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Balrampur News: 20 घंटे बाद बहाल हुई उतरौला की बिजली, एक लाख आबादी रही परेशान
Fri, 12 Jul 2024 10:48 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Fri, 12 Jul 2024 10:48 PM IST
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बलरामपुर। इटईमैदा के पास बृहस्पतिवार की दोपहर केबल जलने के कारण उतरौला शहर समेत आसपास के गांवों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। करीब 20 घंटे बाद आपूर्ति बहाल हो सकी। ऐसे में लोगों को पूरी रात बिजली संकट से जूझना पड़ा।
बारिश शुरू होने के साथ ही बिजली संकट बढ़ गया है। इटईमैदा के पास से दो लाइन के माध्यम से बिजली आपूर्ति की जाती है। बृहस्पतिवार की दोपहर करीब 12 बजे दूसरी लाइन की भी केबल जल गई। जिसके कारण आर्यनगर, पटेलनगर, गांधीनगर, रफीनगर के अतिरिक्त उतरौला शहर व ग्रामीण इलाकों की बिजली बाधित हो गई। इससे करीब एक लाख की आबादी को पूरी रात अंधेरे में रहना पड़ा। शुक्रवार की सुबह करीब पांच बजे बिजली आपूर्ति बहाल हो सकी। जेई विजय रंजन ने बताया कि बिजली आपूर्ति शुरू कर दी गई है। पहले जली हुई केबल को भी बदला जा रहा है, जो शाम तक पूरा हो जाएगा।
अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान
अधिवक्ता इजहारुल हसन का कहना है कि मुहर्रम में रात भर मजलिसें चलती रहती है। ऐसे में पूरी रात बिजली न होने के बाद भी अफसरों ने कोई संज्ञान नहीं लिया। मोहम्मद असगर का कहना है कि बिजली आपूर्ति के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है। राजमणि तिवारी का कहना है कि फाल्ट होने पर अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते है। मोहित का कहना है कि बिजली संकट को लेकर जनप्रतिनिधि भी चुप है।
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बारिश शुरू होने के साथ ही बिजली संकट बढ़ गया है। इटईमैदा के पास से दो लाइन के माध्यम से बिजली आपूर्ति की जाती है। बृहस्पतिवार की दोपहर करीब 12 बजे दूसरी लाइन की भी केबल जल गई। जिसके कारण आर्यनगर, पटेलनगर, गांधीनगर, रफीनगर के अतिरिक्त उतरौला शहर व ग्रामीण इलाकों की बिजली बाधित हो गई। इससे करीब एक लाख की आबादी को पूरी रात अंधेरे में रहना पड़ा। शुक्रवार की सुबह करीब पांच बजे बिजली आपूर्ति बहाल हो सकी। जेई विजय रंजन ने बताया कि बिजली आपूर्ति शुरू कर दी गई है। पहले जली हुई केबल को भी बदला जा रहा है, जो शाम तक पूरा हो जाएगा।
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अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान
अधिवक्ता इजहारुल हसन का कहना है कि मुहर्रम में रात भर मजलिसें चलती रहती है। ऐसे में पूरी रात बिजली न होने के बाद भी अफसरों ने कोई संज्ञान नहीं लिया। मोहम्मद असगर का कहना है कि बिजली आपूर्ति के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है। राजमणि तिवारी का कहना है कि फाल्ट होने पर अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते है। मोहित का कहना है कि बिजली संकट को लेकर जनप्रतिनिधि भी चुप है।
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