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लाल निशान से सिर्फ 13 सेमी नीचे बह रही सरयू
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Saryu is flowing only 13 cm below the red mark
- फोटो : BALLIA
लाल निशान छूने को आतुर सरयू नदी के तेवर तल्ख हो गए हैं। जल स्तर में लगातार वृद्धि का सिलसिला जारी रहने से बाढ़ की संभावना बढ़ गई है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार रविवार की शाम जलस्तर 63.880 मीटर दर्ज किया गया, जो लाल निशान 64.010 मी. से महज 13 सेंटीमीटर नीचे है। आयोग के अनुसार एक-एक सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से जलस्तर में वृद्धि हो रही है। आयोग ने सोमवार सुबह जलस्तर खतरे के निशान को पार करने का पूर्वानुमान किया है।
जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। चैनपुर गुलौरा और तुर्तीपार में कटान हो रहा है। कृषि योग्य भूमि कट- कट कर नदी की जलधारा में विलीन हो रही है। नदी का पानी तटवर्ती क्षेत्रों में फैल गया है। हाहानाला, तुर्तीपार और हल्दीरामपुर रेगुलेटर पर पानी का दबाव बढ़ गया है। जलस्तर में वृद्धि से तटवर्ती चैनपुर गुलौरा, टगुनिया, खैराखास, तुर्तीपार, मुजौना, बेल्थराबाजार, सहिया, हल्दीरामपुर आदि ग्रामों के हजारों लोग बाढ़ की आशंका को लेकर सहम गए हैं। एसडीएम सर्वेश कुमार व तहसीलदार जितेंद्र कुमार सिंह ने तटवर्ती क्षेत्रों का दौरा किया। एसडीएम ने कहा कि बाढ़ को लेकर प्रशासन अलर्ट है। तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ चौकियां स्थापित कर कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है। संभावित बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए प्रशासनिक तैयारी पूरी कर ली गई है।
किसानों की उपजाऊ भूमि हुई सरयू नदी में विलिन
बैरिया। सरजू नदी के जलस्तर में बढ़ाव के साथ ही गोपालनगर मौजा के दुमाईगढ़ घाट के सामने तेजी से कटान शुरू हो गया है। इससे गोपालनगर, मानगढ़, शिवाल मठिया, वशिष्ठनगर आदि दीयरांचल के आधा दर्जन गांवों के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहराने लगी है। कटान इसी तरह जारी रहा तो जल्द ही गोपालनगर गांव तक सरयू नदी पहुंच जाएगी। प्रतिदिन 20 बीघा उपजाऊ जमीन सरयू नदी में विलीन हो रही है। पिछले दो दिनों में शत्रुघ्न सिंह, वशिष्ठ सिंह, जनक सिंह, सुरेंद्र सिंह, मुन्ना सिंह, राजनारायण सिंह, कमलेश्वर मिश्र सहित दर्जनों किसानों की उपजाऊ खेती सरयू नदी में विलीन हो चुका है। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता संजय मिश्र का कहना है कि सरयू नदी पर गोपालनगर गांव के सामने कटानरोधी कार्य कराने का कोई प्रस्ताव नहीं है, नहीं हम लोगों के पास गांव को कटान से बचाने के लिए कोई योजना है।
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बरसात के पानी से कटने लगी सड़क
रेवती। टीएस बंधा के डइनियां ढाला-नवकागांव संपर्क मार्ग स्थित पुलिया से जुडा़ सड़क का एक भाग बरसाती पानी से कट कर खतरे का संकेत दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि घाघरा के उफान की स्थिति में सड़क के कटने का खतरा है। नवकागांव घाघरा के किनारे बसा हुआ 1200 की आबादी का गांव है। गांव से आवागमन करने के लिए एकमात्र सड़क टीएस बंधा के डइनियां से निकलती है। प्रधान संजय कुमार यादव ने बताया कि 2013-14 में बनी पुलिया में चारों कोनों पर जो स्लोपिंग बनती हैं वो उस समय नहीं बनी। पुलिया के चारों छोर पर जुड़ी सड़क का हिस्सा बरसात में कटने लगा है। यहां पर सड़क मात्र सवा मीटर ही रह गई है।
गंगा की लहरों से गिरे बिछाए गए बोल्डर
रामगढ़। गंगा का जलस्तर जैसे ही तलहटी से ऊपर उठना शुरू हुआ की शनिवार की शाम सोनार टोला के बगल में बन रहे स्पर के बगल खोदा गया अप्ररन का गड्ढा और लोहे के जाली में बिछाया गया बोल्डर अचानक भरभरा कर गिर गया। जैसे ही कटान शुरू हुआ अफरातफरी मच गई। जब बाढ़ विभाग के अधिशासी अभियंता संजय कुमार मिश्रा को स्पर व खोदे गए गड्ढे के बीच बोल्डर से बनाए गए प्लेटफार्म के बैठने की सूचना दी गई तो उन्होंने कहा कि प्लेटफार्म बैठ गया होगा। ग्रामीणों का कहना है कि अगर गंगा नदी उफनाई तो एनएच-31 के साथ ही सोनारटोला, बनिया टोला, रामगढ़, सुघर छपरा ,केहरपुर, दुबे छपरा, उदई छपरा, गोपालपुर करीब 50 हजार की आबादी तत्काल प्रभावित हो जाएगी। अधिशासी अभियंता संजय कुमार मिश्रा ने बताया कि एनएच-31 पर कोई खतरा नहीं है। गंगा का जलस्तर कम होते हैं। सभी कटान रोधी कार्य पूर्ण कर लिए जाएंगे।
