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Balrampur News: महज आठ चिकित्सकों के सहारे संयुक्त जिला चिकित्सालय
Sun, 25 Feb 2024 11:34 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sun, 25 Feb 2024 11:34 PM IST
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बलरामपुर। जिले की करीब 25 लाख आबादी के इलाज का जिम्मा संभालने वाला संयुक्त जिला चिकित्सालय डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों की कमी से जूझ रहा है। महज आठ चिकित्सकों के सहारे ही इस अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। सर्जन और निश्चेतक न होने के कारण अस्पताल में सामान्य सर्जरी करीब चार माह से ठप है। अस्पताल के सीएमएस ने चिकित्सक व कर्मियों की तैनाती के लिए प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को पत्र लिखा है।
वर्ष 2013 में संयुक्त जिला चिकित्सालय का संचालन शुरू किया गया था। अस्पताल में अत्याधुनिक पैथोलॉजी, डायलिसिस युनिट, सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, डिजिटल एक्सरे और आक्सीजन प्लांट की सुविधा मौजूद होने से जिले के मरीजों में बेहतर इलाज की उम्मीद जगी थी। अत्याधुनिक मशीनों और उपकरणों से लैस होने के बावजूद डाक्टरों व कर्मचारियों की कमी के चलते यहां मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। अस्पताल में डॉक्टरों के कुल स्वीकृत पद 32 हैं, जिसके सापेक्ष यहां स्थायी रूप से मात्र आठ डाक्टरों की तैनाती है। इसी तरह अस्पताल में 19 स्टाफ नर्स के सापेक्ष मात्र सात स्टाफ नर्स तैनात हैं। जिले का प्रमुख अस्पताल होने के कारण यहां करीब पांच सौ मरीज प्रतिदिन आते हैं। ऐसे में डाक्टरों की कमी के चलते उन्हें समुचित इलाज का लाभ नही मिल पाता है।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यहां स्थायी रूप से एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक फिजीशियन, एक सर्जन, दो एनस्थेटिक, एक त्वचा रोग विशेषज्ञ, एक इएनटी सर्जन, एक कार्डियोलाजिस्ट, एक डेंटल सर्जन और तीन महिला व तीन पुरुष इमरजेंसी मेडिकल अफसर की सख्त जरूरत है। इसके लिए शासन स्तर पर कई बार पत्राचार भी किया गया, लेकिन पद के सापेक्ष तो दूर आवश्यक पदों पर भी चिकित्सकों की तैनाती नहीं हो पा रही है। निश्चेतक व सर्जन न होने के कारण यहां पिछले चार माह से सर्जरी ठप है। यही नहीं सर्जन के अभाव में दुर्घटना के शिकार मरीजों को यहां से रेफर होना पड़ता है।
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प्रमुख सचिव को लिखा गया है पत्र
चिकित्सक व कर्मियों की कमी के बावजूद अस्पताल आने वाले मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा दी जा रही है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों के रिक्त पदों पर तैनाती के लिए प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को पत्र लिखा गया है।
-डॉ. राजकुमार वर्मा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक संयुक्त जिला चिकित्सालय
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वर्ष 2013 में संयुक्त जिला चिकित्सालय का संचालन शुरू किया गया था। अस्पताल में अत्याधुनिक पैथोलॉजी, डायलिसिस युनिट, सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, डिजिटल एक्सरे और आक्सीजन प्लांट की सुविधा मौजूद होने से जिले के मरीजों में बेहतर इलाज की उम्मीद जगी थी। अत्याधुनिक मशीनों और उपकरणों से लैस होने के बावजूद डाक्टरों व कर्मचारियों की कमी के चलते यहां मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। अस्पताल में डॉक्टरों के कुल स्वीकृत पद 32 हैं, जिसके सापेक्ष यहां स्थायी रूप से मात्र आठ डाक्टरों की तैनाती है। इसी तरह अस्पताल में 19 स्टाफ नर्स के सापेक्ष मात्र सात स्टाफ नर्स तैनात हैं। जिले का प्रमुख अस्पताल होने के कारण यहां करीब पांच सौ मरीज प्रतिदिन आते हैं। ऐसे में डाक्टरों की कमी के चलते उन्हें समुचित इलाज का लाभ नही मिल पाता है।
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अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यहां स्थायी रूप से एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक फिजीशियन, एक सर्जन, दो एनस्थेटिक, एक त्वचा रोग विशेषज्ञ, एक इएनटी सर्जन, एक कार्डियोलाजिस्ट, एक डेंटल सर्जन और तीन महिला व तीन पुरुष इमरजेंसी मेडिकल अफसर की सख्त जरूरत है। इसके लिए शासन स्तर पर कई बार पत्राचार भी किया गया, लेकिन पद के सापेक्ष तो दूर आवश्यक पदों पर भी चिकित्सकों की तैनाती नहीं हो पा रही है। निश्चेतक व सर्जन न होने के कारण यहां पिछले चार माह से सर्जरी ठप है। यही नहीं सर्जन के अभाव में दुर्घटना के शिकार मरीजों को यहां से रेफर होना पड़ता है।
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प्रमुख सचिव को लिखा गया है पत्र
चिकित्सक व कर्मियों की कमी के बावजूद अस्पताल आने वाले मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा दी जा रही है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों के रिक्त पदों पर तैनाती के लिए प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को पत्र लिखा गया है।
-डॉ. राजकुमार वर्मा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक संयुक्त जिला चिकित्सालय