फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   चुनाव में सूख गया बुंदेलखंड का सूखा

चुनाव में सूख गया बुंदेलखंड का सूखा

Wed, 17 Apr 2019 11:23 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 17 Apr 2019 11:23 PM IST
विज्ञापन
चुनाव में सूख गया बुंदेलखंड का सूखा
सब्जबाग औरे रामराज लाने वाले जोशीले भाषण जारी हैं। पर अजब बात है कि इन्हीं नेताओं की जुबां पर पांच साल पहले तक गूंजते रहे मुद्दे नदारद हैं। बुंदेलखंड का सूखा चुनाव में सूख गया।
विज्ञापन



किसानों की आत्महत्याएं हाशिये पर चली गईं। रोजगार के लिए पलायन और अन्ना गायों का संकट इस बार के चुनाव में भाषणों का विषय नहीं बन रहे हैं।

बुंदेलखंड में दैवी आपदाओं का कहर अक्सर तबाही के हालात खड़े कर देता है। कई साल सूखा पड़ा। फसल गई तो बदहाल किसानों का धैर्य जवाब दे गया।


कर्ज के बोझ ने उन्हें और लाचार कर दिया। ऐसे में सैकड़ों बुंदेली किसानों ने आत्महत्याएं कर लीं। हर आत्महत्या पर विपक्षी दलों ने सरकारों को घेरा। अपनी सत्ता आने पर उन्हें सब्जबाग दिखाए।
विज्ञापन



सत्तारूढ़ दल भी विभिन्न हथकंडों से इस मुद्दे को रफा-दफा करता रहा। कर्ज के मर्ज में भी बुंदेली किसान जमकर जकड़े हुए हैं। कर्जमाफी सिर्फ लघु और सीमांत किसानों की हुई। सामान्य किसान इससे दूर रखे गए। ऐसे में अभी भी पूरे बुंदेलखंड में लाखों किसान कर्जदार हैं। बैंक और राजस्व विभाग अक्सर उनकी संपत्तियां, ट्रैक्टर आदि जब्त कर नीलाम कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पिछले कई साल से बुंदेलखंड में अन्ना पशुओं का संकट सिर चढ़कर बोल रहा है। दर्जनों किसानों ने सिर्फ इसलिए आत्महत्या कर लीं कि उनकी फसलें अन्ना जानवरों ने सफाचट कर दीं।

इस मुद्दे पर भी लगातार राजनीतिक दल राजनीति करते रहे। खेती-किसानी घाटे का सौदा बनने और कहीं रोजगार न मिलने पर बड़ी संख्या युवा और ग्रामीण पलायन कर गए। पलायन का सिलसिला हर साल जारी रहा।

यह भी अक्सर राजनीतिक नेताओं के भाषणों का मुद्दा रहा, लेकिन जब 17वीं लोकसभा के लिए आम चुनाव हो रहे हैं और सभी दल अपने प्रत्याशियों की जीत के लिए कवायदें कर रहे हैं तो ऐसे में बुंदेलखंड की ये ज्वलंत समस्याएं ठंडे बस्ते में चली गई हैं।

राजनीतिक नेता इन समस्याओं या संभावित विकास को तवज्जो न देते हुए जातिगत आंकड़ों, जोड़तोड़ और दलबदल की राजनीति में मशगूल हैं। बुुंदेलखंड के ज्वलंत मुद्दे नदारद हैं।

मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली पिछली यूपीए सरकार ने राहुल गांधी की पहल पर यूपी-एमपी में फैले बुंदेलखंड के लिए 7266 करोड़ का विशेष पैकेज दिया था।

इसमें यूपी के बुंदेलखंड को 3506 करोड़ मिले थे, लेकिन यह पैकेज कागजी घोड़े दौड़ाने वाला ज्यादा रहा। पैकेज की कुछेक योजनाओं से ही कुछ लोगों को राहत मिली।

पूर्ण बहुमत वाली मौजूदा भाजपा सरकार ने ऐसा कोई पैकेज नहीं दिया, जबकि इस सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार बुंदेलखंड की सरजमीं पर आए और जोशीले भाषण दे गए।

केंद्र की मौजूदा भाजपा सरकार ने पिछली यूपीए सरकार के बुंदेलखंड विशेष पैकेज को बरकरार रखा। विभिन्न वर्षों में पैकेज के लिए बजट भी दिया।

पिछले दिनों केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री वीपी राधाकृष्णन ने राज्य सभा में पूछे गए एक अतारांकित प्रश्न के जवाब में बताया था कि वर्ष 2009-10 से वर्ष 2017-18 तक उत्तर प्रदेश को बुंदेलखंड पैकेज के तहत कुल 3107.87 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।


यह भी बताया था कि वर्ष 2017-18 में दी गई 917.20 करोड़ की पिछली किस्त में नई परियोजनाओं के लिए 803.57 करोड़ और चालू परियोजनाओं के लिए 113.63 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

आम चुनाव में अपने झंडे गाड़ने में व्यस्त राजनीतिक दलों के नेताओं को शायद ये आंकड़े याद भी न हों कि बुंदेलखंड में कई लाख किसान कर्जदार हैं। उन पर बैंकों का लगभग कई अरब रुपया बकाया है।


सिर्फ बांदा जिले में सवा तीन लाख किसानों पर 24 अरब से ज्यादा का कर्ज है। किसान क्रेडिट कार्ड पर किसानों की क्रेडिट दांव पर लगी है। लगातार ब्याज बढ़ने और अदायगी के हालात न होने से परेशान किसान आत्महत्याएं कर जान गंवा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed