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Balrampur News: यज्ञ में गूंजे सामवेद के मंत्र
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बलरामपुर। आर्यवीर दल की ओर से मकर संक्रांति के अवसर पर रविवार को ओम भवन खलवा में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सामवेद परायण यज्ञ का शुभारंभ किया गया। यज्ञ करके राष्ट्र की उन्नति एवं मानव कल्याण के लिए प्रार्थना की गई। मातृ शक्ति एवं महापुरुषों की शौर्य गाथा याद करते हुए उन्हें नमन किया गया।
तुलसीपुर विधायक कैलाश नाथ शुक्ल एवं सदर विधायक विधायक पल्टूराम ने अमर ज्योति जलाकर देश को आजादी दिलाने वाले अमर शहीदों को नमन किया। आर्यवीर वीरांगनाओं को सत्यार्थ प्रकाश भेंट करते हुए राष्ट्र के प्रति समर्पित रहने का संकल्प दिलाया।
कार्यक्रम के आयोजक अशोक आर्य ने बताया कि खिचड़ी से प्रारंभ होने वाले सामवेद परायण यज्ञ में 84 दिन तक सामवेद के सभी मंत्रों से हवन में आहुति दी जाएगी। इसका समापन 1857 की क्रांति के अग्रदूत मंगल पांडेय के बलिदान दिवस आठ अप्रैल को उनके प्रपौत्र रघुनाथ पांडेय द्वारा अंतिम आहुति देकर किया जाएगा।
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इसके अलावा वसंतपंचमी, वीर हकीकत राय बलिदान दिवस, सीता अष्टमी, महर्षि दयानंद के जन्मदिवस, बौद्ध शिवरात्रि, पंडित लेखराम तृृतीया, आर्य समाज के स्थापना दिवस, हेडगवार जयंती व राम जन्मोत्सव के अवसर पर जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों को मुख्य यजमान बनाकर वेदमंत्रों की विशेष आहुति हवन कुंड में दी जाएंगी। इस अनुष्ठान के बीच प्रत्येक रविवार को जिले के अलग-अलग स्थानों पर भी हवन किया जाएगा।
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तुलसीपुर विधायक कैलाश नाथ शुक्ल एवं सदर विधायक विधायक पल्टूराम ने अमर ज्योति जलाकर देश को आजादी दिलाने वाले अमर शहीदों को नमन किया। आर्यवीर वीरांगनाओं को सत्यार्थ प्रकाश भेंट करते हुए राष्ट्र के प्रति समर्पित रहने का संकल्प दिलाया।
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कार्यक्रम के आयोजक अशोक आर्य ने बताया कि खिचड़ी से प्रारंभ होने वाले सामवेद परायण यज्ञ में 84 दिन तक सामवेद के सभी मंत्रों से हवन में आहुति दी जाएगी। इसका समापन 1857 की क्रांति के अग्रदूत मंगल पांडेय के बलिदान दिवस आठ अप्रैल को उनके प्रपौत्र रघुनाथ पांडेय द्वारा अंतिम आहुति देकर किया जाएगा।
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इसके अलावा वसंतपंचमी, वीर हकीकत राय बलिदान दिवस, सीता अष्टमी, महर्षि दयानंद के जन्मदिवस, बौद्ध शिवरात्रि, पंडित लेखराम तृृतीया, आर्य समाज के स्थापना दिवस, हेडगवार जयंती व राम जन्मोत्सव के अवसर पर जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों को मुख्य यजमान बनाकर वेदमंत्रों की विशेष आहुति हवन कुंड में दी जाएंगी। इस अनुष्ठान के बीच प्रत्येक रविवार को जिले के अलग-अलग स्थानों पर भी हवन किया जाएगा।