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Ballia News: 160 करोड़ से सरयू नदी पर बन रहा पुल आठ साल बाद भी अधूरा
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पंदह। लाख दावों के बावजूद क्षेत्र की दो बड़ी परियोजनाएं अधूरी हैं। 166.86 करोड़ की इन दोनों परियोजनाओं के समय से पूरा न होने से इनकी लागत भी बढ़ती गई है।
सिकंदरपुर तहसील के जिगिरसंड में 6.45 करोड़ से 2010 में शुरू किया गया राजकीय पाॅलिटेक्निक कॉलेज 14 माह बाद भी अधूरा है। वहीं 160.41 करोड़ से सरयू पर बनने वाले पुल का काम भी आठ सालों से लटका पड़ा है।
राजकीय पाॅलिटेक्निक जिगिरसंड का निर्माण 2010 में शुरू हुआ। उस समय लागत 6.45 करोड़ थी। लेटलतीफी के कारण परियोजना की लागत में संशोधन किया गया। इसके बाद इसकी लागत 8.69 करोड़ तक पहुंच गई।
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प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड को सौंपी गई है। काम धीमी गति से चल रहा है। 2021 में निर्माण पूरा कार्य पूरा कराने का दावा दम तोड़ चुका है। अब भी इसका 25 प्रतिशत कार्य अधूरा है।
उधर उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच सुगम आवागमन के लिए सरयू नदी पर निर्माणाधीन खरीद दरौली पक्का पुल को लेकर इंतजार लंबा होता जा रहा है। पिछले आठ साल में इस पुल का महज आधा हिस्सा ही पूरा हो पाया है।
तत्कालीन सपा सरकार ने 2016 में इस पुल को स्वीकृत करते हुए 17 करोड़ रुपये जारी किए। पुल का निर्माण कार्य करीब ढाई साल बाद एक मार्च 2019 को प्रारंभ हो सका।
सेतु निर्माण निगम ने इसे मार्च 2022 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया। नदी का मिजाज और निर्माण की कच्छप गति के कारण अभी तक निर्धारित पिलर का निर्माण भी पूरा नहीं हो पाया है। लागत का 67 फीसदी (107.92 करोड़) व्यय करने के बाद महज 51.12 प्रतिशत कार्य ही हो सका है।
वहीं, कटान को देखते हुए मॉडल स्टडी कर नौ पिलर बढ़ाने की शासन से अनुमति मांगी गई है, लेकिन अब तक इसमें कोई प्रगति नहीं हो पाई है। ऐसे में सुगम आवागमन की आस लगाए यूपी और बिहार के लोगों की उम्मीद फिलहाल ब्रेक लगा है।
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सिकंदरपुर तहसील के जिगिरसंड में 6.45 करोड़ से 2010 में शुरू किया गया राजकीय पाॅलिटेक्निक कॉलेज 14 माह बाद भी अधूरा है। वहीं 160.41 करोड़ से सरयू पर बनने वाले पुल का काम भी आठ सालों से लटका पड़ा है।
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राजकीय पाॅलिटेक्निक जिगिरसंड का निर्माण 2010 में शुरू हुआ। उस समय लागत 6.45 करोड़ थी। लेटलतीफी के कारण परियोजना की लागत में संशोधन किया गया। इसके बाद इसकी लागत 8.69 करोड़ तक पहुंच गई।
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प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड को सौंपी गई है। काम धीमी गति से चल रहा है। 2021 में निर्माण पूरा कार्य पूरा कराने का दावा दम तोड़ चुका है। अब भी इसका 25 प्रतिशत कार्य अधूरा है।
उधर उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच सुगम आवागमन के लिए सरयू नदी पर निर्माणाधीन खरीद दरौली पक्का पुल को लेकर इंतजार लंबा होता जा रहा है। पिछले आठ साल में इस पुल का महज आधा हिस्सा ही पूरा हो पाया है।
तत्कालीन सपा सरकार ने 2016 में इस पुल को स्वीकृत करते हुए 17 करोड़ रुपये जारी किए। पुल का निर्माण कार्य करीब ढाई साल बाद एक मार्च 2019 को प्रारंभ हो सका।
सेतु निर्माण निगम ने इसे मार्च 2022 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया। नदी का मिजाज और निर्माण की कच्छप गति के कारण अभी तक निर्धारित पिलर का निर्माण भी पूरा नहीं हो पाया है। लागत का 67 फीसदी (107.92 करोड़) व्यय करने के बाद महज 51.12 प्रतिशत कार्य ही हो सका है।
वहीं, कटान को देखते हुए मॉडल स्टडी कर नौ पिलर बढ़ाने की शासन से अनुमति मांगी गई है, लेकिन अब तक इसमें कोई प्रगति नहीं हो पाई है। ऐसे में सुगम आवागमन की आस लगाए यूपी और बिहार के लोगों की उम्मीद फिलहाल ब्रेक लगा है।