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Balrampur News: राजस्व वाद बढ़ने पर एसडीएम समेत आठ अधिकारियों से जवाब तलब

Thu, 29 Oct 2026 09:28 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Thu, 29 Oct 2026 09:28 PM IST
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Explanation sought from eight officials, including the SDM, following an increase in revenue cases
फोटो-23-बलरामपुर में ​स्थित सदर तहसील।-संवाद
बलरामपुर। राजस्व न्यायालयों में मुकदमों का बोझ घटने के बजाय बढ़ने पर प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। जिले के आठ राजस्व न्यायालयों में वादों की संख्या बढ़ने पर संबंधित पीठासीन अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) शिव नारायण सिंह ने सभी संबंधित अधिकारियों को सात दिन के भीतर लिखित जवाब देने का निर्देश दिया है। जवाब मिलने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। तुलसीपुर के एसडीएम न्यायालय में सबसे ज्यादा 368 वाद बढ़े हैं, जबकि बलरामपुर तहसील के नायब तहसीलदार पश्चिमी न्यायालय में 233 वादों की वृद्धि दर्ज की गई है।
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राजस्व वादों का समयबद्ध निस्तारण शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके बावजूद न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या बढ़ने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आयुक्त देवीपाटन मंडल, गोंडा के 16 अक्तूबर के पत्र के क्रम में यह कार्रवाई की गई है। इससे पहले 12 अक्तूबर को राजस्व परिषद के अध्यक्ष ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लंबित राजस्व वादों की समीक्षा की थी। इसके बाद 11 अक्तूबर तक की न्यायालयवार स्थिति के आधार पर उन न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों से जवाब मांगा गया, जहां लंबित मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है।
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प्रशासन की ओर से जारी विवरण के अनुसार, तुलसीपुर के एसडीएम न्यायालय में 368 वाद बढ़े हैं। बलरामपुर तहसील के नायब तहसीलदार पश्चिमी न्यायालय में 233, नायब तहसीलदार पूर्वी न्यायालय में 118, अपर उप जिलाधिकारी न्यायालय में 93, नायब तहसीलदार मथुरा न्यायालय में 58 और एसडीएम न्यायालय में 30 वादों की वृद्धि हुई है। तुलसीपुर के एसडीएम न्यायिक न्यायालय में 36 और उतरौला तहसील के नायब तहसीलदार रेहरा न्यायालय में 21 वाद बढ़े हैं। इस तरह जिले के आठ राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है।
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जमीन के विवाद में तारीख पर तारीख, ग्रामीणों की बढ़ती परेशानी

राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों का असर केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं है। जमीन की पैमाइश, सीमांकन, दाखिल-खारिज, नामांतरण और अन्य राजस्व विवादों का समय पर निस्तारण नहीं होने से संबंधित लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। कई मामलों में जमीन के स्वामित्व या उसकी सीमाओं को लेकर विवाद बना रहता है। ऐसे में पक्षकारों के बीच कहासुनी और तनाव बढ़ने की आशंका रहती है। गांवों में खेत की मेड़, रास्ते और जमीन के बंटवारे जैसे मामले लंबे समय तक अनसुलझे रहने पर आपसी टकराव की स्थिति भी बन सकती है।


हरैया सतघरवा के राम मिलन सिंह ने बताया कि वह नामांतरण के मामले के निस्तारण के लिए तीन महीने से दौड़ रहे हैं। वहीं, गैसड़ी के रामकुमार पांडेय ने कहा कि बंटवारे का एक मामला छह महीने से लंबित है। इसके अलावा, पचपेड़वा के शंकर लाल यादव भी जमीन से जुड़े एक मामले में एक वर्ष से न्याय की उम्मीद कर रहे हैं। प्रशासन की सख्ती के बाद अब लोगों को जल्द न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
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