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Balrampur News: हाईकोर्ट के आदेश पर नहीं बना चकमार्ग, डीपीआरओ के खिलाफ वारंट
Wed, 07 Oct 2026 11:02 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 07 Oct 2026 11:02 PM IST
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फोटो-24-बलरामपुर के ग्राम अहिरौली बुजुर्ग में स्थित कच्चा रास्ता।-संवाद
बलरामपुर। सड़क निर्माण या जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामलों में लोगों को न्याय के लिए हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ रही है। ऐसा ही एक मामला उतरौला तहसील के अहिरौली बुजुर्ग गांव का है। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद चकमार्ग का निर्माण न कराने पर अब जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) के खिलाफ 10 हजार रुपये का जमानती वारंट जारी किया गया है। कोर्ट के सख्त रुख के बाद अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि हाईकोर्ट के आदेश के समय जिले में किस अधिकारी की तैनाती थी।
मामला अहिरौली बुजुर्ग निवासी राम जियावन से जुड़ा है। उन्होंने गाटा संख्या 840/0.049 पर स्थित चकमार्ग का निर्माण कराने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी। इस रास्ते का इस्तेमाल परिषदीय विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थी और ग्रामीण करते हैं। बरसात में रास्ते पर कीचड़ और जलभराव होने से लोगों को आवागमन में परेशानी होती है।
हाईकोर्ट ने 12 फरवरी 2026 को याचिका का निस्तारण करते हुए संबंधित चकमार्ग का निर्माण जल्द पूरा कराने का निर्देश दिया था। याची के अनुसार, आदेश की प्रमाणित प्रति के साथ 23 फरवरी को संबंधित अधिकारियों को प्रार्थना पत्र भी दिया गया। इसके बावजूद चकमार्ग का निर्माण नहीं कराया गया।
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आदेश का पालन न होने पर राम जियावन ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की। 21 अगस्त 2026 को न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया ने नोटिस जारी कर 23 सितंबर को कारण बताने का निर्देश दिया था। तय तारीख पर पंचायत राज विभाग की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। कार्यालय रिपोर्ट में नोटिस की तामीली पर्याप्त पाए जाने के बाद हाईकोर्ट ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के माध्यम से डीपीआरओ के खिलाफ 10 हजार रुपये का जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया।
अब मामले की अगली सुनवाई 28 अक्तूबर 2026 को होगी। इस तारीख पर डीपीआरओ को स्वयं या अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में उपस्थित होना होगा। विभाग में अब संबंधित पत्रावली तलाशकर पूरे मामले की जानकारी जुटाई जा रही है।
गिरफ्तारी या आत्मसमर्पण पर जमानत
कोर्ट के आदेश के मुताबिक गिरफ्तारी या आत्मसमर्पण की स्थिति में दो जमानतदार और समान राशि का व्यक्तिगत बंधपत्र प्रस्तुत करने पर रिहाई की जा सकेगी। इसके साथ अगली सुनवाई में स्वयं अथवा अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होने का वचन देना होगा। हाईकोर्ट आदेश पर भी चकमार्ग निर्माण न कराने और कारण स्पष्ट न करने के बारे में पूरी जानकारी चाहता है।
पूरे मामले पर मंथन तेज
डीपीआरओ अशोक कुमार सचान ने बताया कि कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। मामले से जुड़ी पत्रावली तलाश कर अध्ययन किया जा रहा है। उसके अनुसार पूरी जानकारी हाईकोर्ट को दी जाएगी। वहीं विभाग में चर्चा है कि फरवरी 2026 में जिले की डीपीआरओ श्रेया उपाध्याय थीं, जो अब हरदोई में तैनात हैं। याचिका जिला पंचायत राज अधिकारी गिरीश कुमार के नाम है, जबकि उनका जिले में तैनाती का स्थानांतरण आदेश निरस्त हो गया था। वह इस समय संभल में तैनात हैं। यह अलग बात है कि 23 सितंबर को कोर्ट में मौजूदा डीपीआरओ भी पेश नहीं हुए थे। अब सभी की निगाहें अब 28 अक्तूबर की सुनवाई पर टिकी है।
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मामला अहिरौली बुजुर्ग निवासी राम जियावन से जुड़ा है। उन्होंने गाटा संख्या 840/0.049 पर स्थित चकमार्ग का निर्माण कराने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी। इस रास्ते का इस्तेमाल परिषदीय विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थी और ग्रामीण करते हैं। बरसात में रास्ते पर कीचड़ और जलभराव होने से लोगों को आवागमन में परेशानी होती है।
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हाईकोर्ट ने 12 फरवरी 2026 को याचिका का निस्तारण करते हुए संबंधित चकमार्ग का निर्माण जल्द पूरा कराने का निर्देश दिया था। याची के अनुसार, आदेश की प्रमाणित प्रति के साथ 23 फरवरी को संबंधित अधिकारियों को प्रार्थना पत्र भी दिया गया। इसके बावजूद चकमार्ग का निर्माण नहीं कराया गया।
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आदेश का पालन न होने पर राम जियावन ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की। 21 अगस्त 2026 को न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया ने नोटिस जारी कर 23 सितंबर को कारण बताने का निर्देश दिया था। तय तारीख पर पंचायत राज विभाग की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। कार्यालय रिपोर्ट में नोटिस की तामीली पर्याप्त पाए जाने के बाद हाईकोर्ट ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के माध्यम से डीपीआरओ के खिलाफ 10 हजार रुपये का जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया।
अब मामले की अगली सुनवाई 28 अक्तूबर 2026 को होगी। इस तारीख पर डीपीआरओ को स्वयं या अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में उपस्थित होना होगा। विभाग में अब संबंधित पत्रावली तलाशकर पूरे मामले की जानकारी जुटाई जा रही है।
गिरफ्तारी या आत्मसमर्पण पर जमानत
कोर्ट के आदेश के मुताबिक गिरफ्तारी या आत्मसमर्पण की स्थिति में दो जमानतदार और समान राशि का व्यक्तिगत बंधपत्र प्रस्तुत करने पर रिहाई की जा सकेगी। इसके साथ अगली सुनवाई में स्वयं अथवा अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होने का वचन देना होगा। हाईकोर्ट आदेश पर भी चकमार्ग निर्माण न कराने और कारण स्पष्ट न करने के बारे में पूरी जानकारी चाहता है।
पूरे मामले पर मंथन तेज
डीपीआरओ अशोक कुमार सचान ने बताया कि कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। मामले से जुड़ी पत्रावली तलाश कर अध्ययन किया जा रहा है। उसके अनुसार पूरी जानकारी हाईकोर्ट को दी जाएगी। वहीं विभाग में चर्चा है कि फरवरी 2026 में जिले की डीपीआरओ श्रेया उपाध्याय थीं, जो अब हरदोई में तैनात हैं। याचिका जिला पंचायत राज अधिकारी गिरीश कुमार के नाम है, जबकि उनका जिले में तैनाती का स्थानांतरण आदेश निरस्त हो गया था। वह इस समय संभल में तैनात हैं। यह अलग बात है कि 23 सितंबर को कोर्ट में मौजूदा डीपीआरओ भी पेश नहीं हुए थे। अब सभी की निगाहें अब 28 अक्तूबर की सुनवाई पर टिकी है।