{"_id":"5c09663ebdec2241a3230208","slug":"21544119870-banda-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बैंक की साहूकारी, किसानों पर आफत भारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बैंक की साहूकारी, किसानों पर आफत भारी
Updated Thu, 06 Dec 2018 11:41 PM IST
विज्ञापन
बांदा। बुंदेलखंड के किसानों पर दैवी आपदाएं तो हर साल आती रहती हैं, पर कुछ ‘आपदाएं’ ऐसी हैं, जिनका पता किसानों को चल ही नहीं पाता है। किसानों के साथ ऐसी ही एक अनजानी आपदा बैंक के रूप में आ पड़ी है। किसानों की लाचारी और बेचारगी को एक किनारे कर बैंक मनमानी और धांधली पर आमादा हो गए हैं। बैंकों को न न्यायपालिका की चिंता है और न ही विभागीय नियम निर्देशों की परवाह है। बैंक खुलेआम किसानों से चक्र वृद्धि ब्याज और मूलधन से अधिक ब्याज वसूल रहे हैं। बैंकों की मनमानी का शिकार एक-दो नहीं बल्कि हजारों किसान हो रहे हैं। इसका खुलासा एक आरटीआई (जन सूचना अधिकार) से हुआ है।
जन सूचना अधिकार अधिनियम में दी जानकारी में इलाहाबाद बैंक के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी ने स्पष्ट बताया कि किसानों से चक्र वृद्धि ब्याज वसूलने का प्रावधान नहीं है। मूलधन से अधिक ब्याज भी नहीं लिया जा सकता है। महोबा के किसान मनमोहन पुत्र रामदयाल को आरटीआई में मांगी सूचना में इलाहाबाद बैंक प्रधान कार्यालय के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी गंगाधर दास ने जानकारी दी थी कि किसानों से चक्र वृद्धि ब्याज वसूलने का प्रावधान नहीं है।
उधर, इलाहाबाद उच्च न्यायालय भी आदेश दे चुका है कि मूलधन से अधिक ब्याज नहीं लिया जा सकता, लेकिन बैंक इन दोनों नियम और निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं। ब्याज पर ब्याज वसूल रहे हैं। मूलधन से अधिक अदायगी के बाद भी किसानों पर बकायेदारी है। पूरे बुंदेलखंड में ऐसे उदाहरण हजारों की संख्या में हैं। इनमें कुछ ताजे मामले हैं। बांदा के एक किसान ने 64 हजार रुपये का कर्ज लिया। सात साल बाद ऋण माफी योजना में सरकार ने किसान के खाते में बैंक को एक लाख रुपये अदा कर दिए। उसके बाद भी अब इलाहाबाद बैंक ने किसान को नोटिस जारी कर 90 हजार 988 रुपये और जमा करने को कहा है। साथ ही जमा न करने पर जमीन, मकान, ट्रैक्टर की नीलामी और कुर्की करने की चेतावनी दी है।
विज्ञापन
रामआसरे मर भी गए, पर कर्ज अभी भी है
बांदा जिले के महुआ ब्लाक के जखनी गांव निवासी किसान रामआसरे अवस्थी ने जनवरी 2010 में 64 हजार रुपये का कर्ज खुरहंड गांव स्थित इलाहाबाद बैंक से लिया था। अदायगी नहीं कर पाए। इस बीच किसान रामआसरे की मौत भी हो गई। पिछले वर्ष जून में प्रदेश सरकार ने फसल ऋण मोचन योजना के तहत एक लाख रुपये रामआसरे के खाते में भेज दिए। यानी लगभग 36 हजार रुपये ब्याज सहित अदायगी हो गई, लेकिन 26 नवंबर को इलाहाबाद बैंक की खुरहंड ब्रांच ने मृतक किसान रामआसरे के नाम नोटिस जारी की।
इसमें कहा कि 90 हजार 988 रुपये और उसका ब्याज बैंक में जमा करें, वरना डीएम के माध्यम से उसकी कृषि, जमीन, ट्रैक्टर, पशुधन, दुकान, मकान आदि की नीलामी कुर्की करवाकर वसूली की जाएगी। किसान के पुत्र अशोक अवस्थी ने बताया कि नोटिस के बाद पूरा परिवार परेशान है।
50 हजार के कर्ज में 1.48 लाख की वसूली
अतर्रा तहसील के मसुरी गांव निवासी किसान जयनारायण त्रिपाठी बताते हैं कि उन्होंने इलाहाबाद बैंक, खुरहंड की ब्रांच से लगभग 5 साल पूर्व 50 हजार रुपये कर्ज लिया था।
कर्जमाफी योजना में ब्याज सहित 82 हजार रुपये सरकार ने बैंक को अदा कर दिए। इसके बाद भी इसी हफ्ते 29 नवंबर को बैंक ने 66 हजार रुपये ऋण अदायगी का नोटिस भेजकर नीलामी कुर्की की चेतावनी दी है। जयनारायण ने बताया कि फिलहाल उन्होंने 20 हजार रुपये जमा कर दिए हैं।
