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Ballia News: बंधे और नदी के बीच 3 किमी की परिधि होगी फ्लड जोन
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बलिया। जिले की दोनों बड़ी नदियों के फ्लड जोन को चिह्नित करने का काम अंतिम चरण में है। फ्लड जोन एक से तीन किलोमीटर का होगा। इसमें गंगा के फ्लड जोन की गूगल मैपिंग का काम लगभग पूरा हो गया है। इस मैपिंग के आधार पर अब बंधे और नदी के बीच का इलाका फ्लड जोन होगा। गूगल मैप पर फ्लड जोन की लाइन भी फाइनल हो गई है। शासन की तरफ से अब इस लाइन पर पिलर का कार्य किया जाएगा।
नदी की सीमाएं निर्धारित होने से अब फ्लड जोन में किसी तरह के स्थाई निर्माण की अनुमति प्रशासन की तरफ से नहीं दी जाएगी। इसमें नदी का पाट से बंधा तक डूब क्षेत्र होगा। जिले मेंं गंगा नदी शहर के काफी करीब से बहती है। इसमें बंधे के उस पार बने भवन भी अब फ्लड जोन में आ जाएंगे। मैपिंग होने से नदी की बाउंड्री भी गूगल पर दिखाई देगी। पिलर लगाए जाने के बाद डूब क्षेत्र की सीमा स्पष्ट दिखाई देगी।
विभाग की माने तो फ्लड जोन मेें हुए स्थाई निर्माण पर भी कार्रवाई की जाएगी। जिले में गंगा नदी की लंबाई लगभग 100 किमी है। नदी कई स्थानों पर एनएच -31 के करीब भी आ गई है। जिससे बाढ़ के दिनों में एनएच को खतरा रहता है। इधर, सरयू नदी के भी फ्लड जोेन की मैपिंग जारी है।
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शहर से सटे बंधे के उस पार बस गई हैं काॅलोनियां : जिले में गंगा किनारे शहर क्षेत्र में बंधे के दक्षिण क्षेत्र में काफी संख्या में नई कालोनी बस गई है। इसको लेकर कई बार प्रशासन स्तर से सचेत भी किया गया । लेकिन स्थाई निर्माण कार्य नहीं रुके। अब डूब क्षेत्र घोषित होने के बाद नई काॅलोनियों में रहने वालों की परेशानी बढ़ सकती है।
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शासन के निर्देश पर नदियों का डूब क्षेत्र तय किया जा रहा है। बंधे से गंगा नदी तक को फ्लड जाेन माना गया है। नदी से पाट व बंधा तक का इलाका डूब क्षेत्र माना गया है। इसमें किसी तरह का स्थाई निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है। पिलर लगाकर नदी की सीमा को बांधा जाएगा। -संजय मिश्रा, अधिशासी अभियंता, बाढ़ विभाग।
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नदी की सीमाएं निर्धारित होने से अब फ्लड जोन में किसी तरह के स्थाई निर्माण की अनुमति प्रशासन की तरफ से नहीं दी जाएगी। इसमें नदी का पाट से बंधा तक डूब क्षेत्र होगा। जिले मेंं गंगा नदी शहर के काफी करीब से बहती है। इसमें बंधे के उस पार बने भवन भी अब फ्लड जोन में आ जाएंगे। मैपिंग होने से नदी की बाउंड्री भी गूगल पर दिखाई देगी। पिलर लगाए जाने के बाद डूब क्षेत्र की सीमा स्पष्ट दिखाई देगी।
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विभाग की माने तो फ्लड जोन मेें हुए स्थाई निर्माण पर भी कार्रवाई की जाएगी। जिले में गंगा नदी की लंबाई लगभग 100 किमी है। नदी कई स्थानों पर एनएच -31 के करीब भी आ गई है। जिससे बाढ़ के दिनों में एनएच को खतरा रहता है। इधर, सरयू नदी के भी फ्लड जोेन की मैपिंग जारी है।
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शहर से सटे बंधे के उस पार बस गई हैं काॅलोनियां : जिले में गंगा किनारे शहर क्षेत्र में बंधे के दक्षिण क्षेत्र में काफी संख्या में नई कालोनी बस गई है। इसको लेकर कई बार प्रशासन स्तर से सचेत भी किया गया । लेकिन स्थाई निर्माण कार्य नहीं रुके। अब डूब क्षेत्र घोषित होने के बाद नई काॅलोनियों में रहने वालों की परेशानी बढ़ सकती है।
शासन के निर्देश पर नदियों का डूब क्षेत्र तय किया जा रहा है। बंधे से गंगा नदी तक को फ्लड जाेन माना गया है। नदी से पाट व बंधा तक का इलाका डूब क्षेत्र माना गया है। इसमें किसी तरह का स्थाई निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है। पिलर लगाकर नदी की सीमा को बांधा जाएगा। -संजय मिश्रा, अधिशासी अभियंता, बाढ़ विभाग।