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Balrampur News: फाइलों में अटक गई चितौड़गढ़ जलाशय को संवारने की योजना
Mon, 08 Jan 2024 11:37 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Mon, 08 Jan 2024 11:37 PM IST
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बलरामपुर। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित चितौड़गढ़ जलाशय को संवारने की योजना फिलहाल फाइलों में अटकी है। दो माह पहले इस परियोजना के लिए पांच करोड़ रुपये की बजट राशि भी मंजूर हुई थी। इसके बावजूद काम काज में शिथिलता के चलते परियोजना से जुड़े किसी भी कार्य को शुरू करना तो अभी तक आवंटित तक नहीं किया जा सका है। इससे जलाशय को आकर्षक बना कर पर्यटन को बढ़ावा देने व सिंचाई की सुविधा बेहतर बनाने का कार्य किया जाना है।
सोहेलवा संरक्षित क्षेत्र में स्थित चित्तौड़गढ़ जलाशय में जमा सिल्ट की सफाई न होने से जल संग्रहण की क्षमता कम होती जा रही है। 11 किलोमीटर क्षेत्र में फैले बांध की क्षमता 35.6 मिली घनमीटर जल ग्रहण क्षमता की है। इसमें से 31.97 मिली घनमीटर पानी का उपयोग किया जा सकता है। इस जलाशय से गैंसड़ी व पचपेड़वा के लिए निकली 17-17 किलोमीटर लंबी नहर खेती किसानी के लिए वरदान साबित होती हैं। पहाड़ी नाला भांभर, दारा का जल संरक्षित कर 22 वर्ष से क्षेत्र की जनता को बाढ़ की विभीषिका से बचाने में जलाशय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इसमें एकत्रित पानी नहरों में छोड़े जाने के लिए चार गेट लगे हैं। जलाशय को अपग्रेड कराने के तैयार पुनर्निमाण कार्ययोजना के तहत लिए कई कार्य तय किए गए थे। लेकिन बजट स्वीकृति के बाद भी परियोजना का पूरा कार्य फाइलों में ही अटका होने के कारण कोई भी कार्य शुरू तक नही नहीं हो सका है।
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जलाशय का निर्माण 1977-78 में शुरू हुआ और 1997 में पूरा हुआ। छह नवंबर 1997 को तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने परियोजना का लोकार्पण किया। परियोजना पर 34 करोड़ छह लाख 50 हजार खर्च हुआ था। उचित देखभाल न होने से जलाशय की जल संग्रह क्षमता धीरे-धीरे कम होती गई। साल भर 11 किलोमीटर की परिधि में वर्षा का पानी समेटे रहने वाले जलाशय में अत्यधिक सिल्ट जमा होने के कारण लगभग चार किलोमीटर क्षेत्र झाड़ी उग गई हैं।
सिल्ट जमा होने के कारण बनघुसरी गांव से लेकर डुमरी तक जलाशय का अस्तित्व खतरे में पड़ने के साथ ही इसकी जल संग्रहण क्षमता भी घटकर आधी रह गई है। क्षेत्रीय स्तर पर जलाशय का जीर्णोद्धार कराने की मांग बीते लंबे समय से की जा रही है।
प्राथमिकता पर पूरे होंगे सभी कार्य
-डीएम अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि चितौड़गढ़ जलाशय को अपग्रेड कराने की परियोजना पूरी प्राथमिकता में हैं। परियोजना से जुड़े कार्यों में देरी का कारण भी संबंधित विभागों के जिम्मेदारों से पूछा गया है। साथ ही परियोजना से जुड़े कार्यों को शीघ्र शुरू कराने का निर्देश भी सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दिया गया।
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सोहेलवा संरक्षित क्षेत्र में स्थित चित्तौड़गढ़ जलाशय में जमा सिल्ट की सफाई न होने से जल संग्रहण की क्षमता कम होती जा रही है। 11 किलोमीटर क्षेत्र में फैले बांध की क्षमता 35.6 मिली घनमीटर जल ग्रहण क्षमता की है। इसमें से 31.97 मिली घनमीटर पानी का उपयोग किया जा सकता है। इस जलाशय से गैंसड़ी व पचपेड़वा के लिए निकली 17-17 किलोमीटर लंबी नहर खेती किसानी के लिए वरदान साबित होती हैं। पहाड़ी नाला भांभर, दारा का जल संरक्षित कर 22 वर्ष से क्षेत्र की जनता को बाढ़ की विभीषिका से बचाने में जलाशय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
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इसमें एकत्रित पानी नहरों में छोड़े जाने के लिए चार गेट लगे हैं। जलाशय को अपग्रेड कराने के तैयार पुनर्निमाण कार्ययोजना के तहत लिए कई कार्य तय किए गए थे। लेकिन बजट स्वीकृति के बाद भी परियोजना का पूरा कार्य फाइलों में ही अटका होने के कारण कोई भी कार्य शुरू तक नही नहीं हो सका है।
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जलाशय का निर्माण 1977-78 में शुरू हुआ और 1997 में पूरा हुआ। छह नवंबर 1997 को तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने परियोजना का लोकार्पण किया। परियोजना पर 34 करोड़ छह लाख 50 हजार खर्च हुआ था। उचित देखभाल न होने से जलाशय की जल संग्रह क्षमता धीरे-धीरे कम होती गई। साल भर 11 किलोमीटर की परिधि में वर्षा का पानी समेटे रहने वाले जलाशय में अत्यधिक सिल्ट जमा होने के कारण लगभग चार किलोमीटर क्षेत्र झाड़ी उग गई हैं।
सिल्ट जमा होने के कारण बनघुसरी गांव से लेकर डुमरी तक जलाशय का अस्तित्व खतरे में पड़ने के साथ ही इसकी जल संग्रहण क्षमता भी घटकर आधी रह गई है। क्षेत्रीय स्तर पर जलाशय का जीर्णोद्धार कराने की मांग बीते लंबे समय से की जा रही है।
प्राथमिकता पर पूरे होंगे सभी कार्य
-डीएम अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि चितौड़गढ़ जलाशय को अपग्रेड कराने की परियोजना पूरी प्राथमिकता में हैं। परियोजना से जुड़े कार्यों में देरी का कारण भी संबंधित विभागों के जिम्मेदारों से पूछा गया है। साथ ही परियोजना से जुड़े कार्यों को शीघ्र शुरू कराने का निर्देश भी सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दिया गया।