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Balrampur News: छात्रा की मौत के बाद डीजे पर पूरी तरह पाबंदी की तैयारी
Wed, 23 Sep 2026 11:40 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 23 Sep 2026 11:40 PM IST
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फोटो-36-बलरामपुर के कलेक्ट्रेट में डीएम को ज्ञापन देने पहुंचे सर्वसमाज के लोग ।-संवाद
बलरामपुर। सात वर्षीय वैष्णवी तिवारी की मौत के बाद जिले में डीजे के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की पहल शुरू हो गई है। बुधवार को नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष डॉ. धीरेंद्र प्रताप सिंह समेत विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी से मुलाकात की। उन्होंने शोभायात्राओं और धार्मिक जुलूसों में डीजे के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की। साथ ही बलरामपुर को प्रदेश का पहला डीजे मुक्त जिला बनाने का प्रस्ताव सौंपा। जिलाधिकारी ने इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया।
संगठनों का कहना है कि धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में तेज आवाज वाले डीजे के इस्तेमाल से बुजुर्गों, बच्चों, मरीजों समेत आम लोगों को परेशानी होती है। ऐसे में केवल ध्वनि की सीमा निर्धारित करने के बजाय शोभायात्राओं और जुलूसों में डीजे के इस्तेमाल पर ही रोक लगाई जानी चाहिए। इसके लिए शहर में प्रवेश करने वाले डीजे वाहनों की निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग भी की गई।
80 डेसीबल के बाद तेजी से घटती है सुरक्षित अवधि
चेस्ट फिजिशियन डॉ. गिरधर चौहान के अनुसार तेज आवाज से होने वाला नुकसान उसकी तीव्रता और उसके संपर्क में रहने की अवधि पर निर्भर करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुरक्षित सुनने संबंधी दिशा-निर्देशों के मुताबिक 80 डेसीबल तक की आवाज में सप्ताह में 40 घंटे तक संपर्क की सीमा बताई गई है। 90 डेसीबल पर यह अवधि चार घंटे, 100 डेसीबल पर करीब 20 मिनट और 110 डेसीबल पर करीब ढाई मिनट रह जाती है। अधिक तीव्र आवाज में कम समय तक संपर्क भी सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि तेज पर्यावरणीय शोर बच्चों में तनाव की प्रतिक्रिया बढ़ा सकता है। इससे रक्तचाप और हृदय गति पर भी असर पड़ सकता है।
स्कूल-अस्पताल के आसपास सख्ती की मांग
सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राम बहादुर ने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के अनुसार आवासीय क्षेत्र में दिन में 55 और रात में 45 डेसीबल की सीमा निर्धारित है। साइलेंस जोन में दिन में 50 और रात में 40 डेसीबल की सीमा है। स्कूल, अस्पताल और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास इन मानकों की निगरानी सुनिश्चित करने की जरूरत है।
डीएम को दिए ज्ञापन में संगठनों ने डीजे वाहनों को शहर में प्रवेश से रोकने के लिए फुलवरिया बाईपास, बहराइच रोड के सेखुईया चौराहा, उतरौला रोड के नहर बालागंज मोड़-महेशभारी चौराहा और तुलसीपुर रोड के चुंगी नाका पर विशेष निगरानी की मांग की है। शोभायात्राओं में वाहन समेत मूर्ति की कुल ऊंचाई अधिकतम 12 फीट रखने का प्रस्ताव भी दिया गया है।
डीजे संचालकों को नोटिस, दो साउंड की सीमा
महराजगंज तराई थाना परिसर में पुलिस ने डीजे संचालकों के साथ बैठक कर ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों की जानकारी दी। संचालकों को नोटिस देकर निर्धारित ध्वनि मानकों का पालन करने और आयोजनों में अधिकतम दो साउंड लगाने के निर्देश दिए गए। बिना अनुमति आयोजन करने या नियमों की अनदेखी करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
बैठक में छात्रा को दी श्रद्धांजलि
