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Balrampur News: विभागीय जांच तेज होने से आरोपी के करीबियों की बढ़ी मुश्किलें
Tue, 14 Jul 2026 10:35 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Tue, 14 Jul 2026 10:35 PM IST
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फोटो-26-तुलसीपुर ब्लड बैंक का निरीक्षण करते एसीएमओ ।-स्रोत : विभाग
बलरामपुर। जिले में खून के अवैध कारोबार से जुड़े मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब उससे जुड़े लोगों की जांच तेज हो गई है। विभागीय जांच का दायरा बढ़ाते हुए जांच टीम ने सरकारी ब्लड बैंक की पैथोलॉजिस्ट डॉ. आकांक्षा शुक्ला से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए हैं। केके चेरिटेबल ट्रस्ट के ब्लड बैंक के संचालन में उनकी भूमिका को लेकर टीम ने कई बिंदुओं पर जानकारी जुटाई।
बलरामपुर और गोंडा में अवैध रूप से खून की खरीद-फरोख्त के आरोप में केके चेरिटेबल ट्रस्ट के ब्लड बैंक संचालक अभिषेक सिंह और सौरभ श्रीवास्तव की गिरफ्तारी के बाद विभागीय जांच शुरू की गई है। मुख्य आरोपी अभिषेक सिंह संयुक्त जिला चिकित्सालय में संविदा एलटी के पद पर तैनात था। इसके चलते उसका सरकारी ब्लड बैंक से भी संपर्क बना हुआ था।
गोंडा में एक्सपायरी ब्लड और प्लेटलेट्स चढ़ाए जाने से एक युवती की मौत के मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। इस प्रकरण में अभिषेक सिंह और सौरभ श्रीवास्तव समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
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अभिषेक सिंह के पिता जगदीश सिंह स्वास्थ्य विभाग में वरिष्ठ लिपिक हैं। पहले वह बलरामपुर सीएमओ कार्यालय में तैनात थे, जबकि वर्तमान में गोंडा के पंडरीकृपाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत हैं। विभाग में उनकी पकड़ होने के कारण अभिषेक की पहुंच स्वास्थ्य विभाग तक बनी रही। अब गिरफ्तारी के बाद अभिषेक से जुड़े लोगों और सरकारी ब्लड बैंक के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
जांच अधिकारी एसीएमओ डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पैथोलॉजिस्ट डॉ. आकांक्षा शुक्ला से पूछताछ कर बयान दर्ज किए गए हैं। अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पिछले वर्ष 15 अक्तूबर को दिया था त्यागपत्र
केके चेरिटेबल ट्रस्ट के ब्लड बैंक का संचालन संयुक्त जिला चिकित्सालय की पैथोलॉजिस्ट डॉ. आकांक्षा शुक्ला की डिग्री के आधार पर शुरू हुआ था। डॉ. शुक्ला ने बताया कि संचालक से बेहतर समन्वय नहीं होने के कारण उन्होंने 15 अक्तूबर 2025 को ब्लड बैंक के चिकित्साधिकारी पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने सीएमओ को भी त्यागपत्र सौंप दिया था। उनका कहना है कि 15 अक्तूबर 2025 के बाद से ब्लड बैंक के संचालन से उनका कोई संबंध नहीं था।
अन्य निजी ब्लड बैंकों की भी जांच शुरू
केके चेरिटेबल ट्रस्ट का ब्लड बैंक सील होने के बाद जिले में संचालित अन्य निजी ब्लड बैंकों की भी जांच शुरू कर दी गई है। एसीएमओ डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव ने पैसिफिक चेरिटेबल ब्लड बैंक, तुलसीपुर और फ्यूचर केयर चेरिटेबल ब्लड बैंक, उतरौला का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान ब्लड बैंक के अभिलेख, ब्लड, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स के स्टॉक व रखरखाव, चिकित्सक तथा अन्य कर्मचारियों की जानकारी ली गई। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी के निर्देश पर जिले के सभी ब्लड बैंकों की जांच कराई जा रही है।
