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मनरेगा कर्मियों ने कलेक्ट्रेट में किया प्रदर्शन
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बलरामपुर। मनरेगा के संविदा कर्मियों ने सोमवार को कलेक्ट्रेट में लामबंद होकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एडीएम वित्त एवं राजस्व अरुण कुमार शुक्ल को सौंपा गया। मनरेगा कर्मियों ने सरकार व प्रशासन से समस्याओं का निराकरण कराने की मांग की है। शीघ्र समस्याओं का निराकरण न होने पर मनरेगा कर्मियों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
मनरेगा कर्मचारी महासंघ के मोहम्मद असलम नईमी, वरुण कुमार वर्मा, कृष्ण कुमार वर्मा, आनंद चौधरी, संतोष यादव, राजीव कुमार साहू, कन्हैयालाल व चंद्रभान शुक्ल आदि ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि 15 साल से मनरेगा कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे है।
पत्राचार, व्यक्तिगत मुलाकात व जनप्रतिनिधियों से अनुरोध के बाद भी मनरेगा कर्मियों की सेवा संबंधी समस्याओं का निस्तारण नहीं हुआ है। मनरेगा कर्मी वर्तमान सरकार के साथ उनकी योजनाओं का क्रियान्वयन धरातल पर करने के लिए पूरा सहयोग प्रदान कर रहे है।
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12 जुलाई को पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव के साथ महासंघ के प्रतिनिधियों की बैठक हुई जिसका नतीजा भी शून्य रहा। जेएम पोर्टल से पदों का बिना सृजन किए ही परदाताओं की भर्ती की जा रही है जो वित्तीय अनियमितता है। जेएम पोर्टल को तत्काल प्रतिबंधित कर दिया जाए।
पहले से काम करने वाले मनरेगा कर्मियों के पदों को सृजित किया जाए। अप्रैल 2014 से ईपीएफ का अंशदान देने के लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
मनरेगा कर्मियों की सामाजिक सुरक्षा व सेवा संबंधी मानव संसाधन नीति नहीं है जिसके चलते अल्प मानदेय पर काम करने को विवश है। वित्त अनियमितता के प्रकरणों में मनरेगा कर्मियों के खिलाफ ही कार्रवाई की जाती है जबकि दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है। इन लोगों ने शासन-प्रशासन से इन समस्याओं का निराकरण कराए जाने की मांग की है।
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मनरेगा कर्मचारी महासंघ के मोहम्मद असलम नईमी, वरुण कुमार वर्मा, कृष्ण कुमार वर्मा, आनंद चौधरी, संतोष यादव, राजीव कुमार साहू, कन्हैयालाल व चंद्रभान शुक्ल आदि ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि 15 साल से मनरेगा कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे है।
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पत्राचार, व्यक्तिगत मुलाकात व जनप्रतिनिधियों से अनुरोध के बाद भी मनरेगा कर्मियों की सेवा संबंधी समस्याओं का निस्तारण नहीं हुआ है। मनरेगा कर्मी वर्तमान सरकार के साथ उनकी योजनाओं का क्रियान्वयन धरातल पर करने के लिए पूरा सहयोग प्रदान कर रहे है।
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12 जुलाई को पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव के साथ महासंघ के प्रतिनिधियों की बैठक हुई जिसका नतीजा भी शून्य रहा। जेएम पोर्टल से पदों का बिना सृजन किए ही परदाताओं की भर्ती की जा रही है जो वित्तीय अनियमितता है। जेएम पोर्टल को तत्काल प्रतिबंधित कर दिया जाए।
पहले से काम करने वाले मनरेगा कर्मियों के पदों को सृजित किया जाए। अप्रैल 2014 से ईपीएफ का अंशदान देने के लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
मनरेगा कर्मियों की सामाजिक सुरक्षा व सेवा संबंधी मानव संसाधन नीति नहीं है जिसके चलते अल्प मानदेय पर काम करने को विवश है। वित्त अनियमितता के प्रकरणों में मनरेगा कर्मियों के खिलाफ ही कार्रवाई की जाती है जबकि दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है। इन लोगों ने शासन-प्रशासन से इन समस्याओं का निराकरण कराए जाने की मांग की है।