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Balrampur News: 54 गांवों की धरोहरों को नई दिशा देगा थारू सांस्कृतिक संग्रहालय

Mon, 19 Jan 2026 10:58 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 19 Jan 2026 10:58 PM IST
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Tharu Cultural Museum will give a new direction to the heritage of 54 villages
बलरामपुर के इमिलिया कोडर में बना थारू संग्रहालय ।-संवाद
गैसड़ी। थारू जनजाति की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और लोकजीवन के संरक्षण की दिशा में शासन की ओर से महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पचपेड़वा ब्लॉक के इमिलिया कोडर में स्थित थारू संग्रहालय के विकास के लिए 15 लाख रुपये की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। यह संग्रहालय पं. दीन दयाल शोध संस्थान पचपेड़वा की तरफ से महाराणा प्रताप ग्रामोदय इंटर कॉलेज परिसर में संचालित है।
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स्वीकृत अनुदान से संग्रहालय के प्रदर्शनी कक्षों को और सुदृढ़ किया जाएगा। थारू बहुल 54 गांवों की लोक संस्कृतियों को धरोहरों को संरक्षित करने की पहल तेज होगी। इसके साथ ही थारू समाज की जीवनशैली, लोककला, परंपरागत वाद्ययंत्र और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की व्यवस्था बेहतर की जाएगी। दर्शकों के लिए बैठने, सूचना पट्ट और मार्गदर्शन से जुड़ी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी, जिससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सकेगा।
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यह संग्रहालय थारू समाज की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत रखने का प्रमुख केंद्र है। शासन से मिली इस सहायता से संग्रहालय को और अधिक शैक्षणिक व दर्शक-अनुकूल बनाया जाएगा, जिससे छात्रों को अध्ययन में और शोधार्थियों को शोध में लाभ मिलेगा। थारू संग्रहालय में नियमित रूप से शैक्षिक भ्रमण के लिए छात्र पहुंचते हैं। सुविधाओं के विस्तार से सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो सकते हैं।
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थारू समाज को मिलेगी नई दिशा
थारू समाज को नई दिशा देने की पहल होगी। संग्रहालय परिसर में संचालित इंटर कॉलेज से स्थानीय विद्यार्थियों को समाज की पुरानी परंपराओं के बारे में ज्ञान कराया जाना है। सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राम बहादुर का कहना है कि इमलिया कोडर में बना यह संग्रहालय प्रदेश का पहला संग्रहालय है, जिससे लुप्त हो रही परंपरा को जीवंत बनाने के लिए जानी जाती है। नई सुविधाओं से यहां की उपयोगिता बढ़ेगी।


स्वीकृत धनराशि को निर्धारित मानकों के तहत चरणबद्ध तरीके से खर्च किया जाएगा और कार्यों की नियमित निगरानी की जाएगी, ताकि अनुदान का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।
- आशुतोष, प्रधानाचार्य महाराणा प्रताप ग्रामोदय इंटर कॉलेज
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