{"_id":"67532f1aa9477c29810cda2e","slug":"get-the-soil-tested-the-earth-will-spit-out-gold-balrampur-news-c-99-1-slko1019-118059-2024-12-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Balrampur News: मिट्टी की कराएं जांच, धरती उगलेगी सोना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Balrampur News: मिट्टी की कराएं जांच, धरती उगलेगी सोना
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलरामपुर। विश्व मृदा दिवस के अवसर पर बृहस्पतिवार को गोंडा मार्ग स्थित भूमि परीक्षण प्रयोगशाला में गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में किसानों को समय-समय पर मिट्टी की जांच कराने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही किसानों को रासायनिक उर्वरक के बजाय देसी खाद डालने के लिए जागरूक किया गया।
गोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि उपकृषि निदेशक नरेंद्र कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति खत्म हो रही है। किसानों को रासायनिक उर्वरक के बजाय गोबर की खाद का प्रयोग करना चाहिए। खेतों में पराली जलाने से मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। प्रयोगशाला के अध्यक्ष छोटेलाल रावत ने कहा कि पराली को मिट्टी में ही मिलाकर मृदा को स्वस्थ बनाया जा सकता है। साथ ही दो-तीन ट्राॅली गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर खेतों में छिड़काव करें, ताकि पोषक तत्व संतुलित रहें। जिंक की पूर्ति के लिए जिंक सल्फेट का प्रयोग 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करें, इससे धान में खैरा रोग से निजात मिलेगी। गोष्ठी का संचालन वरिष्ठ प्राविधिक सहायक शिव विजय सिंह ने किया। इस अवसर पर राकेश यादव, अरविंद कश्यप, सतीराम वर्मा, अंकित, राम नरेश, जावेद अख्तर, बुद्धिराम, कृपाराम, जगजीवन राम सहित तमाम किसान मौजूद रहे।
विज्ञापन
गोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि उपकृषि निदेशक नरेंद्र कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति खत्म हो रही है। किसानों को रासायनिक उर्वरक के बजाय गोबर की खाद का प्रयोग करना चाहिए। खेतों में पराली जलाने से मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। प्रयोगशाला के अध्यक्ष छोटेलाल रावत ने कहा कि पराली को मिट्टी में ही मिलाकर मृदा को स्वस्थ बनाया जा सकता है। साथ ही दो-तीन ट्राॅली गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर खेतों में छिड़काव करें, ताकि पोषक तत्व संतुलित रहें। जिंक की पूर्ति के लिए जिंक सल्फेट का प्रयोग 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करें, इससे धान में खैरा रोग से निजात मिलेगी। गोष्ठी का संचालन वरिष्ठ प्राविधिक सहायक शिव विजय सिंह ने किया। इस अवसर पर राकेश यादव, अरविंद कश्यप, सतीराम वर्मा, अंकित, राम नरेश, जावेद अख्तर, बुद्धिराम, कृपाराम, जगजीवन राम सहित तमाम किसान मौजूद रहे।
विज्ञापन