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Ballia News: जलपोत निकालने के लिए काट दी दो बीघा जमीन, ग्रामीणों ने जलपोत के कर्मचारियों को घेरा
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दयाछपरा। ग्राम पंचायत गोपालपुर में कन्हई ब्रह्म बाबा स्थान से उत्तर बालिका विद्यालय के पीछे महीनों से फंसे जलपोत को निकालने के लिए रविवार की रात काटी गई दो बीघा भूमि से गंगा नदी की धारा की दिशा बदल गई। ग्रामीणों के घरों में पानी घुस गया। कटान से चार पेड़ कटकर नदी में बह गए।
नदी की बदली धारा को देखते हुए ग्रामीणों ने जलपोत के कर्मचारियों को घेर लिया। प्रोजेक्ट मैनेजर के लिखित आश्वासन के बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ। ग्रामीणों ने मांग की कि कटान स्थल पर जियो बैग से सुरक्षा के उपाय किए जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि इस सीजन में पहली बार की बाढ़ में ही जलपोत आकर दुबे छपरा में खड़ा हो गया था। तब तक गंगा का पानी घट गया और जलपोत सुखी मिट्टी में फंस गया। उसके बाद तीन बार जलस्तर बढा लेकिन जलपोत को नहीं निकाला गया।
इसे निकालने के लिए जलपोत के कर्मचारियों ने रात में ड्रेन से लगभग 2 बीघा खेत की मिट्टी काट दी। इससे दुबेछपरा में चार पेड़ कटकर नदी में बह गए। इससे नदी की धारा ही बदल गई। पानी ग्रामीणों के घरों में घुसने लगा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जलपोत के कर्मचारियों ने अपने जलपोत के चक्कर में हम लोगों की बर्बादी करने में लगे हुए है। ग्रामीणों ने कर्मचारियों पर मुकदमा कायम करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कटान से ग्राम पंचायत को बचाने के लिए जियो बैग किनारों पर डालना होगा।
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उधर, जलपोत के कर्मचारियों का कहना है कि हम लोगों ने मिट्टी नहीं काटी है, उस स्थान पर कटान शुरू हो गई। बैरिया थाने में पुलिस की देखरेख में ग्रामीणों से हुई बातचीत के बाद जलपोत के प्रोजेक्ट मैनेजर सोनू गुप्ता ने लिखित आश्वासन दिया कि मंगलवार से कटान स्थल पर सुरक्षात्मक कार्य कराया जाएगा। इसके बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ।
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64 दिन से बाढ़ से प्रभावित इलाकों में बीमारियों का खतरा, स्वास्थ्य सेवा बदहाल
-एक सेमी प्रतिघंटा की रफ्तार से गंगा का जलस्तर कम हो रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
मझौवां। गंगा नदी की बाढ़ से दर्जनों गांवों 64 दिन से प्रभावित हैं। हालांकि गंगा का जलस्तर चार दिनों से घटने लगा है। बस्तियों में अब भी पानी का ठहराव है। इसके चलते कीचड़, गंदगी और दुर्गंध से लोगों का जीना मुश्किल हो गया है।
सोमवार को चक्की नौरंगा गांव में कोई नुकसान नहीं हुआ। शासन की तरफ से दूसरी बार की आई बाढ़ में ही प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री वितरित की गई थी। उसके बाद दो बार लोग बाढ़ से प्रभावित हुए लेकिन राहत सामग्री का वितरण नहीं किया गया। इससे पीड़ितों में नाराजगी है। पीड़ित दीनानाथ तिवारी और वीरेंद्र तिवारी ने बताया कि जलभराव के कारण मच्छर और अन्य कीड़ों की संख्या में वृद्धि हो गई है, जिससे मलेरिया, डेंगू और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है।
सुघर छपरा, दूबे छपरा, गोपालपुर, उदई छपरा, प्रसाद छपरा, मुरली छपरा, टेंगरही, नौरंगा सहित अन्य दर्जनों गांवों की लगभग 60 हजार की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। इन इलाकों में दो हजार एकड़ से अधिक फसलें बर्बाद हो गई हैं।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गायघाट गेज पर सोमवार की शाम 4 बजे गंगा का जलस्तर 58.970 मीटर दर्ज किया गया। नदी का जलस्तर एक सेमी प्रति घंटे घट रहा है। खतरे के निशान 57.615 मीटर से 1.355 मीटर ऊपर बह रही है।
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नदी के निशाने पर विद्यालय, मात्र 30 मीटर दूर है
मझौवां। चक्की नौरंगा में प्राथमिक विद्यालय अब नदी के निशाने पर है। कटान स्थल से विद्यालय की दूरी मात्र 30 मीटर है। कभी भी नदी एक झटके में विद्यालय को ध्वस्त कर सकती है। राजमंगल ठाकुर, विनोद ठाकुर, लकड़ी मिश्र, संतोष ठाकुर, रवींद्र ठाकुर, अखिलेश ठाकुर, अक्षय चौबे ने बताया कि अब तक गांव की सैकड़ों एकड़ जमीन के साथ 70 फीसदी मकान, बाजार, मुख्य संपर्क मार्ग गंगा में समा चुके हैं। संवाद
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सरयू नदी के तेवर नरम पड़े
