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बलिया: दंगाइयों से निपटने के पुलिस को सिखाए गुर, लेकिन धोखा दे गई आसूं गैस गन

Tue, 22 Oct 2019 10:42 PM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Tue, 22 Oct 2019 10:42 PM IST
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Teach police how to deal with rioters on Anti-Terrorism Day
आतंकबाद दिवस के अवसर पर पुलिस लाइन के ग्राउंड में दंगा नियंत्रण उपकरणों का अभ्यास करते जिलाधिका? - फोटो : BALLIA

बलिया जिले में आतंकवाद विरोधी दिवस पर मंगलवार को पुलिस लाइन परेड ग्राउंड में दंगाइयों से निपटने के पुलिसकर्मियों ने पूर्वाभ्यास किया। आतंकवाद से निपटने के लिए शपथ दिलाई गई। इस दौरान पुलिस अधिकारियों के साथ जिलाधिकारी ने फायरिंग कर अपने कौशल का प्रदर्शन किया। जिसमें वे पास हुए। जबकि एसपी सहित कई पुलिस अधिकारी उपकरण में तकनीकी गड़बड़ी के चलते फेल होते नजर आए।

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थानाध्यक्षों के साथ विभिन्न प्रकोष्ठ के कर्मचारियों व अधिकारियों को दंगा निरोधी ड्रिल कराई गई। एसपी देवेन्द्रनाथ एवम एएसपी संजय कुमार के निर्देशन में सभी थानाध्यक्षों के साथ ही अन्य पुलिस बल को अभ्यास कराया गया। इस दौरान आंसू गैस के गोले, रबर बुलेट के साथ ही साथ अन्य दंगा निरोधी गुर सिखाए गए।
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पुलिसकर्मियों को रबर बुलेट चलाने की जानकारी देते हुए एसपी ने हर विषम परिस्थिति से निपटने के बारे में बताया। पुलिसकर्मियों को इस बात की जानकारी दी गई कि आंसू गैस के गोले व मिर्ची बम आदि को फेंकने से पहले हवा के रूख को भी ध्यान में रखा जाए। कहीं ऐसा न हो कि आंसू गैस के गोलों से निकला धुंआ हवा के रूख के चलते उनके ऊपर ही न प्रभावी हो जाए।

हाथ से गोला फेंकने के साथ ही साथ बंदूक से गोला फेंकने के लिए कितने अंश के कोण पर इनको फेंका जाए कि वे दूर तक जाएं साथ ही साथ पिन निकलने के कितने समय के अंतर हो इसकी पूरी जानकारी होनी चाहिए। उसको भीड़ के उपर कैसे फेंक दिया जाए यह जानना भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। इस मौके पर सीओ सीटी अरुण सिंह, चन्द्रकेश सिंह, उमेश कुमार, कोतवाल विपिन सिंह, शशिमौलि पांडेय, सत्येंद्र राय, नागेश उपाध्याय, गगनराज सिंह, संजय त्रिपाठी, राजेश सिंह सहित अन्य थानों के थानाध्यक्ष और सिपाही मौजूद रहे।

पुलिस लाइन परेड ग्राउंड में दंगा नियंत्रण को लेकर चल रहे प्रशिक्षण के दौरान जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत भी मौके पर पहुंचे। इस दौरान उन्हें प्रशिक्षण से संबंधित बातें बता कर आंसू गैस की गन दे दी गई। जिसे पकड़ने के बाद उन्होंने आनन-फानन में मीडिया की ओर ही तान दी। भले ही जिलाधिकारी का यह अंदाज मजाकिया हो, लेकिन कुछ देर के लिए मीडियाकर्मी सकपका गए। इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने तत्परता दिखाते हुए बंदूक की नाल दूसरी तरफ कराई। तब जाकर मीडियाकर्मियों ने राहत की सांस ली। मामले को चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।

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