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चेतावनी बिंदु के पास पहुंचा राप्ती का जलस्तर
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बलरामपुर। पहाड़ों पर भारी बारिश होने से राप्ती नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु के करीब पहुंच गया है। निचले इलाकों में बाढ़ व कटान का खतरा मंडराने लगा है। पहाड़ी नालों में भी बाढ़ आने की संभावना जताई जा रही है। कई दिनों से भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों को शनिवार को बारिश होने से राहत मिली है। बारिश से मौसम सुहाना हो गया है। धान की रोपाई करने के लिए किसान खेतों में जुटने लगे हैं।
मानसून में देरी के चलते खेती-किसानी का काम पिछड़ रहा था। पानी की कमी से खेतों में दरारे आ गई थी। कई दिनों के बाद शनिवार को अचानक मौसम ने करवट ली। सुबह से झमाझम बारिश शुरू हो गई। मौसम वैज्ञानिक अंकित तिवारी का कहना है कि अगले कई दिनों तक भारी बारिश होने की संभावना है जिससे राप्ती नदी व पहाड़ी नालों में बाढ़ आ सकती है। पहाड़ों पर भारी बारिश होने से राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने लगा। चेतावनी बिंदु के 103.62 मीटर के सापेक्ष दोपहर तीन बजे तक राप्ती का जलस्तर 103.54 मीटर तक पहुंच चुका था।
सिसई घाट पर तैनात स्किल वर्क असिस्टेंट मेराज ने बताया कि राप्ती का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। राप्ती में बाढ़ आने से निचले इलाकों में कटान तेज हो गई है। सदर व उतरौला तहसील के 350 गांवों पर बाढ़ व कटान का खतरा मंडराने लगा है। बाढ़ व कटान को लेकर ग्रामीणों को चिंता सताने लगी है। बारिश होने से किसानों को राहत मिली है। किसानों का कहना है कि समय से मानसून न आने से धान के रोपाई में देरी आई है हालांकि बारिश होते ही किसान खेतों में धान की रोपाई करने में जुट गए है। नगरीय व ग्रामीण बाजारों में कीचड़ व गंदगी से भी जूझना पड़ा। एडीएम वित्त एवं राजस्व अरुण कुमार शुक्ल ने बताया कि आपदा प्रबंधन की तरफ से बाढ़ पर निगरानी रखी जा रही है। बाढ़ प्रभावित सभी गांवों में राजस्व निरीक्षकों व हल्का लेखपालों को नजर रखने का निर्देश दिया गया है। कलेक्ट्रेट के साथ-साथ तीनों तहसीलों में भी बाढ़ को लेकर कंट्रोल रूम संचालित किए जा रहे हैं। बाढ़ आने की सूचना कोई भी व्यक्ति कंट्रोल रूम पर दे सकता है।
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मानसून में देरी के चलते खेती-किसानी का काम पिछड़ रहा था। पानी की कमी से खेतों में दरारे आ गई थी। कई दिनों के बाद शनिवार को अचानक मौसम ने करवट ली। सुबह से झमाझम बारिश शुरू हो गई। मौसम वैज्ञानिक अंकित तिवारी का कहना है कि अगले कई दिनों तक भारी बारिश होने की संभावना है जिससे राप्ती नदी व पहाड़ी नालों में बाढ़ आ सकती है। पहाड़ों पर भारी बारिश होने से राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने लगा। चेतावनी बिंदु के 103.62 मीटर के सापेक्ष दोपहर तीन बजे तक राप्ती का जलस्तर 103.54 मीटर तक पहुंच चुका था।
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सिसई घाट पर तैनात स्किल वर्क असिस्टेंट मेराज ने बताया कि राप्ती का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। राप्ती में बाढ़ आने से निचले इलाकों में कटान तेज हो गई है। सदर व उतरौला तहसील के 350 गांवों पर बाढ़ व कटान का खतरा मंडराने लगा है। बाढ़ व कटान को लेकर ग्रामीणों को चिंता सताने लगी है। बारिश होने से किसानों को राहत मिली है। किसानों का कहना है कि समय से मानसून न आने से धान के रोपाई में देरी आई है हालांकि बारिश होते ही किसान खेतों में धान की रोपाई करने में जुट गए है। नगरीय व ग्रामीण बाजारों में कीचड़ व गंदगी से भी जूझना पड़ा। एडीएम वित्त एवं राजस्व अरुण कुमार शुक्ल ने बताया कि आपदा प्रबंधन की तरफ से बाढ़ पर निगरानी रखी जा रही है। बाढ़ प्रभावित सभी गांवों में राजस्व निरीक्षकों व हल्का लेखपालों को नजर रखने का निर्देश दिया गया है। कलेक्ट्रेट के साथ-साथ तीनों तहसीलों में भी बाढ़ को लेकर कंट्रोल रूम संचालित किए जा रहे हैं। बाढ़ आने की सूचना कोई भी व्यक्ति कंट्रोल रूम पर दे सकता है।
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