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ओला पीड़ित राहत में पांच लाख का घपला
Updated Sun, 02 Dec 2018 12:04 AM IST
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बांदा। ओला पीड़ितों को बांटी गई राहत राशि में जमकर अनियमितताएं की गईं। जमीन किसी की और मुआवजा मिला किसी और को। कई और भी अनियमितताएं की गईं। शासन से आई आडिट टीम ने पकड़ा है। लगभग पांच लाख रुपये का घोटाला सामने आया है। संबंधित लेखपालों से वसूली के आदेश जारी किए गए हैं। इनमें एक सेवानिवृत्त लेखपाल भी शामिल हैं।
वर्ष 2014-15 में ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा था। लगभग 60 हजार हेक्टेअर की फसल चौपट हुई थी। एक लाख से अधिक किसान प्रभावित हुए थे। सरकार ने प्रभावित किसानों को राहत प्रदान करने के लिए दो अरब कृषि अनुदान (राहत राशि) मुहैया कराई थी। राजस्व विभाग ने लेखपालों की रिपोर्ट के आधार पर इसका वितरण किया था। वितरण के समय भी गड़बड़ियों के तमाम आरोप लगते रहे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
दो माह पूर्व सितंबर में शासन की आडिट टीम ने यहां आकर आडिट किया तो राहत राशि वितरण में लगभग पांच लाख की धांधली पकड़ी। लेखपालों ने खेत किसी का और खाता किसी का तर्ज पर किसानों को राहत राशि बंटवाई। कई इसके उदाहरण भी हैं। अब आडिट टीम की रिपोर्ट के आधार पर अपर जिलाधिकारी (राजस्व/वित्त) संतोष बहादुर सिंह ने आदेश दिए हैं कि दोषी लेखपालों के वेतन से घपले की राशि की वसूली की जाए। लगभग दो दर्जन लेखपालों से रिकवरी कार्रवाई की जा रही है।
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केस -1
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अतर्रा तहसील के हड़हा माफी गांव के तत्कालीन लेखपाल रामबरन ने समलिया पुत्र विश्वनाथ को गाटा संख्या 62011 में फसल का नुकसान दिखाकर 1500 रुपये अनुदान दिलवा दिया। यह लेखपाल मौजूदा समय में बबेरू तहसील में तैनात है। तहसीलदार अतर्रा ने बबेरू तहसीलदार को पत्र भेजकर कृषि अनुदान राशि की कटौती के लिए कहा है।
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केस-2
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अतर्रा तहसील के खुरहंड गांव के तत्कालीन लेखपाल गुलाब सिंह ने किसान जय प्रकाश व दिलावर को अनियमित ढंग से क्रमश: 6300 व 6037 रुपये की राहत राशि दिलवाई। मौजूदा में यह बांदा तहसील में तैनात हैं। तहसीलदार अतर्रा ने बांदा तहसीलदार को पत्र भेजकर वेतन कटौती को कहा है।
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केस-3
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सदर तहसील के डिंगवाही गांव के तत्कालीन लेखपाल जगन्नाथ और कुल कुम्हारी गांव के लेखपाल नंदकिशोर ने दो काश्तकारों को अनियमित तरीके से क्रमश. 7100 व 7200 रुपये कृषि अनुदान दिलाया। लेखपाल जगन्नाथ सेवानिवृत्त हो चुके हैं। तहसीलदार सदर बांदा ने दोनों लेखपालों से यह राशि वसूलकर सरकारी खजाने में जमा कराई है।
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-लेखपालों ने फर्जी इंट्री से दिलाया अनुदान
-शासन की आडिट में हुआ खुलासा
-लेखपालों से रिकवरी कार्रवाई शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
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वर्ष 2014-15 में ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा था। लगभग 60 हजार हेक्टेअर की फसल चौपट हुई थी। एक लाख से अधिक किसान प्रभावित हुए थे। सरकार ने प्रभावित किसानों को राहत प्रदान करने के लिए दो अरब कृषि अनुदान (राहत राशि) मुहैया कराई थी। राजस्व विभाग ने लेखपालों की रिपोर्ट के आधार पर इसका वितरण किया था। वितरण के समय भी गड़बड़ियों के तमाम आरोप लगते रहे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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दो माह पूर्व सितंबर में शासन की आडिट टीम ने यहां आकर आडिट किया तो राहत राशि वितरण में लगभग पांच लाख की धांधली पकड़ी। लेखपालों ने खेत किसी का और खाता किसी का तर्ज पर किसानों को राहत राशि बंटवाई। कई इसके उदाहरण भी हैं। अब आडिट टीम की रिपोर्ट के आधार पर अपर जिलाधिकारी (राजस्व/वित्त) संतोष बहादुर सिंह ने आदेश दिए हैं कि दोषी लेखपालों के वेतन से घपले की राशि की वसूली की जाए। लगभग दो दर्जन लेखपालों से रिकवरी कार्रवाई की जा रही है।
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केस -1
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अतर्रा तहसील के हड़हा माफी गांव के तत्कालीन लेखपाल रामबरन ने समलिया पुत्र विश्वनाथ को गाटा संख्या 62011 में फसल का नुकसान दिखाकर 1500 रुपये अनुदान दिलवा दिया। यह लेखपाल मौजूदा समय में बबेरू तहसील में तैनात है। तहसीलदार अतर्रा ने बबेरू तहसीलदार को पत्र भेजकर कृषि अनुदान राशि की कटौती के लिए कहा है।
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केस-2
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अतर्रा तहसील के खुरहंड गांव के तत्कालीन लेखपाल गुलाब सिंह ने किसान जय प्रकाश व दिलावर को अनियमित ढंग से क्रमश: 6300 व 6037 रुपये की राहत राशि दिलवाई। मौजूदा में यह बांदा तहसील में तैनात हैं। तहसीलदार अतर्रा ने बांदा तहसीलदार को पत्र भेजकर वेतन कटौती को कहा है।
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केस-3
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सदर तहसील के डिंगवाही गांव के तत्कालीन लेखपाल जगन्नाथ और कुल कुम्हारी गांव के लेखपाल नंदकिशोर ने दो काश्तकारों को अनियमित तरीके से क्रमश. 7100 व 7200 रुपये कृषि अनुदान दिलाया। लेखपाल जगन्नाथ सेवानिवृत्त हो चुके हैं। तहसीलदार सदर बांदा ने दोनों लेखपालों से यह राशि वसूलकर सरकारी खजाने में जमा कराई है।
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-लेखपालों ने फर्जी इंट्री से दिलाया अनुदान
-शासन की आडिट में हुआ खुलासा
-लेखपालों से रिकवरी कार्रवाई शुरू
अमर उजाला ब्यूरो