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Ballia News: वार्ड की खिड़कियों पर पर्दे नहीं, कम वोल्टेज से हीटर नहीं दे रहे गर्माहट
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गलन भरी ठंड के बाद भी जिला अस्पताल के हड्डी वार्ड के खिड़की अब तक नहीं लगाया गया पर्दा।संवाद
बलिया। जिला अस्पताल में पहले रोजाना 15 सौ से 18 सौ मरीज इलाज कराने आते थे। अब गलन भरी ठंड के चलते मरीजों की संख्या घट गई है। मंगलवार को करीब 12 सौ मरीज ओपीडी में पहुंचे। उधर, अस्पताल के हड्डी व सर्जिेकल वार्ड में आठ-आठ बेड पर सौ वाट के दो रूम हीटर लगे हैं, जो वोल्टेज कम होने के कारण ठीक से काम नहीं कर रहे थे। शीशे की खिड़कियों पर पर्दे न होने से ठंड में मरीज व तीमारदार ठिठुरने लगते हैं। अस्पताल के हड्डी व सर्जिेकल वार्ड में आठ-आठ बेड पर सौ वाट के दो रूम हीटर लगे हैं, जो वोल्टेज कम होने के कारण ठीक से काम नहीं कर रहे थे। शीशे की खिड़कियों पर पर्दे न होने से ठंड में मरीज व तीमारदार ठिठुरने लगते हैं। घर से कंबल मंगाने के बाद राहत मिल रही है। अस्पताल का कंबल पतला होने से ठंड नहीं रोक पा रहा है। हड्डी वार्ड, सर्जिकल व बच्चा वार्ड की हालत ज्यादा खराब है। एनआरसी में बड़ा वाला ब्लोअर हीटर होेने से राहत है। इमरजेंसी व मेडिकल वार्ड में छोटा वाला ब्लोअर व हीटर लगा है, सभी खिड़की व दरवाजे बंद होने पर ठंड से राहत मिलती है। वहीं, ओपीडी में सभी चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों को हीटर व ब्लोअर मिला है। अस्पताल परिसर में अलाव की लकड़ी खत्म होने के कारण लोग पेड़ के पत्ते व टहनियों, कूड़े को जलाकर आग सेंक रहे हैं। शाम को नपा के लोग लकड़ी रखते हैं तो रात में जलती है।
हड्डी वार्ड में भर्ती मरीज की तीमारदार प्रर्मिला ने बताया कि उनके बच्चे को ठंड के साथ बुखार है। अस्पताल से सिर्फ एक कंबल मिला है, इससे ठंड नहीं जा रही है। एक अन्य तीमारदार गुड़िया ने बताया कि कंबल घर से लाना पड़ा है। खिड़कियों के शीशे पर पर्दा न होने व वार्ड का दरवाजा खुला रहने के कारण हवा अंदर आती है। ब्लोअर आंच कम दे रहा है। सर्जिकल वार्ड में तीमारदार सरोज ने बताया कि खिड़की पर पर्दा न होने से गलन ज्यादा है। चादर जैसे कंबल से काम नहीं चल रहा है। ठंड व शीतलहर से अस्पताल में भर्ती मरीज व तीमारदार बेहाल हैं।
एनसीआर वार्ड में ब्लोअर मशीन से राहत
जिला अस्पताल के नए भवन में 10 बेड के एनसीआर वार्ड में बच्चों व उनकी मां को ठंड से राहत के लिए ऑटोमेटिक ब्लोअर मशीन लगी है। इससे वार्ड का तापमान ठीक रहता है। खिड़कियों के शीशे पर पर्दा होने से गलन नहीं है। ठंड बढ़ने के बावजूद बच्चों व उनकी मां को राहत रहती है। वार्ड में चार बच्चे भर्ती हैं।
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ठंड को देखते हुए वार्ड की सभी खिड़कियां दुरुस्त कर दी गई हैं। हीटर और ब्लोअर लगाए गए हैं। जरूरत पड़ी तो संख्या बढ़ाई जाएगी। मरीजों के लिए वार्ड में कंबल पर्याप्त हैं। मरीज दो कंबल भी ले सकते हैं। - एसके यादव, सीएमएस, जिला अस्पताल।
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हड्डी वार्ड में भर्ती मरीज की तीमारदार प्रर्मिला ने बताया कि उनके बच्चे को ठंड के साथ बुखार है। अस्पताल से सिर्फ एक कंबल मिला है, इससे ठंड नहीं जा रही है। एक अन्य तीमारदार गुड़िया ने बताया कि कंबल घर से लाना पड़ा है। खिड़कियों के शीशे पर पर्दा न होने व वार्ड का दरवाजा खुला रहने के कारण हवा अंदर आती है। ब्लोअर आंच कम दे रहा है। सर्जिकल वार्ड में तीमारदार सरोज ने बताया कि खिड़की पर पर्दा न होने से गलन ज्यादा है। चादर जैसे कंबल से काम नहीं चल रहा है। ठंड व शीतलहर से अस्पताल में भर्ती मरीज व तीमारदार बेहाल हैं।
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एनसीआर वार्ड में ब्लोअर मशीन से राहत
जिला अस्पताल के नए भवन में 10 बेड के एनसीआर वार्ड में बच्चों व उनकी मां को ठंड से राहत के लिए ऑटोमेटिक ब्लोअर मशीन लगी है। इससे वार्ड का तापमान ठीक रहता है। खिड़कियों के शीशे पर पर्दा होने से गलन नहीं है। ठंड बढ़ने के बावजूद बच्चों व उनकी मां को राहत रहती है। वार्ड में चार बच्चे भर्ती हैं।
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ठंड को देखते हुए वार्ड की सभी खिड़कियां दुरुस्त कर दी गई हैं। हीटर और ब्लोअर लगाए गए हैं। जरूरत पड़ी तो संख्या बढ़ाई जाएगी। मरीजों के लिए वार्ड में कंबल पर्याप्त हैं। मरीज दो कंबल भी ले सकते हैं। - एसके यादव, सीएमएस, जिला अस्पताल।