एसीएमओ ने बताया कि दोनों ब्लड बैंकों में स्टॉक रजिस्टर और डोनर रजिस्टर सही पाए गए। रजिस्टर में दर्ज डोनरों से फोन पर संपर्क कर सत्यापन भी किया गया। इसके अलावा बायोकेमिस्ट्री जांच, ब्लड बैग और किट की जांच की गई।
उन्होंने संचालकों को निर्देश दिए कि बिना सील-मुहर और आवश्यक जांच प्रक्रिया के ब्लड व प्लेटलेट्स जारी न किए जाएं। एक्सपायरी ब्लड का निस्तारण बायो मेडिकल वेस्ट नियमों के अनुसार ही किया जाए।
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बलरामपुर और गोंडा में अवैध रूप से खून की खरीद-फरोख्त के आरोप में केके चेरिटेबल ट्रस्ट के ब्लड बैंक संचालक अभिषेक सिंह और सौरभ श्रीवास्तव की गिरफ्तारी के बाद विभागीय जांच शुरू की गई है। मुख्य आरोपी अभिषेक सिंह संयुक्त जिला चिकित्सालय में संविदा एलटी के पद पर तैनात था। इसके चलते उसका सरकारी ब्लड बैंक से भी संपर्क बना हुआ था।
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गोंडा में एक्सपायरी ब्लड और प्लेटलेट्स चढ़ाए जाने से एक युवती की मौत के मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। इस प्रकरण में अभिषेक सिंह और सौरभ श्रीवास्तव समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
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अभिषेक सिंह के पिता जगदीश सिंह स्वास्थ्य विभाग में वरिष्ठ लिपिक हैं। पहले वह बलरामपुर सीएमओ कार्यालय में तैनात थे, जबकि वर्तमान में गोंडा के पंडरीकृपाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत हैं। विभाग में उनकी पकड़ होने के कारण अभिषेक की पहुंच स्वास्थ्य विभाग तक बनी रही। अब गिरफ्तारी के बाद अभिषेक से जुड़े लोगों और सरकारी ब्लड बैंक के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
जांच अधिकारी एसीएमओ डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पैथोलॉजिस्ट डॉ. आकांक्षा शुक्ला से पूछताछ कर बयान दर्ज किए गए हैं। अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पिछले वर्ष 15 अक्तूबर को दिया था त्यागपत्र
केके चेरिटेबल ट्रस्ट के ब्लड बैंक का संचालन संयुक्त जिला चिकित्सालय की पैथोलॉजिस्ट डॉ. आकांक्षा शुक्ला की डिग्री के आधार पर शुरू हुआ था। डॉ. शुक्ला ने बताया कि संचालक से बेहतर समन्वय नहीं होने के कारण उन्होंने 15 अक्तूबर 2025 को ब्लड बैंक के चिकित्साधिकारी पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने सीएमओ को भी त्यागपत्र सौंप दिया था। उनका कहना है कि 15 अक्तूबर 2025 के बाद से ब्लड बैंक के संचालन से उनका कोई संबंध नहीं था।
अन्य निजी ब्लड बैंकों की भी जांच शुरू
केके चेरिटेबल ट्रस्ट का ब्लड बैंक सील होने के बाद जिले में संचालित अन्य निजी ब्लड बैंकों की भी जांच शुरू कर दी गई है। एसीएमओ डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव ने पैसिफिक चेरिटेबल ब्लड बैंक, तुलसीपुर और फ्यूचर केयर चेरिटेबल ब्लड बैंक, उतरौला का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान ब्लड बैंक के अभिलेख, ब्लड, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स के स्टॉक व रखरखाव, चिकित्सक तथा अन्य कर्मचारियों की जानकारी ली गई। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी के निर्देश पर जिले के सभी ब्लड बैंकों की जांच कराई जा रही है।
एसीएमओ ने बताया कि दोनों ब्लड बैंकों में स्टॉक रजिस्टर और डोनर रजिस्टर सही पाए गए। रजिस्टर में दर्ज डोनरों से फोन पर संपर्क कर सत्यापन भी किया गया। इसके अलावा बायोकेमिस्ट्री जांच, ब्लड बैग और किट की जांच की गई।
उन्होंने संचालकों को निर्देश दिए कि बिना सील-मुहर और आवश्यक जांच प्रक्रिया के ब्लड व प्लेटलेट्स जारी न किए जाएं। एक्सपायरी ब्लड का निस्तारण बायो मेडिकल वेस्ट नियमों के अनुसार ही किया जाए।