा शहर के प्राचीन और ऐतिहासिक तालाबों का अस्तित्व मिट रहा है।
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पर्यावरण व जल संरक्षण क्षेत्र में सक्रिय कार्य कर रहे आशीष सागर दीक्षित ने कहा कि कई विभागों ने जिले में 5000 नए तालाब बनवाने का दावा और आंकड़ा पेश किया है। इसी पर राष्ट्रीय जल संरक्षण अवार्ड मिला है। इसमें ग्राम पंचायतों के अमृत सरोवर तालाब भी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई पुराने तालाबों की मरम्मत कराकर उन्हें नया दिखा दिया गया। आरटीआई में तालाबों की लिस्ट उन्हें बमुश्किल तब दी गई जब उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट दायर की। काम किसी और नाम किसी का हुआ। शासन की गाइड लाइन की अनदेखी भी हुई।
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आशीष सागर ने कहा है कि पिछले साल सर्वे में जिले में 2575 तालाब खत्म होने की हालत में पाए गए। 602 अफसरों को ढूंढे नहीं मिले। ये खबरें अमर उजाला ने 15 मार्च और 16 मार्च 2023 को प्रमुखता से प्रकाशित की थीं। उन्होंने कहा कि इसके पूर्व मनरेगा से खोदे गए तालाबों में भी ऐसा ही गड़बड़झाला किया गया। कई गांवों का उदाहरण भी दिया गया है।
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शहर के तालाब खोल रहे दावों की पोल
बांदा शहर के प्रमुख प्राचीन तालाब जल संरक्षण के सरकारी दावों की पोल खोलने के लिए काफी हैं। चिराग तले अंधेरा की स्थिति है। इन तालाबों की न तो मरम्मत हो रही है न ही संरक्षण। प्रागी तालाब, कंधरदास तालाब, छाबी तालाब, परशुराम तालाब आदि बदहाल और मिटने की कगार पर हैं। इन पर अवैध कब्जे हैं। मटौंध नगर में भी प्राचीन तालाब खत्म होने की कगार में हैं। आशीष ने कहा कि सपा सरकार में शुरू हुई खेत तालाब योजना की जमीनी हकीकत मौके पर जाकर देखने से उजागर होगी। बुंदेलखंड में वर्ष 2012 तक 2069 प्राचीन तालाब राजस्व अभिलेखों से गायब हो चुके हैं।
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