समाजसेवी शाबान अली के आवास पर हुई बैठक में वैष्णवी तिवारी को श्रद्धांजलि देने के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। बैठक में भी शोभायात्राओं और जुलूसों में डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग उठी। शाबान अली ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, धर्मगुरुओं, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों तथा जुलूस आयोजन समितियों से डीजे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने की अपील की। बैठक में आरिफ ज्वैलर्स, हाजी नब्बन खान, हाफिज शब्बू, मोहम्मद मोहसिन और मास्टर मोहम्मद हसन कुरैशी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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संगठनों का कहना है कि धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में तेज आवाज वाले डीजे के इस्तेमाल से बुजुर्गों, बच्चों, मरीजों समेत आम लोगों को परेशानी होती है। ऐसे में केवल ध्वनि की सीमा निर्धारित करने के बजाय शोभायात्राओं और जुलूसों में डीजे के इस्तेमाल पर ही रोक लगाई जानी चाहिए। इसके लिए शहर में प्रवेश करने वाले डीजे वाहनों की निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग भी की गई।
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80 डेसीबल के बाद तेजी से घटती है सुरक्षित अवधि
चेस्ट फिजिशियन डॉ. गिरधर चौहान के अनुसार तेज आवाज से होने वाला नुकसान उसकी तीव्रता और उसके संपर्क में रहने की अवधि पर निर्भर करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुरक्षित सुनने संबंधी दिशा-निर्देशों के मुताबिक 80 डेसीबल तक की आवाज में सप्ताह में 40 घंटे तक संपर्क की सीमा बताई गई है। 90 डेसीबल पर यह अवधि चार घंटे, 100 डेसीबल पर करीब 20 मिनट और 110 डेसीबल पर करीब ढाई मिनट रह जाती है। अधिक तीव्र आवाज में कम समय तक संपर्क भी सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि तेज पर्यावरणीय शोर बच्चों में तनाव की प्रतिक्रिया बढ़ा सकता है। इससे रक्तचाप और हृदय गति पर भी असर पड़ सकता है।
स्कूल-अस्पताल के आसपास सख्ती की मांग
सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राम बहादुर ने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के अनुसार आवासीय क्षेत्र में दिन में 55 और रात में 45 डेसीबल की सीमा निर्धारित है। साइलेंस जोन में दिन में 50 और रात में 40 डेसीबल की सीमा है। स्कूल, अस्पताल और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास इन मानकों की निगरानी सुनिश्चित करने की जरूरत है।
डीएम को दिए ज्ञापन में संगठनों ने डीजे वाहनों को शहर में प्रवेश से रोकने के लिए फुलवरिया बाईपास, बहराइच रोड के सेखुईया चौराहा, उतरौला रोड के नहर बालागंज मोड़-महेशभारी चौराहा और तुलसीपुर रोड के चुंगी नाका पर विशेष निगरानी की मांग की है। शोभायात्राओं में वाहन समेत मूर्ति की कुल ऊंचाई अधिकतम 12 फीट रखने का प्रस्ताव भी दिया गया है।
डीजे संचालकों को नोटिस, दो साउंड की सीमा
महराजगंज तराई थाना परिसर में पुलिस ने डीजे संचालकों के साथ बैठक कर ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों की जानकारी दी। संचालकों को नोटिस देकर निर्धारित ध्वनि मानकों का पालन करने और आयोजनों में अधिकतम दो साउंड लगाने के निर्देश दिए गए। बिना अनुमति आयोजन करने या नियमों की अनदेखी करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
बैठक में छात्रा को दी श्रद्धांजलि
समाजसेवी शाबान अली के आवास पर हुई बैठक में वैष्णवी तिवारी को श्रद्धांजलि देने के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। बैठक में भी शोभायात्राओं और जुलूसों में डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग उठी। शाबान अली ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, धर्मगुरुओं, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों तथा जुलूस आयोजन समितियों से डीजे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने की अपील की। बैठक में आरिफ ज्वैलर्स, हाजी नब्बन खान, हाफिज शब्बू, मोहम्मद मोहसिन और मास्टर मोहम्मद हसन कुरैशी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

फोटो-36-बलरामपुर के कलेक्ट्रेट में डीएम को ज्ञापन देने पहुंचे सर्वसमाज के लोग ।-संवाद