बेल्थरारोड। सरयू नदी के तेवर नरम पड़ गए हैं। रविवार की रात लाल निशान पार करते हुए जलस्तर सोमवार की दोपहर में स्थिर हो गया। जलस्तर में स्थिरता से बाढ़ का खतरा फिलहाल टल गया है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सोमवार की शाम जलस्तर 64.17 मीटर दर्ज किया गया, जो लाल निशान 64.01 मीटर से 16 सेंटीमीटर ऊपर रहा। आधा सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है। केंद्रीय जल आयोग ने अगले 24 घंटे में जलस्तर में कमी आने की संभावना जताई है। ऐसे में बाढ़ की संभावना कम हो गई है। संवाद
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नदी की बदली धारा को देखते हुए ग्रामीणों ने जलपोत के कर्मचारियों को घेर लिया। प्रोजेक्ट मैनेजर के लिखित आश्वासन के बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ। ग्रामीणों ने मांग की कि कटान स्थल पर जियो बैग से सुरक्षा के उपाय किए जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि इस सीजन में पहली बार की बाढ़ में ही जलपोत आकर दुबे छपरा में खड़ा हो गया था। तब तक गंगा का पानी घट गया और जलपोत सुखी मिट्टी में फंस गया। उसके बाद तीन बार जलस्तर बढा लेकिन जलपोत को नहीं निकाला गया।
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इसे निकालने के लिए जलपोत के कर्मचारियों ने रात में ड्रेन से लगभग 2 बीघा खेत की मिट्टी काट दी। इससे दुबेछपरा में चार पेड़ कटकर नदी में बह गए। इससे नदी की धारा ही बदल गई। पानी ग्रामीणों के घरों में घुसने लगा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जलपोत के कर्मचारियों ने अपने जलपोत के चक्कर में हम लोगों की बर्बादी करने में लगे हुए है। ग्रामीणों ने कर्मचारियों पर मुकदमा कायम करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कटान से ग्राम पंचायत को बचाने के लिए जियो बैग किनारों पर डालना होगा।
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उधर, जलपोत के कर्मचारियों का कहना है कि हम लोगों ने मिट्टी नहीं काटी है, उस स्थान पर कटान शुरू हो गई। बैरिया थाने में पुलिस की देखरेख में ग्रामीणों से हुई बातचीत के बाद जलपोत के प्रोजेक्ट मैनेजर सोनू गुप्ता ने लिखित आश्वासन दिया कि मंगलवार से कटान स्थल पर सुरक्षात्मक कार्य कराया जाएगा। इसके बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ।
64 दिन से बाढ़ से प्रभावित इलाकों में बीमारियों का खतरा, स्वास्थ्य सेवा बदहाल
-एक सेमी प्रतिघंटा की रफ्तार से गंगा का जलस्तर कम हो रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
मझौवां। गंगा नदी की बाढ़ से दर्जनों गांवों 64 दिन से प्रभावित हैं। हालांकि गंगा का जलस्तर चार दिनों से घटने लगा है। बस्तियों में अब भी पानी का ठहराव है। इसके चलते कीचड़, गंदगी और दुर्गंध से लोगों का जीना मुश्किल हो गया है।
सोमवार को चक्की नौरंगा गांव में कोई नुकसान नहीं हुआ। शासन की तरफ से दूसरी बार की आई बाढ़ में ही प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री वितरित की गई थी। उसके बाद दो बार लोग बाढ़ से प्रभावित हुए लेकिन राहत सामग्री का वितरण नहीं किया गया। इससे पीड़ितों में नाराजगी है। पीड़ित दीनानाथ तिवारी और वीरेंद्र तिवारी ने बताया कि जलभराव के कारण मच्छर और अन्य कीड़ों की संख्या में वृद्धि हो गई है, जिससे मलेरिया, डेंगू और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है।
सुघर छपरा, दूबे छपरा, गोपालपुर, उदई छपरा, प्रसाद छपरा, मुरली छपरा, टेंगरही, नौरंगा सहित अन्य दर्जनों गांवों की लगभग 60 हजार की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। इन इलाकों में दो हजार एकड़ से अधिक फसलें बर्बाद हो गई हैं।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गायघाट गेज पर सोमवार की शाम 4 बजे गंगा का जलस्तर 58.970 मीटर दर्ज किया गया। नदी का जलस्तर एक सेमी प्रति घंटे घट रहा है। खतरे के निशान 57.615 मीटर से 1.355 मीटर ऊपर बह रही है।
नदी के निशाने पर विद्यालय, मात्र 30 मीटर दूर है
मझौवां। चक्की नौरंगा में प्राथमिक विद्यालय अब नदी के निशाने पर है। कटान स्थल से विद्यालय की दूरी मात्र 30 मीटर है। कभी भी नदी एक झटके में विद्यालय को ध्वस्त कर सकती है। राजमंगल ठाकुर, विनोद ठाकुर, लकड़ी मिश्र, संतोष ठाकुर, रवींद्र ठाकुर, अखिलेश ठाकुर, अक्षय चौबे ने बताया कि अब तक गांव की सैकड़ों एकड़ जमीन के साथ 70 फीसदी मकान, बाजार, मुख्य संपर्क मार्ग गंगा में समा चुके हैं। संवाद
सरयू नदी के तेवर नरम पड़े
बेल्थरारोड। सरयू नदी के तेवर नरम पड़ गए हैं। रविवार की रात लाल निशान पार करते हुए जलस्तर सोमवार की दोपहर में स्थिर हो गया। जलस्तर में स्थिरता से बाढ़ का खतरा फिलहाल टल गया है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सोमवार की शाम जलस्तर 64.17 मीटर दर्ज किया गया, जो लाल निशान 64.01 मीटर से 16 सेंटीमीटर ऊपर रहा। आधा सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है। केंद्रीय जल आयोग ने अगले 24 घंटे में जलस्तर में कमी आने की संभावना जताई है। ऐसे में बाढ़ की संभावना कम हो गई है। संवाद