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जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। चैनपुर गुलौरा और तुर्तीपार में कटान हो रहा है। कृषि योग्य भूमि कट- कट कर नदी की जलधारा में विलीन हो रही है। नदी का पानी तटवर्ती क्षेत्रों में फैल गया है। हाहानाला, तुर्तीपार और हल्दीरामपुर रेगुलेटर पर पानी का दबाव बढ़ गया है। जलस्तर में वृद्धि से तटवर्ती चैनपुर गुलौरा, टगुनिया, खैराखास, तुर्तीपार, मुजौना, बेल्थराबाजार, सहिया, हल्दीरामपुर आदि ग्रामों के हजारों लोग बाढ़ की आशंका को लेकर सहम गए हैं। एसडीएम सर्वेश कुमार व तहसीलदार जितेंद्र कुमार सिंह ने तटवर्ती क्षेत्रों का दौरा किया। एसडीएम ने कहा कि बाढ़ को लेकर प्रशासन अलर्ट है। तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ चौकियां स्थापित कर कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है। संभावित बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए प्रशासनिक तैयारी पूरी कर ली गई है।
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किसानों की उपजाऊ भूमि हुई सरयू नदी में विलिन
बैरिया। सरजू नदी के जलस्तर में बढ़ाव के साथ ही गोपालनगर मौजा के दुमाईगढ़ घाट के सामने तेजी से कटान शुरू हो गया है। इससे गोपालनगर, मानगढ़, शिवाल मठिया, वशिष्ठनगर आदि दीयरांचल के आधा दर्जन गांवों के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहराने लगी है। कटान इसी तरह जारी रहा तो जल्द ही गोपालनगर गांव तक सरयू नदी पहुंच जाएगी। प्रतिदिन 20 बीघा उपजाऊ जमीन सरयू नदी में विलीन हो रही है। पिछले दो दिनों में शत्रुघ्न सिंह, वशिष्ठ सिंह, जनक सिंह, सुरेंद्र सिंह, मुन्ना सिंह, राजनारायण सिंह, कमलेश्वर मिश्र सहित दर्जनों किसानों की उपजाऊ खेती सरयू नदी में विलीन हो चुका है। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता संजय मिश्र का कहना है कि सरयू नदी पर गोपालनगर गांव के सामने कटानरोधी कार्य कराने का कोई प्रस्ताव नहीं है, नहीं हम लोगों के पास गांव को कटान से बचाने के लिए कोई योजना है।
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बरसात के पानी से कटने लगी सड़क
रेवती। टीएस बंधा के डइनियां ढाला-नवकागांव संपर्क मार्ग स्थित पुलिया से जुडा़ सड़क का एक भाग बरसाती पानी से कट कर खतरे का संकेत दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि घाघरा के उफान की स्थिति में सड़क के कटने का खतरा है। नवकागांव घाघरा के किनारे बसा हुआ 1200 की आबादी का गांव है। गांव से आवागमन करने के लिए एकमात्र सड़क टीएस बंधा के डइनियां से निकलती है। प्रधान संजय कुमार यादव ने बताया कि 2013-14 में बनी पुलिया में चारों कोनों पर जो स्लोपिंग बनती हैं वो उस समय नहीं बनी। पुलिया के चारों छोर पर जुड़ी सड़क का हिस्सा बरसात में कटने लगा है। यहां पर सड़क मात्र सवा मीटर ही रह गई है।
गंगा की लहरों से गिरे बिछाए गए बोल्डर
रामगढ़। गंगा का जलस्तर जैसे ही तलहटी से ऊपर उठना शुरू हुआ की शनिवार की शाम सोनार टोला के बगल में बन रहे स्पर के बगल खोदा गया अप्ररन का गड्ढा और लोहे के जाली में बिछाया गया बोल्डर अचानक भरभरा कर गिर गया। जैसे ही कटान शुरू हुआ अफरातफरी मच गई। जब बाढ़ विभाग के अधिशासी अभियंता संजय कुमार मिश्रा को स्पर व खोदे गए गड्ढे के बीच बोल्डर से बनाए गए प्लेटफार्म के बैठने की सूचना दी गई तो उन्होंने कहा कि प्लेटफार्म बैठ गया होगा। ग्रामीणों का कहना है कि अगर गंगा नदी उफनाई तो एनएच-31 के साथ ही सोनारटोला, बनिया टोला, रामगढ़, सुघर छपरा ,केहरपुर, दुबे छपरा, उदई छपरा, गोपालपुर करीब 50 हजार की आबादी तत्काल प्रभावित हो जाएगी। अधिशासी अभियंता संजय कुमार मिश्रा ने बताया कि एनएच-31 पर कोई खतरा नहीं है। गंगा का जलस्तर कम होते हैं। सभी कटान रोधी कार्य पूर्ण कर लिए जाएंगे।