एलडीएम बोले- मूलधन पर लेते हैं वार्षिक ब्याज
किसानों से मूलधन पर वार्षिक ब्याज लिया जाता है। चक्र वृद्धि ब्याज नहीं लेते। किसान अपना खाता चेक करें। बैंक के प्रधान कार्यालय द्वारा आरटीआई में मिली सूचना के बारे में उन्होंने अनभिज्ञता जताई।
वाईएन महेश्वरी, जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक
विज्ञापन
जन सूचना अधिकार अधिनियम में दी जानकारी में इलाहाबाद बैंक के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी ने स्पष्ट बताया कि किसानों से चक्र वृद्धि ब्याज वसूलने का प्रावधान नहीं है। मूलधन से अधिक ब्याज भी नहीं लिया जा सकता है। महोबा के किसान मनमोहन पुत्र रामदयाल को आरटीआई में मांगी सूचना में इलाहाबाद बैंक प्रधान कार्यालय के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी गंगाधर दास ने जानकारी दी थी कि किसानों से चक्र वृद्धि ब्याज वसूलने का प्रावधान नहीं है।
विज्ञापन
उधर, इलाहाबाद उच्च न्यायालय भी आदेश दे चुका है कि मूलधन से अधिक ब्याज नहीं लिया जा सकता, लेकिन बैंक इन दोनों नियम और निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं। ब्याज पर ब्याज वसूल रहे हैं। मूलधन से अधिक अदायगी के बाद भी किसानों पर बकायेदारी है। पूरे बुंदेलखंड में ऐसे उदाहरण हजारों की संख्या में हैं। इनमें कुछ ताजे मामले हैं। बांदा के एक किसान ने 64 हजार रुपये का कर्ज लिया। सात साल बाद ऋण माफी योजना में सरकार ने किसान के खाते में बैंक को एक लाख रुपये अदा कर दिए। उसके बाद भी अब इलाहाबाद बैंक ने किसान को नोटिस जारी कर 90 हजार 988 रुपये और जमा करने को कहा है। साथ ही जमा न करने पर जमीन, मकान, ट्रैक्टर की नीलामी और कुर्की करने की चेतावनी दी है।
विज्ञापन
रामआसरे मर भी गए, पर कर्ज अभी भी है
बांदा जिले के महुआ ब्लाक के जखनी गांव निवासी किसान रामआसरे अवस्थी ने जनवरी 2010 में 64 हजार रुपये का कर्ज खुरहंड गांव स्थित इलाहाबाद बैंक से लिया था। अदायगी नहीं कर पाए। इस बीच किसान रामआसरे की मौत भी हो गई। पिछले वर्ष जून में प्रदेश सरकार ने फसल ऋण मोचन योजना के तहत एक लाख रुपये रामआसरे के खाते में भेज दिए। यानी लगभग 36 हजार रुपये ब्याज सहित अदायगी हो गई, लेकिन 26 नवंबर को इलाहाबाद बैंक की खुरहंड ब्रांच ने मृतक किसान रामआसरे के नाम नोटिस जारी की।
इसमें कहा कि 90 हजार 988 रुपये और उसका ब्याज बैंक में जमा करें, वरना डीएम के माध्यम से उसकी कृषि, जमीन, ट्रैक्टर, पशुधन, दुकान, मकान आदि की नीलामी कुर्की करवाकर वसूली की जाएगी। किसान के पुत्र अशोक अवस्थी ने बताया कि नोटिस के बाद पूरा परिवार परेशान है।
50 हजार के कर्ज में 1.48 लाख की वसूली
अतर्रा तहसील के मसुरी गांव निवासी किसान जयनारायण त्रिपाठी बताते हैं कि उन्होंने इलाहाबाद बैंक, खुरहंड की ब्रांच से लगभग 5 साल पूर्व 50 हजार रुपये कर्ज लिया था।
कर्जमाफी योजना में ब्याज सहित 82 हजार रुपये सरकार ने बैंक को अदा कर दिए। इसके बाद भी इसी हफ्ते 29 नवंबर को बैंक ने 66 हजार रुपये ऋण अदायगी का नोटिस भेजकर नीलामी कुर्की की चेतावनी दी है। जयनारायण ने बताया कि फिलहाल उन्होंने 20 हजार रुपये जमा कर दिए हैं।
एलडीएम बोले- मूलधन पर लेते हैं वार्षिक ब्याज
किसानों से मूलधन पर वार्षिक ब्याज लिया जाता है। चक्र वृद्धि ब्याज नहीं लेते। किसान अपना खाता चेक करें। बैंक के प्रधान कार्यालय द्वारा आरटीआई में मिली सूचना के बारे में उन्होंने अनभिज्ञता जताई।
वाईएन महेश्वरी, जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक