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Balrampur News: सोहेलवा में वन संपदा का हुआ विस्तार, बढ़ा दायरा

Wed, 02 Apr 2025 10:35 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 02 Apr 2025 10:35 PM IST
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Forest wealth expanded in Sohelwa, scope increased
बलरामपुर के जरवा क्षेत्र में ​स्थित सोहेलवा जंगल।-संवाद
बलरामपुर। सोहेलवा जंगल का क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए पिछले 10 वर्ष से विशेष प्रयास किया जा रहा है। इस प्रयास से सोहेलवा जंगल का क्षेत्रफल 11 वर्ग किलोमीटर तक बढ़ाने में सफलता मिली है। सोहेलवा जंगल के सभी नौ रेंजों में वृहद पौधारोपण से वन संपदा को बढ़ाने में मदद मिली है। वन क्षेत्र बढ़ने से जंगली जानवरों को सुरिक्षत ठिकाना मिलेगा। बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने में मदद मिलेगी।डीएफओ की ओर से तैयार रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
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सोहेलवा जंगल पहले बलरामपुर व श्रावस्ती जिले में 452 वर्ग किलोमीटर में फैला था। अब सोहेलवा जंगल का वन क्षेत्र 463 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच चुका है। सोहेलवा की वादियाें में जैव विविधता का खजाना है। प्राकृतिक छटाओं को समेटे सोहेलवा जंगल अकूत वन संपदा से भरा है। सोहेलवा वन में दुर्लभ पशु-पक्षियों की प्रजातियां कौतूहल करती हैं। जंगल के बीच से निकले पहाड़ी नाले व जलाशय यहां आने वाले सैलानियों का मन मोह लेते हैं।
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सोहेलवा जंगल में 17 प्रमुख पहाड़ी नालों सहित कई छोटे-छोटे प्राकृतिक जलस्रोत के उद्गम भी हैं। दुर्लभ प्रजाति के जंगली जानवरों सहित तमाम प्रकार की औषधीय वनस्पतियां व जड़ी-बूटियां भी भरपूर मात्रा में उपलब्ध हैं। सोहेलवा जंगल में गिद्ध व अनेकों प्रकार की तितलियां व तरह-तरह चिड़ियां भी पाई जाती हैं। (संवाद)
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नौ रेंजों में बंटा है सोहेलवा जंगल

बलरामपुर व श्रावस्ती जिलों में सोहेलवा जंगल नौ रेंजों में बंटा हुआ है। सभी रेंजों की सीमा नेपाल से जुड़ी है। दोनों देशों की सीमा जुड़ी होने से जीव-जंतुओं को रहने व खाने-पीने के लिए सोहेलवा वन काफी मुफीद है। बलरामपुर जिले में बरहवा, बनकटवा, जनकपुर, तुलसीपुर यूनिट, भांभर व रामपुर रेंज सोहेलवा जंगल में शामिल हैं। श्रावस्ती जिले में सोहेलवा जंगल का पूर्वी व पश्चिमी रेंज स्थित है। भांभर रेंज में चित्तौड़गढ़ व कोहरगड्डी, बरहवा रेंज में गिरगिटही और बनकटवा रेंज में खैरमान जलाशय जीव-जंतुओं के लिए प्राकृतिक वरदान है।



सोहेलवा जंगल में जानवरों की संख्या

बाघ : दो से चार तक

टाइगर : दो से चार तक

तेंदुआ : 60 से 75 तक

हाथी : पांच से 10 तक

लकड़बग्घा : 500 से 1000 तक

जंगली सूकर : एक हजार से अधिक

हिरन : 500 से अधिक

नील गाय :1000 से अधिक

छोटा चीतल : 500 तक

10 वर्ष का प्रयास







सोहेलवा जंगल का दायरा बढ़ाने के लिए पिछले 10 वर्ष से प्रयास किया जा रहा है। हर वर्ष 35 से 40 लाख छायादार, फलदार व इमारती लकड़ियों वाले पौधों का रोपण किया जा रहा है। सोहेलवा जंगल के आसपास 4.5 लाख से छह लाख तक पौधों का रोपण किया गया है। इसी प्रयास से वन क्षेत्र बढ़ाने में मदद मिली है। -डॉ. एम सेम्मारन, डीएफओ
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