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केंद्र की सरकारों में बुंदेलखंड को नहीं मिला खास महत्व

Mon, 15 Apr 2019 11:11 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 15 Apr 2019 11:11 PM IST
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केंद्र की सरकारों में बुंदेलखंड को नहीं मिला खास महत्व
बुंदेलखंड की पथरीली धरती पर सभी राजनीतिक दलों ने वोटों की फसल काटी, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल ने सत्ता में पर्याप्त भागीदारी नहीं दी। मंत्रिमंडल के गठन में यहां के जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा ही की गई।
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आजादी के बाद से अब तक बुंदेलखंड ने 50 से ज्यादा सांसद दिए, लेकिन केंद्रीय मंत्रिमंडल में सिर्फ तीन सांसदों को ही जगह मिल सकी। चित्रकूटधाम मंडल से तो आज तक एक भी सांसद को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली।
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बुंदेलखंड ने केंद्र और राज्य सरकारों के गठन में हमेशा से महत्वपूर्ण भागीदारी की। अक्सर जिस दल की सरकार बनी, उसी दल को ही अपनी पसंद बनाया। 1952 से अब तक लोकसभा के 16 हुए चुनावों में बुंदेलखंड से लगभग 50 सांसद चुने गए, लेकिन सरकारों में इस पिछड़े क्षेत्र को नुमाइंदगी न के बराबर मिली।
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बुंदेलखंड में लोकसभा की चार और विधानसभा की 19 सीटें हैं। लोकसभा चुनाव की शुरुआत 1952 में हुई। लोकसभा के पहले ही चुनाव से ही बुंदेलियों ने जिस दल को चुना, सत्ता उसी को ही मिली।

1952 के पहले चुनाव में बांदा, हमीरपुर और झांसी की तत्कालीन सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशी जीते। 1962, 1967 और 1971 के चुनाव में भी कांग्रेस के सांसद चुने गए। अलबत्ता 1967 में बांदा से सीपीआई प्रत्याशी की जीत हुई, लेकिन इस पिछड़े क्षेत्र को केंद्र सरकार में प्रतिनिधित्व नहीं मिला। कोई भी मंत्री नहीं बनाया गया।

1972 में उरई के चौधरी रामसिंह को पहली बार केंद्र सरकार में शामिल किया गया। उसके बाद फिर बुंदेलखंड की लंबे अरसे तक अनदेखी की गई।

वर्ष 2009 में यूपीए की मनमोहन सरकार में झांसी-ललितपुर संसदीय सीट से जीते कांग्रेस के सांसद प्रदीप जैन आदित्य को राज्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद 2014 में मोदी सरकार में झांसी-ललितपुर की ही सांसद रहीं उमा भारती कैबिनेट मंत्री बनीं।


इनसेट...
प्रदेश सरकार में भी बुंदेलखंड की अनदेखी
बांदा। प्रदेश सरकार में बुंदेलखंड की सबसे ज्यादा उपेक्षा मौजूदा भाजपा सरकार में हुई। इसके पूर्व बसपा सरकार में बुंदेलखंड को सबसे ज्यादा महत्व दिया। जबकि सभी विधायक बसपा के नहीं थे। बसपा सरकार में नसीमुद्दीन सिद्दीकी, बाबू सिंह कुशवाहा, दद्दू प्रसाद आदि कैबिनेट मंत्री रहे। इनके अलावा एक दर्जन से ज्यादा बुंदेलखंड के नेताओं को मंत्री या राज्यमंत्री का दर्जा देकर लाल बत्ती से लैस किया गया था। सपा की प्रदेश सरकार में भी बुंदेलखंड को मंत्रीमंडल में विशेष महत्व नहीं मिला। लेकिन सभी 19 सीटें भाजपा की झोली में डाल दिए जाने के बाद भी प्रदेश की भाजपा सरकार ने बुंदेलखंड से मात्र एक मंत्री बनाया गया है। चित्रकूटधाम मंडल की सभी 10 सीटों पर भाजपा के विधायक हैं। लेकिन किसी को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला, जबकि वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव में बुंदेलखंड से भाजपा को 20 लाख से ज्यादा वोट मिले हैं।
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