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राप्ती का घट रहा पानी, परेशानी बरकरार

Tue, 20 Sep 2022 10:51 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 20 Sep 2022 10:51 PM IST
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Rapti's water is decreasing, trouble persists
बलरामपुर। राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 40 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। नदी का पानी तेजी से घट रहा है मगर बाढ़ प्रभावित लोगों की परेशानी जस की तस बनी हुई है। कई मार्गों पर आवागमन तीसरे दिन भी ठप रहा। आवश्यक काम होने पर लोगों को नाव से ही आना-जाना पड़ रहा है। जलभराव वाले क्षेत्रों में संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ गया है। कई हेक्टेअर धान व दलहनी फसलें पानी में डूब गईं हैं।
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विदित हो कि गत सोमवार को राप्ती नदी का जलस्तर सीजन में पहली बार खतरे के निशान 104.620 मीटर से 22 सेंटीमीटर ऊपर 104.840 मीटर पर पहुंचा था। बाढ़ के चलते करीब 100 गांव पानी से घिर गए थे। गौरा चौराहा से तुलसीपुर तथा हरिहरगंज से ललिया जाने वाले प्रमुख मार्ग पर बाढ़ के पानी के चलते आवागमन ठप हो गया था।
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इसके अलावा कई ग्रामीण मार्ग भी बाढ़ के पानी के कारण अवरुद्ध हो गए थे। मंगलवार को नदी का पानी तेजी से घटने लगा। मंगलवार शाम तक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 40 सेंटीमीटर नीचे जाकर 104.220 मीटर पहुंच गया। जलस्तर में कमी लगातार जारी है। इससे प्रशासन ने राहत की सांस ली। मगर हरिहरगंज से कोड़री मार्ग पर मंगलवार को भी पानी के बीच लोगों को नाव से ही आवागमन करना पड़ा।
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इसी तरह गौरा चौराहा से तुलसीपुर मार्ग पर आवागमन के लिए नाव तो लगाई गई है लेकिन उसे चलाने के लिए कोई नाविक नहीं है। मंगलवार दोपहर कई महिलाएं नाव के पास बैठी नाविक के आने का इंतजार करती दिखीं। यहां के लोगों ने प्रशासन से नाव चलाने के लिए नाविक की व्यवस्था करने की मांग की है। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों के कई मार्ग बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हो गए हैं। लोगों को आवागमन में असुविधा हो रही है। बाढ़ के कारण प्रभावित क्षेत्र में करीब 250 हेक्टेअर धान व गन्ने की फसल डूब गई है। लोगों के समक्ष पशुओं के लिए हरे चारे का संकट उत्पन्न हो गया है।

एडीएम/आपदा अधिकारी राम अभिलाष ने बताया कि पहाड़ी नालों व राप्ती नदी में आई बाढ़ से हुए नुकसान का सर्वे राजस्व कर्मियों से कराया जा रहा है। जहां जरूरत है, वहां नावें चलवाई जा रहीं हैं। संक्रामक रोगों से बचाव के लिए क्लोरीन की गोलियां बांटने का निर्देश स्वास्थ्य विभाग को दिया गया है। क्षति के सापेक्ष प्रभावित लोगों को सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
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