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लाखों की लागत का शवदाहगृह बना शोपीस
ब्यूरो/अमर उजाला, बलिया
Updated Sat, 04 Jun 2016 11:46 PM IST
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लालगंज क्षेत्र के शिवपुर गंगा घाट पर बने अंत्येष्ठि स्थल पर खड़े जानवर
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जनपद में लाखों रुपये खर्च कर अंत्येष्ठी के लिए शवदाह गृह का निर्माण किया गया। लेकिन अब तक शवदाह में अंत्येष्ठि का कार्य शुरू नहीं किया गया। आलम यह है कि आज भी लोग परंपरागत तरीके से गंगा तथा घाघरा के तटों पर शव का अंतिम संस्कार करते हैं।
जनपद में नदियां प्रदूषित न हो इसके लिए शासन द्वारा गंगा तथा घाघरा नदी के तटों पर 15 शवदाह गृह लाखों की लागत से बनाए गए हैं। लेकिन ये शवदाह गृह केेवल शोपीस बन कर रह गए हैं। लगभग एक शवदाह गृह बनाने के लिए शासन द्वारा 13.5 लाख रुपये धन अवमुक्त किया गया था। फिर भी इन शवदाह गृहों को शुरू नहीं किया गया। जिससे आज भी लोग शव को नदियों में प्रवाहित करते है या फिर नदी के किनारे शव को जलाकर ही अंत्येष्ठि करते है। जिससे नदियों के साथ-साथ पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2014-15 में ग्राम पंचायत शिवपुर कपूर दियर में ग्राम सभा के माध्यम से सेमरिया निवासी ओमप्रकाश तिवारी के लिए जमीन दान दी।
जिसका उद्घाटन विधायक जयप्रकाश अंचल ने 30 मई 2015 को किया था। लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी एक भी अंत्येष्ठि का कार्य शवदाह गृह में नहीं हुआ। यहीं हाल जनपद के अन्य शवदाह गृहों का है जो घाटों पर शोभा बढ़ा रहे है। ऐसे में लोग अब भी परंपरागत तरीकों से गंगा के किनारे शव को जला रहे है। डीपीआरओ का कहना है कि जिले में 15 शवदाह गृह बनकर तैयार हैं। शवदाह गृहों में शवों का अंतिम संस्कार किया जाता है। कोई गंगा किनारे शव को जलाता है तो वह गलत है। इसके प्रति जागरूक किया जाएगा।
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जनपद में नदियां प्रदूषित न हो इसके लिए शासन द्वारा गंगा तथा घाघरा नदी के तटों पर 15 शवदाह गृह लाखों की लागत से बनाए गए हैं। लेकिन ये शवदाह गृह केेवल शोपीस बन कर रह गए हैं। लगभग एक शवदाह गृह बनाने के लिए शासन द्वारा 13.5 लाख रुपये धन अवमुक्त किया गया था। फिर भी इन शवदाह गृहों को शुरू नहीं किया गया। जिससे आज भी लोग शव को नदियों में प्रवाहित करते है या फिर नदी के किनारे शव को जलाकर ही अंत्येष्ठि करते है। जिससे नदियों के साथ-साथ पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2014-15 में ग्राम पंचायत शिवपुर कपूर दियर में ग्राम सभा के माध्यम से सेमरिया निवासी ओमप्रकाश तिवारी के लिए जमीन दान दी।
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जिसका उद्घाटन विधायक जयप्रकाश अंचल ने 30 मई 2015 को किया था। लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी एक भी अंत्येष्ठि का कार्य शवदाह गृह में नहीं हुआ। यहीं हाल जनपद के अन्य शवदाह गृहों का है जो घाटों पर शोभा बढ़ा रहे है। ऐसे में लोग अब भी परंपरागत तरीकों से गंगा के किनारे शव को जला रहे है। डीपीआरओ का कहना है कि जिले में 15 शवदाह गृह बनकर तैयार हैं। शवदाह गृहों में शवों का अंतिम संस्कार किया जाता है। कोई गंगा किनारे शव को जलाता है तो वह गलत है। इसके प्रति जागरूक किया जाएगा।
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