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टेक्नोलाजी के दौर में बदला आशिर्वाद लेने और देने का तरीका

Thu, 25 Jun 2020 10:18 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 25 Jun 2020 10:18 PM IST
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The way to take and give blessings in the era of technology
बलिया। भले ही फादर्स डे व्यतीत हो गया है, लेकिन अपने पिता से दूर नौकरी पेशा व व्यवसाय से जुड़े लोग आज भी पिता से जुड़ी यादें जहां सोशल मीडिया जैसे व्हाट्सएप और फेसबुक के अलावा अन्य सोशल साइटों पर साझा कर रहें वहीं आनलाइन ही सही लेकिन पिता का आशीर्वाद लेना नहीं भूल रहें। यही कारण है कि इन दिनों सोशल मीडिया पर फादर्स डे की धूम मची है । यह अलग बात है कि बदलते दौर में आशीर्वाद लेने और देने के तरीके में भी टेक्नोलाजी का प्रभाव हावी होता दिख रहा है।
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मेरे पिताजी महादेव राजभर परिश्रमी स्वभाव के व्यक्ति थे। वे कहा करते थे कि जो भी दायित्व तुम्हें मिले उसे निष्ठा के साथ निर्वहन करों। चाहें वह पढ़ाई का क्षेत्र हो या फिर नौकरी का अथवा पारिवारिक जिम्मेदारी का। उनकी वह सीख ने मेरे सफलता में अहम किरदार अदा किया है। इसके अलावा उन्होंने हमेशा यह भी सीखाया कि जहां भी जिस परिस्थिति में रहो अगर कोई दीन हीन अथवा कोई गरीब मिलें तो उसकी मदद जरूर करना। उनकी इस नसीहत का ख्याल मैं आज भी रखता हूं और नौकरी के दौरान भी अगर कहीं कोई नहीं मिल जाता है तो उसकी मदद करना नहीं भूलता।
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डॉक्टर महेंद्र राजभर, परियोजना अधिकारी, डूडा
मेरे पिताजी राजा राम पाठक काफी अनुशासन प्रिय और व्यक्ति थे। वह कहते थे कि तुम्हें जो भी जिम्मेदारी दी जा रही है, उसे अगर तुम्हारे अंदर क्षमता है तो टेकअप करो वरना छोड़ दो। उनकी यह सीख आज ही मेरे काम आती है। पिताजी ने हमेशा कार्य के दौरान टाइम शिड्यूल का ख्याल रखने की खास नसीहत दी, जो नौकरी के दौरान मेरी काफी मदद करती है। वह अनुशासन प्रिय व्यक्ति थे और वें हमें हमेशा अनुशासित रहने का पाठ पढ़ाते रहें। इसके अलावा मेरे जीवन में मेरे बाबा श्रीराम पाठक का भी अहम योगदान हैं। उनकी लगनशीलता और अनुशासित होकर कार्य करने की प्रेरणा आज भी मेरे लिए उपयोगी साबित होती है।
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राजीव पाठक, उपायुक्त, जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र
मेरे पिताजी राम भूषण राय वैसे तो नेताजी के तौर पर प्रसिद्ध हैं, लेकिन उनकी अनुशासन प्रियता और स्वच्छता के प्रति विशेष लगाव मेरे लिए एक नसीहत है। वें हमेशा सिखाते रहते हैं कि जीवन में स्वच्छता की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस से समझौता करना हर इंसान को महंगा पड़ सकता है। इसके अलावा बचपन के दिनों में पढ़ाई के लिए पिताजी डांट और उनके द्वारा सिखाया गया अनुशासन का पाठ आज भी मेरे काम आता है।

सत्येंद्र राय, थानाध्यक्ष, हल्दी
मेरे पिता जी सुखबीर सिंह पुलिस सेवा में सब इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए है। लेकिन बचपन से आज तक वो मुझे समाज की सेवा करने, दूसरों की मदद करने के लिए प्रेरित करते रहें। यह उनकी प्रेरण ही है आज मैं पुलिस उपाधिक्षक के पद पर कार्यरत हूं। वें मेरे रोल माडल है और उनकी हर बात मेरे लिए एक नसीहत के समान होती हैं। जिस पर विषम परिस्थितयों में भी अमल करना नहीं भूलता।
अरूण कुमार सिंह,क्षेत्राधिकारी नगर
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